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Bureau | June 29, 2022 | 0 Comments

Uttar Pradesh Election Result: Did Samajwadi Party lose elections because of Bahujan Samaj Party?

Uttar Pradesh Election Result: मायावती के मुस्‍लिम और यादव उम्‍मीदवारों ने पंचर की साइकिल? आंकड़ों से समझ‍िए कैसे बसपा ने ब‍िगाड़ा अख‍िलेश का खेल

उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के नतीजे (Uttar pradesh election 2022 result) आ चुके हैं। सत्‍ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर 403 में से 273 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज की है। दूसरे नंबर पर रही समाजवादी पार्टी (Samajwadi party) अपने सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकदल (RLD) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (Suheldev Bhartiya Samaj Party) के साथ मिलकर 125 सीटों पर ही जीत का परचम लहरा पाई। सपा अकेले 111 सीटें ही जीत सकी। वोट प्रतिशत की बात करेंगे तो पार्टी स्‍थापना के बाद सपा को इस बार सबसे ज्‍यादा मत मिला है, फिर वह सत्‍ता से दूर कैसे रह गई? क्‍या साइकिल पंचर करने में बसपा का रोल सबसे ज्‍यादा रहा? कुछ आंकड़ों से इसे आसानी से समझा जा सकता है।

122 सीटों पर मुस्लिम-यादव उम्मीदवार उतारकर बसपा ने ब‍िगाड़ा सपा का खेल

इस बार के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 122 सीटों पर मुसलमान और यादव उम्‍मीदवारों को रण में उतारा। बसपा की ये रणनीत‍ि भाजपा के लिए फायदेमंद साब‍ित हुई। इनमें से बीजेपी गठबंधन के खाते में 68 सीटें चली गई। बसपा ने 91 मुस्‍लिम और 15 यादवों को टिकट दिया था। इनमें 16 उम्‍मीदवार तो ऐसे रहे जो सपा उम्‍मीदवार के जाति के ही थे। इस पूरी गण‍ित ने सपा का काम ब‍िगाड़ दिया। इनमें से बसपा कोई भी जीत तो नहीं पाई। लेकिन उसने सपा का काम ब‍िगाड़ने में बड़ी भूमिका निभाई। भाजपा गठबंधन ने 68 सीटें जीतीं, जबकि सपा गठबंधन को 54 सीटें ही मिलीं।

बसपा के मुस्‍लिम उम्‍मीदवारों ने ब‍िगाड़ा सपा का खेल

बसपा ने कुल 91 सीटों पर मुस्‍लिम उम्‍मीदवारों को टिकट दिया। इन सीटों पर कुल 44 सीटों पर सपा गठबंधन को जीत मिली जबकि 47 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। इस सीटों पर नजड डालेंगे तो पता चलेगा क‍ि जहां सपा उम्‍मीदवार की हार हुई, वहां बसपा वोटकटवा साब‍ित हुई। बसपा के उम्‍मीदवार को मिल वोट अगर सपा के खाते में जाते तो उसके प्रत्‍याशी की आसान जीत होती। जैसे आप सहारपुर की नकुड़ सीट को ले लीजिए। यहां सपा के धर्म सिंह सैनी को भाजपा के मुकेश चौधरी के हाथों 315 वाटों से हार मिली। यहां बसपा के मुस्‍लिम उम्‍मीदवार साह‍िल खान को कुल 55 हजार से ज्‍यादा वोट मिले और वे तीसरे नंबर पर रहे।

इसी तरह गंगोह विधानसभा सीट से भाजपा किर्ती सिंह ने सपा के इंदर सैन को 23,192 वोटो हरा दिया। यहां बहुजन समाज पार्टी के उम्‍मीदवार नोमान मसूद को 54,937 वोट मिले। अब इस वोट को सपा के खाते में जोड़ दिया जाता तो इंदर बड़े आराम से जीत जाते। ये खेल बस एक दो सीटों पर नहीं हुआ है। जहां सपा की हार हुई, वहां बसपा ने असर ज्‍यादा दिखा। पश्‍चिम उत्‍तर प्रदेश के दो चरणों में बसपा न सबसे ज्‍यादा 39 मुसलमनों को टिकट दिया जबकि इस मामने सपा (32) दूसरे और कांग्रेस (28) तीसरे नंबर पर रही।

उन 16 सीटों पर क्‍या हुआ जहां बसपा, सपा के उम्‍मीदवार एक ही जाति के थे

16 विधानसभा सीटें ऐसी रहीं जहां सपा और बसपा के उम्‍मीदवार एक ही जाति के थे। इन 16 में से 2 सीटें सपा गठबंधन के खाते में गईं जबकि 14 सीटों पर भाजपा गठबंधन ने कब्‍जा जमाया। इन सभी सीटों पर सपा की हार में बसपा उम्‍मीदवारों का भूमिका ठीक-ठाक रही।

बसपा ने 15 सीटों पर उतारे यादव प्रत्‍याशी

बसपा ने 15 सीटों पर यादव उम्‍मीदवार उतारे। यादवों को सपा को वोट बैंक कहा जाता है। इन 15 में सपा गठबंधन ने 8 जबकि भाजपा ने 7 सीटें जीतीं। यहां सपा और सीटें जीत सकती थी। लेकिन बसपा ने खेल ब‍िगाड़ दिया। कुछ मामलों से इसे समझा जा सकता है। एटा विधानसभा सीट से भाजपा के उम्‍मीदवार विपिन कुमार ने सपा के जुगेंद्र सिंह यादव को 17,558 वोटो से हरा दिया। यहां बसपा के उम्‍मीदवार अजय सिंह यादव तीसरे नंबर पर रहें जिन्‍हें कुल 26,648 वोट मिले। मतलब सपा की हार हुई तो बसपा की वजह से। ऐसे ही ब‍िठुर विधानसभा सीट रही। यहां से भाजपा के अभीजित सिंह ने सपा के मुनिंदर शुक्‍ला को 20,995 मतों से हरा दिया। हां बसपा के उम्‍मीदवार रमेश सिंह यादव को 36,882 वोट मिले। हार और जीत का अंतर देख ही सकते हैं।

