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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
Bureau | October 27, 2021 | 0 Comments

Uttar Pradesh Election 2022: Samajwadi Party betting on small leaders

उत्तर प्रदेश चुनाव: समाजवादी पार्टी ने भाजपा को फंसाने के लिए तैयार किया एक खास ‘चक्रव्यूह’, हाथ लग सकती है बाजी!

दिल्ली में समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों में शामिल एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि उनकी कोशिश है कि छोटे-छोट टुकड़ों में ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोज पार्टी में ज्वाइन कराया जाता रहे। वे कहते हैं ऐसा करके हम न सिर्फ बूथ लेवल पर अपनी पार्टी को मजबूत कर सकेंगे, बल्कि आने वाले विधानसभा के चुनाव में बड़ी जीत भी दर्ज कर सकेंगे…

उत्तर प्रदेश में चुनाव जितना नजदीक आता जा रहा है राजनीतिक पार्टियां उसी तरीके से अपनी चुनावी बिसात बिछाती जा रही हैं। इसी चुनावी समर में समाजवादी पार्टी ने अपनी राजनैतिक फील्डिंग को कुछ इस कदर सजाना शुरू किया है, जो दिखने में बेशक बहुत मारक न लगे लेकिन अंदरूनी तौर पर वह एक बड़ा चक्रव्यूह साबित हो सकती है। समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना है कि वह इसी चक्रव्यूह में फंसा कर भाजपा को सत्ता से बाहर कर देंगे।

‘रूठों’ को जोड़ना शुरू किया

समाजवादी पार्टी ने बीते कुछ महीनों से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के तहसील कस्बे और गांव से लोगों को जोड़ना शुरू किया है। खासतौर से ये वही लोग हैं जो किसी न किसी राजनैतिक दल में पहले रहे थे और उनका अब अपनी पार्टी से मोहभंग हुआ और समाजवादी पार्टी में उम्मीद की किरण नजर आने लगी। ऐसे लोगों ने पार्टी में शामिल होना शुरू कर दिया। दरअसल समाजवादी पार्टी रोजाना किसी न किसी को अपनी पार्टी में ज्वाइन करा रही है। समाजवादी पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि यह सब रणनीतिक तौर पर किया जा रहा है। हो सकता है दिखने में 30 से 50 अनजान चेहरे समाजवादी पार्टी से जुड़ते दिखें, लेकिन इनमें से हरेक का अपना जनाधार है। हर जुड़ने वाला व्यक्ति का अपने गांव, तहसील, ब्लॉक और शहर समेत जिलों में एक बड़े वोट पर अपना अधिकार है।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि सपा से जुड़ने वाला हर व्यक्ति बहुत बड़ा नेता न हो, लेकिन उसके साथ उसका अपना एक वजूद जरूर होता है। यही जनाधार विधानसभा में बूथ स्तर पर सबसे ज्यादा मजबूती प्रदान करता है। दिल्ली में समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों में शामिल एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि उनकी कोशिश है कि छोटे-छोट टुकड़ों में ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोज पार्टी में ज्वाइन कराया जाता रहे। वे कहते हैं ऐसा करके हम न सिर्फ बूथ लेवल पर अपनी पार्टी को मजबूत कर सकेंगे, बल्कि आने वाले विधानसभा के चुनाव में बड़ी जीत भी दर्ज कर सकेंगे।

सत्ता में वापसी का आधार होगा तैयार

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी में आस्था रखने वाले लोगों का हुजूम लगातार पार्टी की ओर बढ़ता जा रहा है। चौधरी के मुताबिक जिस तरीके से लोग पार्टी में दिन-ब-दिन जुड़ रहे हैं, वह अगले कुछ दिनों के भीतर एक बहुत बड़ी संख्या के तौर पर सामने आएंगे। वह कहते हैं कि हर जुड़ने वाले आदमी के पीछे एक बड़ा जनसमूह है, जो विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर समाजवादी पार्टी को जिताने में न सिर्फ कारगर होगा बल्कि सत्ता में वापसी के लिए आधार भी तैयार करेगा।

समाजवादी पार्टी में बीते एक सप्ताह के भीतर छोटे और बड़े नामों को मिलाते हुए तकरीबन साढ़े तीन हजार लोग पार्टी में शामिल हुए हैं। समाजवादी पार्टी के नेताओं के मुताबिक यह सिलसिला बीते कुछ महीनों से लगातार चल रहा है। समाजवादी पार्टी के नेता जुगल किशोर बाल्मीकि कहते हैं कि एक-एक बूंद मिल कर ही सागर बनता है, उसी अंदाज में समाजवादी पार्टी हर उस व्यक्ति का पार्टी में स्वागत करता है, जो उनकी विचारधारा से आस्था रखता है। वे कहते हैं कि अगले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का सत्ता से बेदखल होना बिल्कुल तय है। यही वजह है कि ज्यादा से ज्यादा लोग समाजवादी पार्टी में जुड़ते जा रहे हैं।

पूर्वांचल की सियासत: ‘सत्ता के ताज’ की तलाश में राजभरों पर दांव, समाजवादी पार्टी के दांव से भाजपा की चुनौती बढ़ी

