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विक्रम कोठारी
Bureau | February 18, 2018 | 0 Comments

Rotomac group owner Vikaram Kothari is another Nirav Modi

विक्रम कोठारी
विक्रम कोठारी

यह शख्स है दूसरा नीरव मोदी, 3600 करोड़ का है बकाया, सलमान खान करते थे इसकी कंपनी का विज्ञापन

पंजाब नेशनल बैंक में हुए 114 अरब के घोटाले का आरोपी नीरव मोदी और मेहुल चौकसी ही ऐसे शख्स नहीं हैं, जिन्होंने घोटाला किया है। यूपी के कानपुर में स्थित पैन बनाने वाली विश्व की मश्हूर कंपनी रोटोमैक के मालिक विक्रम कोठारी भी इस लिस्ट में शामिल हो गए हैं। कोठारी पर शहर की विभिन्न बैंकों का 3600 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। वहीं चेक बाउंस का केस भी दर्ज है, जिसमें पुलिस काफी लंबे समय से उनकी तलाश कर रही है। एक समय रोटोमैक का विज्ञापन मश्हूर फिल्म अभिनेता सलमान खान करते थे। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह करीब 5 हजार करोड़ रुपये का घोटाला है।

फिलहाल फरार हैं विक्रम कोठारी

बता दें कि विक्रम कोठारी ने सबसे ज्यादा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 485 करोड़ का लोन लिया है। इलाहाबाद बैंक से भी कोठारी ने 352 करोड़ की रकम का कर्ज लिया था, लेकिन एक साल हो जाने के बावजद उसने बैंकों को न तो लिए गए लोन पर ब्याज चुकाया है और न लोन वापस लौटाया है। कानपुर के माल रोड के सिटी सेंटर में रोटोमैक कंपनी के ऑफिस पर पिछले कई दिनों ने ताला बंद है। विक्रम कोठारी का भी कोई अता-पता नहीं है, वो लापता बताए जा रहे हैं। इलाहाबाद बैंक के मैनेजर राजेश गुप्ता ने फरार विक्रम कोठारी की संपत्तियों को बेचकर पैसे वापस रिकवर होने की उम्मीद जताई है।

शहर के जाने माने उद्यमी व रोटोमैक ग्रुप के मालिक विक्रम कोठारी सिर्फ इलाहाबाद बैंक के 352 करोड़ रुपये के ही कर्जदार नहीं हैं। इन पर बैंक ऑफ इंडिया का भी करीब 1395 करोड़ रुपये का कर्ज है। विक्रम कोठारी की चार कंपनियों के नाम से शहर की बिरहाना रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया ब्रांच में चार अलग-अलग खाते हैं।

PNB के बाद अब Rotomac, विक्रम कोठारी ने लगाया 5 बैंकों को 5000 करोड़ का चूना

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 11 हजार करोड़ रुपए का स्कैम सामने आने के बाद एक और स्कैम का खुलासा हुआ है। जिसमें अलग-अलग सरकारी बैंकों से लगभग 5000 करोड़ रुपये का लोन लेकर आरोपी फरार हो गया। यह स्कैम रोटोमैक पेन बनाने वाली कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी ने किया है। कानपुर स्थित रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी ने 5 सरकारी बैंकों से 800 करोड़ रुपए से ज्यादा का लोन लिया था। बताया जा रहा है कि इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने नियम-कानून को ताक पर रखकर विक्रम कोठारी को इतना बड़ा लोन दिया।

ये सभी खाते वर्ष 2015 में एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट) हो चुके हैं। बैंक लगातार विक्रम कोठारी और फर्म के डायरेक्टरों से पत्राचार कर रहा है, लेकिन कर्ज की रकम नहीं चुकाई जा रही। बैंक ऑफ इंडिया की ओर से भेजे गए सामान्य नोटिसों का भी जवाब नहीं दिया जा रहा है।