स्थापना के बाद से सबसे अधिक वोट पाकर भी सत्ता से दूर हुई सपा

विधानसभा चुनाव 2022 में सपा को स्‍थापना के बाद सबसे ज्‍यादा वोट मिला है। सपा ने 2012 में जितना वोट पाकर सरकार बनाई थी, उससे अधिक वोट पाकर भी वह इस बार सरकार बनाने से चूक गई है। सपा ने पहली बार 1993 में चुनाव लड़ा था। बसपा के साथ लड़े इस चुनाव में सपा को 17.94 फीसदी वोट मिले थे। 1996 के चुनाव में सपा को 21.80% वोट मिले थे। 2002 में पार्टी को 25.37 जबकि 2007 के चुनाव सपा को 25.43 फीसदी वोट मिले थे।

2012 में जब सपा ने 224 सीटें जीतकर प्रदेश में पूर्णबहुमत की सरकार बनाई थी तब भी उसे 29.13 फीसदी वोट ही मिले थे। 2017 में 21.82 प्रत‍िशत वोट मिला था। इस बार यानी 2022 में सपा को कुल 32.03 फीसदी मत मिले। लेकिन वह सत्‍ता से दूर रह गई।

भाजपा की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, बसपा ने सपा का खेल बिगाड़ा…पश्चिमी यूपी में फेल हो गया जाट समीकरण

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 (UP Election 2022) में भारतीय जनता पार्टी गठबंधन (Bhartiya Janata Party Alliance) को 273 सीटों पर मिली जीत के पीछे कई बड़े फैक्टर सामने आए हैं। यूपी भाजपा (UP BJP) ने इसकी गहन रिपोर्ट तैयार कर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) को भेज दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि पश्चिमी यूपी में सपा (Samajwadi Party) और रालोद गठबंधन (SP RLD Alliance) ज्यादा सफल साबित नहीं हुआ। सपा ने रालोद के भरोसे जिस जाट समीकरणों पर दांव लगाया था, वह फेल हो गया। पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन के असर वाले जिन 30 सीटों पर रालोद चुनाव लड़ी थी, वह केवल आठ सीटों पर ही सिमट गई। वहीं, बसपा (BSP) की उम्मीदवारी से भी भाजपा को सहारा मिला और उसे कई सीटों पर सफलता बसपा के प्रत्याशियों के खड़े होने से ही मिल गई।

मायावती का फॉर्मूला रहा हिट, आजमगढ़ में हार कर भी कैसे जीत गई बसपा? अखिलेश के लिए आगे की राह कठिन

समाजवादी पार्टी ने आजमगढ़ में तीन महीने पहले ही हुए विधानसभा चुनाव में अपना जलवा बिखेरा था। यूपी में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद भी आजमगढ़ की सभी दस विधानसभा सीटें सपा गठबंधन ने जीत ली थी। इन सीटों में पांच सीटें आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं। इन सीटों पर सपा को करीब एक लाख वोटों की बढ़त मिली थी। तीन महीने में ही यह बढ़त खत्म हो गई और भाजपा के दिनेश लाल यादव निरहुआ ने सपा के धर्मेंद्र यादव को करीब 8000 वोटों से हरा दिया है।

बसपा के गुड्डू जमाली को भी सपा की हार के लिए बड़ी वजह माना जा रहा है। बड़ी तादाद में मुस्लिम वोट उधर जाने से यादव और मुसलमान बाहुल्य सीट पर सपा का एमवाई समीकरण ध्वस्त हो गया। जहां भाजपा के निरहुआ और सपा के धर्मेंद्र यादव ने तीन लाख से ज्यादा वोट हासिल किए वहीं बसपा के गुड्डू जमाली ने ढाई लाख से ज्यादा वोट झटक लिये।

आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभाएं गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर, आजमगढ़ और मेंहनगर आती हैं। सभी सीटों पर सपा ने भाजपा पर बढ़त बनाते हुए जीत हासिल की थी। सबसे ज्यादा बढ़त मुबारकपुर सीट पर 29103 वोटों की मिली थी। पांचों सीटों पर 106110 वोटों की बढ़त सपा को मिली थी। इससे पहले 2019 के आम चुनाव में भी सपा को भारी जीत मिली थी। तब सपा के अखिलेश यादव ने भाजपा के निरहुआ को 259874 वोटों से हराया था।

रामपुर लोकसभा सीट पर मायावती ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था जबकि आजमगढ़ सीट पर बसपा ने गुड्डू जमाली को कैंडिडेट बनाया था. आजमगढ़ में बीजेपी प्रत्याशी दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ को 3,12,768 वोट मिले हैं. सपा के धर्मेंद्र यादव को 3,04,089 मिले तो बसपा के गुड्डू जमाली को 2,66,210 मत प्राप्त हुए. बीजेपी 8679 वोट से जीत दर्ज करने में जरूर कामयाब रही, लेकिन आजमगढ़ की हार ने सपा को टेंशन में डाल दिया है तो बसपा अपने पुराने जनाधार को वापस पाने से खुश है.

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Author: Bureau

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