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मुख्यमंत्री याेगी अादित्यनाथ
Bureau | May 17, 2020 | 0 Comments

Uttar Pradesh Government returned 15000 laborers in 500 Buses

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हरियाणा से 50 बसों में गए 1500 मजदूरों को वापस लौटाया

उत्तर प्रदेश सरकार ने हरियाणा से भेजे गए करीब 15 सौ प्रवासी कामगारों को अपने राज्य में लेने से इंकार कर दिया है। हरियाणा सरकार ने रविवार को 50 बसों में इन प्रवासी मजदूरों को सहारनपुर भेजा था। वहां उत्तर प्रदेश प्रशासन ने इन प्रवासी मजदूरों को यह कहते हुए हरियाणा वापस लौटा दिया कि इन्हें ठहराने की वहां फिलहाल कोई व्यवस्थाएं नहीं हैंं। अब यह सभी प्रवासी मजदूर वापस हरियाणा में लाकर ठहराए गए हैं। हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज नेे इसकी पुष्टि की है।

बता दें, हरियाणा सरकार ने मजदूरों को उत्तर प्रदेश भेजने से पहले वहां केे शासन से पत्राचार किया था। मजदूरों को ले जाने के लिए एनओसी भी ली थी, लेकिन इसके बावजूद मजदूरों को वापस लौटाना सरकार की समझ में नहीं आ रहा। हालांकि सहारनपुर के स्थानीय प्रशासन का कहना है कि वहां कुछ और मजदूरों के हंगामे के कारण उन पर लाठीचार्ज करना पड़ा है, जिससे फिलहाल वह और मजदूरों को लेने की स्थिति में नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि हरियाणा से अभी तक डेढ़ लाख लोग अपने मूल प्रदेशों को भेजे जा चुके हैं। पचास हजार से एक लाख लोग खुद पैदल ही निकल पड़े, जबकि दो से ढ़ाई लाख लोग चोरी छिपे निकले हैं। पंजाब के कारण सबसे बड़ी समस्या हरियाणा के सामने आई। पंजाब इन लोगों को अपने प्रदेश में नहीं रोक सका। हरियाणा के मुख्यमंत्री ने चोरी छिपे आने वाले कामगारों को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से बात की। कैप्टन ने उन्हेंं इन श्रमिकों के लिए पंजाब में ही व्यवस्थाएं कराने का भरोसा दिया है।

यमुनानगर में खदेड़े से मजदूर

दो दिन पूर्व घर वापसी के लिए पंजाब और चंडीगढ़ से आ रहे प्रवासी मजदूर जैसे ही हरियाणा के यमुनानगर में करेड़ा खुर्द गांव के पास पहुंचे तो यहां पर पुलिस ने उन्हेंं रोक लिया। इससे उनका गुस्सा फूट पड़ा और गुस्साए कामगारों ने सड़क पर जाम लगा दिया। इस दौरान करेड़ा खुर्द के स्कूल में बने शेल्टर होम में रुके कामगार भी सड़क पर आ गए और उन्होंने भी हंगामा करना शुरू कर दिया। पुलिस ने उन्हेंं काफी समझाया लेकिन वे नहीं माने। बाद में पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए कामगारों पर लाठियां बरसानी शुरू कर दी। जिस पर कामगार वहां से भागने लगे।

श्रमिक ट्रेन से घर जाने के लिए गुरुग्राम से पैदल पहुंचे गाजियाबाद, पुलिस ने रोका तो छलक पड़े आंसू

लॉकडाउन में पैसा-रोजगार खत्म हो जाने के बाद अब घर जाने की उम्मीद लिए हजारों प्रवासी श्रमिक शनिवार को गाजियाबाद के घंटाघर रामलीला मैदान पहुंचे। इनमें अधिकांश श्रमिकों के पास प्रशासन की ओर से मोबाइल पर भेजा गया बुलावे का मैसेज था तो कुछ लोग बिना मैसेज ही श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार होने के लिए पहुंच गए। 

पुलिस ने उन्हें रामलीला मैदान के गेट पर रोका तो उनका दर्द छलक गया। गुरुग्राम से अपनी पत्नी और छह माह की बेटी को लेकर पैदल गाजियाबाद पहुंचे भागलपुर बिहार निवासी तबरेज आलम का कहना था कि ‘माता-पिता अपने हिस्से के गेहूं-चावल बेचकर कब तक पैसा भेजते रहेंगे। साहब, अब घर जाने दो।’

तबरेज आलम और उनके साथ गांव के 25 लोग गुरुग्राम में रहते थे। तबरेज ओरिएंट ग्राफ नाम की एक एक्सपोर्ट कंपनी में सिलाई का काम करते थे। उनके साथ के अन्य लोग भी ऐसे ही मजदूरी का काम करते थे। उसकी महीने की कमाई से पत्नी रिजवाना और छह माह की बेटी का खर्च चलता था। 

तबरेज का कहना है कि लॉकडाउन में उनका रोजगार और 4-5 हजार की जमापूंजी भी खत्म हो गई। अपनी बेबसी पिता को बताई तो गांव में गेहूं-चावल बेचकर तीन हजार रुपये उनके लिए भेज दिए। 

यह रकम भी अब खत्म होने लगी तो उन्होंने घर जाने का निर्णय लिया और श्रमिक स्पेशल ट्रेन के लिए पंजीकरण कराया। इसके बाद शनिवार को गुरुग्राम से पत्नी और बच्ची को लेकर पैदल गाजियाबाद पहुंच गए। 
 
बिना काम अब जी नहीं लगता इस शहर में 

सीतामढ़ी, बिहार के गांव रीगा मजोरा के रहने वाले मनोहर का रोजगार भी इस कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन में छिन गया। दैनिक मजदूरी करने वाला मनोहर अपनी पत्नी देवबाला, दो साल की बेटी और दुधमुंहे बच्चे के साथ कोटगांव में किराए पर रहता था। 

मनोहर का कहना है कि रोजाना जो कमाते थे, उसी से घर में चूल्हा जलता था। उनके गांव के 10 अन्य लोग आसपास ही रहते हैं और दैनिक मजदूरी करते हैं। मनोहर ने बताया कि अब काम नहीं रहा, जेब में पैसा नहीं बचा तो गाजियाबाद में उनका दिल नहीं लगता। 

वह गांव जाने के लिए शनिवार को रामलीला मैदान पहुंचे थे। हालांकि उनके पास प्रशासन की ओर से कोई मैसेज नहीं आया था, लेकिन पंजीकरण कराए जाने की वजह से उन्हें उम्मीद थी कि शायद प्रशासन के अधिकारी उन्हें ट्रेन में बैठने की इजाजत दे दें। 

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Author: Bureau

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