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के सपा में शामिल होने से भाजपा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालांकि, राजभर समाज के अन्य नेताओं के भरोसे भाजपा ने अपनी सियासी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की पर कामयाबी नहीं मिली।

उत्तर प्रदेश में 2022 में ‘सत्ता के ताज’ की तलाश में गैर भाजपा दलों की तरफ से राजभर बिरादरी पर दांव लगाने और उन पर डोरे डालने का काम शुरू हो गया है। इसके लिए सपा ने पूर्व मंत्री ओमप्रकाश राजभर में गठबंधन किया और बसपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर को पार्टी में शामिल किया है। वहीं बसपा ने भी भीम राजभर को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पूर्वांचल में अपनी गणित दुरुस्त करने की कोशिश की है।

वैसे भाजपा ने ओमप्रकाश राजभर के साथ रहते हुए भी इस वोट पर अपनी खुद की संगठनात्मक पकड़ व पहुंच मजबूत बनाने का काम शुरू कर दिया था। बावजूद इसके राजभरों पर विपक्ष का दांव पूर्वांचल में भाजपा की चुनौती बढ़ा सकता है। यह समय बताएगा कि भाजपा इस चुनौती से कैसे पार पाती है।

ऐसा लगता है कि विपक्ष ने पूर्वांचल में भाजपा की लगातार तीन चुनाव से बनी मजबूत पकड़ की काट उसी के सियासी गणित से करने की तैयारी की है। सब जानते हैं कि 2013 में उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रदेश प्रभारी बनकर आए अमित शाह ने हिंदुत्व के साथ जातिवाद की गणित पर भी गहराई से काम कराया।

ओमप्रकाश राजभर, अनुप्रिया पटेल जैसे उन नेताओं को साथ लिया जिनका अपने समाज के बीच प्रभाव दिख रहा था। अन्य बिरादरी के नेताओं को भी या तो पार्टी में शामिल कराया या पार्टी में उन जातियों के कार्यकर्ताओं का पद व कद बढ़ाकर उनकी जातियों को भाजपा में तवज्जो देने का संदेश दिया। जिसका पार्टी को लाभ भी मिला।

राजभर जाति पर इसलिए दांव

भले ही आबादी के लिहाज से प्रदेश की कुल जनसंख्या में राजभर बिरादरी की हिस्सेदारी सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 3 प्रतिशत ही हो, लेकिन अवध के अयोध्या से लेकर अंबेडकरनगर तक और पूर्वांचल के बस्ती से बलिया तक कई जिलों में विधानसभा की सीटों पर इनकी संख्या 10 से 20 प्रतिशत तक है।

इसकी वजह से उन सीटों पर इनका वोट निर्णायक हो जाता है। इनमें वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, आजमगढ़, देवरिया, बलिया व मऊ में राजभर समाज के लोग लगभग 20 प्रतिशत तक है जबकि गोरखपुर, अयोध्या, अंबेडकरनगर, बहराइच, श्रावस्ती, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, महराजगंज, कुशीनगर में भी 10 प्रतिशत तक बताए जाते हैं ।

भाजपा के सामने इसलिए चुनौती

सभी को याद होगा कि 2017 से पहले भाजपा ने राजभर समाज की राजनीति करने वाले ओमप्रकाश राजभर के साथ गठबंधन किया था। जिसके कारण पूर्वांचल में कई सीटों पर राजभर बिरादरी का प्रभाव होना था। पर, अति पिछड़ों को आरक्षण के फार्मूले, पिछड़ी जाति का मुख्यमंत्री सहित कुछ अन्य मुद्दों पर ओमप्रकाश राजभर और भाजपा के बीच असहमति हो गई। जिस पर ओमप्रकाश की लगातार बयानबाजी के बाद योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल से विदाई हो गई। अब उन्होंने सपा से हाथ मिला लिया है। माना जाता है कि सपा उनके सहारे पूर्वांचल में भाजपा की गणित गड़बड़ाने की कोशिश करेगी।

सरोकारों का संदेश कितना होगा कारगर

वैसे भाजपा ने हरिनारायण राजभर जैसे नेताओं को चुनावी राजनीति में उतारकर इस बिरादरी के साथ संगठनात्मक संपर्क व संवाद पर काम बहुत पहले ही शुरू कर दिया था। हरिनारायण को 2014 में पार्टी ने लोकसभा का टिकट भी दिया और वे सांसद भी चुने गए। पर, वह न अपना कद बढ़ा पाए और न राजभरों के बीच भाजपा की पकड़ व पहुंच में बढ़ोतरी कर पाए।

प्रदेश में सरकार बनने के बाद भाजपा ने अनिल राजभर को मंत्री बनाकर और सकलदीप राजभर को राज्यसभा भेजकर भी राजभर बिरादरी के बीच पार्टी की सीधे पकड़ व पहुंच बढ़ाने का काम किया है। बावजूद इसके ओमप्रकाश राजभर और रामअचल राजभर जैसे नेताओं की सपा के साथ मौजूदगी ने भाजपा के सामने इस समाज के बीच चुनावी गणित को दुरुस्त रखने की राह में पहले की तुलना में कुछ मुश्किलें तो खड़ी ही कर दी है। अब आने वाले दिनों में भाजपा की तरफ से इससे निपटने के लिए क्या दांव चला जाएगा यह देखना होगा।

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Author: Bureau

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