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Akhilesh Yadav
Bureau | May 8, 2020 | 0 Comments

UP Government against laboureres and poors: Says Akhilesh Yadav

श्रम कानूनों को स्थगित करना आपत्तिजनक और अमानवीय: अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने श्रम कानूनों को स्थगित कर मजदूरों के शोषण के रास्ते खोलने और श्रमिकों के खिलाफ साजिश के लिए प्रदेश की भाजपा सरकार से इस्तीफा मांगा है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार कोरोना संकट का इस्तेमाल अपने व आरएसएस के पूंजीघरानों को संरक्षण देने और गरीब, दलित, पिछड़ों व समाज के कमजोर वर्ग के लोगों की जिंदगी में और ज्यादा परेशानियां पैदा करने पर उतारू हो गई है। भाजपा सरकार की जनविरोधी हरकतों से जनता में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

अखिलेश ने शुक्रवार को कहा कि भाजपा सरकार ने अध्यादेश के जरिये मजदूरों को शोषण से बचाने वाले श्रम कानूनों के अधिकांश प्रावधानों को तीन साल के लिए स्थगित कर दिया है। यह बेहद आपत्तिजनक और अमानवीय है। यह विस्थापन और बेरोजगारी के शिकार श्रमिकों को अब पूरी तरह मालिकों की शर्तों पर काम करने के लिए विवश किये जाने की साजिश है।

भाजपा को गरीब की नहीं, पूंजीपतियों के हितों को बचाने की चिंता है। श्रमिकों को संरक्षण न दे पाने वाली भाजपा सरकार को तुरंत त्यागपत्र दे देना चाहिए।

किसानों व जनता पर अत्याचार

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने महंगाई की मार बढ़ाने के लिए आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर बाइक से लेकर ट्रक तक पर ज्यादा टोल टैक्स बढ़ा दिया है। नोएडा अथॉरिटी ने पानी की दरों में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि कर दी गई है। पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार ने सेस और अतिरिक्त डयूटी बढ़ा दी तो यूपी सरकार ने अतिरिक्त वैट लगा दिया। यह किसानों और जनता पर अत्याचार है।

श्रम कानून के नए प्रावधानों पर सवाल उठाए अखिलेश ने

कोरोना वायरस के संकट के चलते उद्योगों के आगे आई समस्या के निराकरण के लिए प्रदेश सरकार ने श्रम अधिनियम में तीन साल की छूट प्रदान की है. समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने श्रम कानूनों को स्थगित करने की सरकारी कवायद पर सवाल खड़े किए हैं.

कोरोना वायरस के संकट के चलते उद्योगों के आगे आई समस्या के निराकरण के लिए प्रदेश सरकार ने श्रम अधिनियम में तीन साल की छूट प्रदान की है. अस्थाई छूट के लिए अध्यादेश के मसौदे को 6 मई को राज्य कैबिनेट ने मंजूरी दी थी.

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने श्रम कानूनों को स्थगित करने की सरकारी कवायद पर सवाल खड़े किए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे आपत्तिजनक और अमानवीय माना है.

अखिलेश यादव ने कहा, “विस्थापन और बेरोजगारी के शिकार श्रमिकों को अब पूरी तरह उनके मालिकों की शर्तों पर काम करने के लिए विवश किये जाने की यह साजिश है. भाजपा को गरीब की नहीं पूंजीपति के हितों को बचाने की चिंता है.”

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कोरोना संकट का इस्तेमाल में भाजपा सरकार अपने और आरएसएस के पूंजीघरानों को संरक्षण देने और गरीब, दलित, पिछड़ों तथा समाज के कमजोर वर्ग के लोगों की जिंदगी में और ज्यादा परेशानियां पैदा करने पर उतारू हो गई है.

पूर्व मुख्यमंत्री ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर बाइक से लेकर ट्रक तक पर टोल टैक्स बढ़ाने पर सवाल उठाए हैं.

अखिलेश यादव कहते हैं, “नोएडा अथारिटी द्वारा पानी की दरों में 7.5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर दी गई है. पेट्रोल-डीजल पर केन्द्र सरकार ने सेस और अतिरिक्त डयूटी बढ़ा दी तो उत्तर प्रदेश सरकार ने अतिरिक्त वैट लगा दिया. यह किसानों और जनता पर अत्याचार है.”

अखिलेश का दावा है कि भाजपा सरकार राज्य कर्मचारियों के सम्मान का सिर्फ दिखावा कर रही है. जल निगम के कर्मचारी तीन महीने से वेतन के लिए तरस रहे हैं. उन्हें डीए भी डेढ़ साल तक नहीं मिलेगा. ऊपर से वेतन से पैसा काट कर डेढ़ करोड़ का चंदा मुख्यमंत्री जी के सहायता कोष में जमा हो रहा है. राजस्व विभाग में छंटनी हो रही है, मानदेय भी नहीं दिया जा रहा है.

सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने कहा- भाजपा को गरीबों की नहीं पूंजीपतियों के हितों की है चिंता

समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मजदूरों को शोषण से बचाने वाले श्रम कानून के ज्यादातर प्रावधानों को तीन साल के लिए स्थगित किए जाने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि भाजपा को गरीबों की नहीं पूंजीपतियों के हितों की चिंता है। भाजपा ने महंगाई बढ़ाने का कुचक्र तो रचा ही है, साथ ही मजदूरों के शोषण के लिए भी रास्ते खोल दिए हैं। भाजपा सरकार के इन जनविरोधी निर्णयों से जनता में गहरा आक्रोश है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए मजदूरों को शोषण से बचाने वाले श्रम कानून के ज्यादातर प्रावधानों को तीन साल के लिए स्थगित कर दिया है। यह बेहद आपत्तिजनक और अमानवीय है। विस्थापन और बेरोजगारी के शिकार श्रमिकों को अब पूरी तरह उनके मालिकों की शर्तों पर काम करने के लिए विवश करने की साजिश है। श्रमिकों को संरक्षण न दे पाने वाली भाजपा सरकार तुरंत त्यागपत्र दे।

अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर बाइक से लेकर ट्रक तक का टोल टैक्स बढ़ा दिया है। नोएडा अथारिटी ने पानी की दरों में 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार ने सेस और अतिरिक्त ड्यूटी बढ़ा दी है। वहीं, प्रदेश सरकार ने अतिरिक्त वैट लगा दिया। यह किसानों और जनता पर अत्याचार है। भाजपा सरकार में जनता जूझ रही है, भ्रष्टाचार फलफूल रहा है। आगरा के बाद अब लखनऊ नगर निगम में बड़ा घोटाला सामने आया है।

अखिलेश यादव ने कहा कि कोरोना हॉटस्पॉट के लिए दो रुपये की सैनिटाइजर की खाली शीशी 18 रुपये में खरीदी गई। स्वास्थ्य कर्मियों को पहले अधोमानक किटे दी गईं। अब पर्याप्त पीपीई किटों का अकाल पड़ा हुआ है। रेलवे के पास दान देने के लिए तो धन है लेकिन मजदूरों को फ्री घर पहुंचाने के लिए नहीं है। कहीं ट्रेन के नीचे कट रहे तो कहीं ट्रेन में बैठने के लिए जेब कटा रहे हैं। देश के निर्माणकर्ता भाजपा को वोट देने की कीमत चुका रहे है। सूरत से वापस आ रहे मजदूरों के सवा लाख रुपये दलाल खा गए। स्थिति भयावह होती जा रही है, लेकिन भाजपा संवेदनाशून्य है। उसे लोकलाज भी नहीं रह गई है।

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