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ट्रेन हादसा
Bureau | August 20, 2017 | 0 Comments

Utkal Express train accident near Khatauli railway station at Muzaffarnagar

ट्रेन हादसा
ट्रेन हादसा

गर्भ में पल रहे मासूम की ट्रेन हादसे में चली गई जान, मां की हालत देख रो पड़े लोग

किरनपाल ने बताया कि सोनिका के साथ ट्रेन में आ रही उसकी एक सहेली तीन माह की गर्भवती थी। हादसे में वह भी घायल हो गई। उसके पेट में भी चोट आई। जिससे उसके गर्भ में पल रहा बच्चा नहीं बच पाया। परिजन उसे निजी चिकित्सकों के यहां ले गए थे। सहेली की जान भी खतरे में थी। घायल सोनिका अपने से ज्यादा अपनी सहेली को लेकर चिंतित थी।

पापा मेरी ट्रेन पलट गई है। जल्दी आओ। मुझे बचाओ। बेटी का फोन सुनते ही किरनपाल पसीना पसीना हो गए। मुजफ्फरनगर के गांव जागाहेड़ी निवासी किरनपाल ने बताया कि उनकी बेटी सोनिका (21) मेरठ में एलआईसी दफ्तर में काम करती है। शनिवार शाम वह उत्कल एक्सप्रेस से मुजफ्फरनगर आ रही थी। उसके साथ उसकी कुछ सहेलियां भी थीं। रेल हादसा होते ही सोनिका का फोन आया। बोली पापा मेरी ट्रेन पलट गई है। जल्दी आओ ,मुझे बचाओ। वह काफी घबराई हुई थी। ये तक नहीं बता सकी कि ट्रेन कहां पलटी है।

सोनिका का फोन आते ही परिवार में कोहराम मच गया। उन्होंने मुजफ्फरनगर अपने रिश्तेदारों के यहां फोन करके जानकारी ली। इसके बाद पता चला कि खतौली में रेल हादसा हुआ है। पूरा परिवार वहां दौड़ा। सोनिका को एक अस्पताल में ले जाया गया था। दूसरे डब्बे में बैठी उसकी दो सहेलियां भी घायल थीं।

मौत का ऐसा मंजर, घायल चीखते-चिल्लाते रहे और वो लूटकर सामान ले जाते रहे

खतौली में ट्रेन हादसे के बाद मची चीख पुकार के बाद जहां बचाव और राहत कार्य के लिए आसपास के सैकड़ों लोग मौके पर जुटे तो पीएसी और पुलिस के जवान भी घायलों का निकालने में लग गये। वहीं कुछ लोग ट्रेन में चढ़कर घायलों का सामान भी ले गए।

पुलिस प्रशासन को भीड़ को संभालने के लिए देर रात तक मशक्कत करनी पड़ी। जगत कालोनी और आसपास के लोगों ने बताया कि हादसे के बाद घायलों को ट्रेन के डिब्बों से निकालकर एंबुलेंस से अस्पताल भेजा जा रहा था। मौके पर पुलिस भी भीड़ को संभालने में लगी रही। घायलों के परिजनों ने पुलिस अफसरों को बताया कि हादसे के बाद न तो ट्रेन में उनका बैग था, न ही मोबाइल फोन या घड़ी। जो भी सामान जिसे मिला वहीं लेकर चला गया। जब ट्रेन के डिब्बों की पुलिस और पीएसी टीम ने जांच की तो किसी भी यात्री या मरने वालों को कोई भी सामान नहीं मिला।

पुलिस अफसर भी हैरान हो गए

ट्रेन में सवार यात्रियों की नकदी, अंगूठी, चेन, पर्स, मोबाइल और अन्य सामान नहीं मिलने से पुलिस अफसर भी हैरान हो गए। ट्रेन के डिब्बों और आसपास के स्थान पर जूते, चप्पल ही पड़े थे। किसी का हाथ कटा था तो किसी का पैर अलग था।

ट्रेन हादसा होने के बाद शुरुआत के आधा घंटे में ही असामाजिक लोगों ने मानवता को दरकिनार करते ऐसी करतूत है। अस्पताल में भर्ती सरजीत ने बताया कि उसकी उसका बैग नहीं मिला वहीं मोबाइल व अन्य सामान भी नहीं था। खतौली के अस्पताल में लायी गई सरोज ने बताया कि उसे तो पता नहीं चला कि क्या हुआ है। जब तक उसे होश आया तो चीख पुकार मची थी। घायल मदद मांग रहे थे।

एक जोर का झटका लगा फिर बोगी में लगने लगे सिर

खतौली रेल हादसे में घायल हुए 19 लोगों को मेडिकल, जिला अस्पताल, आनंद और कैलाशी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनका कहना है कि इनके डिब्बे में जोर का झटका लगा और फिर सिर ट्रेन की बोगी में लगने लगे। बेहोशी सी छाने लगी। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो गया। हाहाकार मचा था।

Thirteen coaches of the Puri-Haridwar Kalinga Utkal Express derailed at Khatauli near Muzzafarnagar in western Uttar Pradesh on Saturday evening, injuring several people. The accident took place in Khatauli near Muzzafarnagar, about 115 kilometres from Delhi. Railway ministry officials said they are still awaiting details of the accident that took place around 5:45 pm.

मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसा  – लापरवाही, हादसा या साजिश ?

हादसे का मंजर देखकर सहमे लोग

कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे का मंजर देखकर लोग सहम उठे। एक-दूसरे पर चढ़ी बोगियों के अंदर से यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोगों की भीड़ मदद के लिए घटनास्थल पर पहुंच गई। ट्रेन हादसे के शिकार लोगों को पुलिस और मददगारों ने बोगियों के अंदर से यात्रियों को बाहर निकालना शुरूकिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के वक्त ट्रेन की गति काफी तेज थी। देखते ही देखते 21 बोगियों की एक्सप्रेस ट्रेन के 11 डिब्बे पटरी उखाड़ते हुए उतर गए। तीन बोगियां एक-दूसरे पर चढ़ गई। एक बोगी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। इन बोगियों के भीतर से यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर लोग घटनास्थल पर पहुंचे। हादसे का मंजर देखकर एकत्र भीड़ भी सहम गई। हादसे के थोड़ी देर बाद ही मौके पर पहुंची पुलिस और लोगों ने बोगियों से यात्रियों को निकालना शुरू किया। पुलिस और बचाव कार्य में जुटे लोगों ने यात्रियों के शव और घायलों को बोगी से बाहर निकालकर एंबुलेंस के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचाया।

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Author: Bureau

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