सरफेसी एक्ट के तहत भेजा जाएगा नोटिस

सामान्य नोटिसों का निर्धारित समय पूरा होने के बाद खातों में सुधार न होने पर बैंक के सेंट्रल ऑफिस ने आपत्ति जताई है। बैंक विक्रम कोठारी को अब सरफेसी एक्ट के तहत नोटिस भेजने की तैयारी कर रहा है। जल्द ही उद्यमी ने अपने एनपीए खातों में कर्ज की रकम जमा नहीं कराई तो बैंक बंधक संपत्तियों को कब्जे में ले लेगा।

अब तक कुल कर्ज बैंक कर्जा

फिलहाल, इंडियन ओवरसीज बैंक ने रोटोमैक ग्रुप के मालिक विक्रम कोठारी के करीब 650 करोड़ रुपये के डिपॉजिट (एफडीआर) जब्त कर लिए हैं। बैंक ने यह कार्रवाई 1400 करोड़ रुपये का कर्ज न चुका पाने की वजह से की है। विक्रम कोठारी का इसी बैंक पर अब भी 750 करोड़ रुपये बकाया है। रकम की वसूली के लिए अब बैंक डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (ऋण वसूली अधिकरण) जाने की तैयारी कर रहा है।

सलमान खान ने किया है विज्ञापन

जिस कंपनी के प्रोडक्ट्स का एड (विज्ञापन) बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान जैसे सिलेब्रिटीज करते थे आज उस कंपनी की हालत इतनी खराब होती जा रही है कि मालिक के घर तक नीलाम होने लगे हैं।विक्रम कोठारी की पत्नी साधना कोठारी के नाम कानपुर के गुटैया स्थित इंद्रधनुष अपार्टमेंट की नौंवी मंजिल में बना एक फ्लैट (नंबर-902) मंगलवार को करीब 80 लाख रुपये में नीलाम हो चुका है।

इसी तरह विक्रम कोठारी के पुत्र राहुल कोठारी के नाम बैकुंठपुर गांव में कई हेक्टेयर में फैला फार्म हाउस, खाली जमीन आदि थी। ये सब करीब 13.50 करोड़ रुपये में नीलाम हो गई। फार्म हाउस को शहर की रिद्धि श्री फर्म ने खरीदा है।

कानपुर का सबसे अरबपति फरार

विक्रम कोठारी की रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का एक लोन एकाउंट कानपुर के माल रोड स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक में भी है। वर्ष 2010 में यह लोन एकाउंट महज 150 करोड़ का था। चार साल बाद यह 1400 करोड़ तक पहुंच गया। समय पर लोन की किस्तें अदा न हो पाने पर जून 2016 में यह एकाउंट एनपीए घोषित कर दिया गया था।
बैंकों को नहीं मिला नीलामी से भी फायदा

बैंक ने कई नोटिस भेजे, लेकिन निर्धारित समय पर निर्धारित रकम जमा न होने पर बैंक ने लोन की सिक्योरिटी के लिए बंधक डिपॉजिट जब्त कर लिए। सभी डिपॉजिट करीब 650 करोड़ के ही निकले। बैंक अब अपने 750 करोड़ रुपये की वसूली के लिए परेशान है।

बैंक ने इनके बकाये लोन पर अब ब्याज लगाना बंद कर दिया है।बैंकिंग सेक्टर से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इंडियन ओवरसीज बैंक का सेंट्रल ऑफिस जल्द ही बकाया कर्ज की वसूली के लिए डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल में केस करेगा।

2017 तक ये था कुल कर्ज बैंक कर्जा

इंडियन ओवरसीज बैंक- 1400 करोड़
बैंक ऑफ इंडिया- 1395 करोड़
बैंक ऑफ बड़ौदा- 600 करोड़
इलाहाबाद बैंक- 352 करोड़

PNB फ्रॉडः बैंकिंग सिस्टम पर खड़े हुए सवाल, भ्रष्ट लोगों ने सिस्टम को किया खोखला

देश के सार्वजनिक क्षेत्र के दूसरे सबसे बड़े बैंक पंजाब नेशनल बैंक की मुंबई ब्रांच में हुए 11,345 करोड़ रुपये के घोटाले ने हमारी बैंकिंग सिस्टम की लापरवाही पर, नए सवाल खड़े कर दिए हैं। कैसे कुछ भ्रष्ट लोग सिस्टम को खोखला करने में लगे हुए हैं, यह घोटाला उसी का प्रत्‍यक्ष प्रमाण है। देश के कुछ शातिर धनकुबेर करोड़ों रुपये की चपत लगाकर देश से फरार हो जा रहे हैं और हम यहां गुड गवर्नेंस की बात कर रहे हैं। हजारों करोड़ के फर्जीवाड़े का यह कोई पहला मामला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में उद्योगपति विजय माल्या का मामला अभी निपटा भी नहीं था कि करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का यह नया मामला सबके सामने आ गया, जो बेहद चौंकाने वाला है।

बैंकिंग सेक्टर में मचा हड़कंप

जब से यह मामला सामने आया है, तब से बैंकिंग सेक्टर में हड़कंप मचा हुआ है। भले ही ईडी फौरी कार्रवाई करते हुए इस घोटाले के मास्टर माइंड नीरव मोदी और उनके रिश्‍तेदारों के ठिकानों पर छापेमारी करके उनकी संपत्ति को जब्त कर रही हो, लेकिन देश को जो नुकसान होना था, वह तो हो चुका है और साथ में बदनामी हो रही है, वह अलग। पूरे शेयर बाजार में सनसनी फैली हुई है।

सात सालों में किसी को नहीं हुई खबर

सात सालों से पीएनबी के मुंबई की एक शाखा से जालसाजी के जरिए अनाधिकृत ट्रांजेक्शन हो रहा था और इन ट्रांजेक्शन से कुछ चुनिंदा अकाउंट होल्डर को फायदा पहुंचाया जा रहा था, लेकिन इसकी खबर किसी को नहीं थी, इस पर विश्‍वास नहीं होता।

इसकी खबर कुछ लोगों को जरूर थी, मगर उच्चे पदों पर बैठे कुछ लोग नियम और कानून को ताक पर रखकर देश के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। ये वही बैंक हैं, जो आम ग्राहकों को छोटा-मोटा कर्ज देने के लिए भी दर्जनों चक्कर कटवाते हैं। उनसे गारंटी वगैरह मांगते हैं, फिर भी लोन मिलने की कोई गारंटी नहीं होती।

यह कैसे हो सकता है कि विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे प्रभावशाली लोगों को हजारों-करोड़ रुपये कर्ज देने के लिए फर्जी गारंटी दे दी जाए और इसकी जानकारी बैंक प्रबंधन, प्रवर्तन निदेशालय, वित्त मंत्रालय आदि को न हो!

ईडी, खुफिया तंत्र की खामी

यह मामला सिर्फ बैंकिंग व्यवस्‍था तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय और हमारे खुफिया तंत्र की भी यह खामी का है कि इस घटना का आरोपी एफआईआर दर्ज होने से पहले देश से बाहर चला जाता है और हमारा सिस्टम कुछ नहीं कर पाता।

अब सवाल उठता है कि इस तरह के घोटालों की भरपाई कौन करेगा? क्या इस तरह के मामलों में केवल विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे लोग ही जिम्मेदार हैं? क्या बैंकों के वे अधिकारी जिम्मेदार नहीं हैं, जो सब कुछ जानते हुए चुप रहे। इस तरह की घटनाओं के बाद अब ऐसा न हो कि आम लोगों का बैंकिंग व्यवस्‍था पर से भरोसा ही उठ जाए।

जल्दी ही इस संबंध में सरकार और रिजर्व बैंक के साथ सभी बैंकों को सोचने की जरूरत है। पीएनबी के खाताधारकों के हित सुरक्षित रहें, यह सुनिश्चित किए जाने की जरूरत है। इस घटना की जांच हो और दोषियों को सख्त सजा मिले, ताकि इस तरह की घ्‍ाटनाओं की पुनरावृति न हो। अन्यथा लोग बैंकिंग व्यवस्‍था को शक की नजर से देखते रहेंगे।

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Author: Bureau

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