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Bureau | August 25, 2019 | 0 Comments

Recession drains leather industry, 20,000 workers lost job, loss of 2 billion daily

मोदी सरकार में मंदी ने खींची चमड़ा उद्योग की खाल, 20 हजार श्रमिकों से छिना काम, रोजाना दो अरब का घाटा

औद्योगिक नगरी कानपुर में मंदी की आहट ने सबसे कमाऊ और रोजगार देने वाले चमड़ा उद्योग की खाल खींच दी है। इसमें 25-30 फीसद की गिरावट हो चुकी है। 20 हजार से अधिक अस्थायी श्रमिक नौकरी गंवा चुके हैं। दूसरे सेक्टरों में भी गुपचुप अस्थायी कर्मचारी हटाए जा रहे हैैं या फिर उन्हें नियमित ड्यूटी नहीं मिल रही। तमाम कंपनियां 10 फीसद स्थायी कर्मचारियों की छंटनी और इंक्रीमेंट घटाने का अंदरुनी आदेश भी जारी कर चुकी हैैं। औद्योगिक नगरी का रोज का करीब दो अरब रुपये का कारोबार घट गया है।

चमड़ा उद्योग में 30 फीसद तक गिरावट

कानपुर का कुल सालाना कारोबारी टर्नओवर 1.31 लाख करोड़ रुपये का है। इसमें चमड़ा, प्लास्टिक, पान मसाला, खाद्य तेल, इंजीनियङ्क्षरग समेत प्रमुख 15 बड़े सेक्टरों की बात करें तो अधिकांश मंदी से जूझ रहे हैं। घटती डिमांड के कारण अधिकांश सेक्टर में उत्पादन 10 से 15 फीसद तक घटा है। चमड़ा उद्योग में यह गिरावट 30 फीसद तक लुढ़क चुकी है। यह मांग सिर्फ देश में नहीं घटी, विदेश तक का कारोबार घटा है। पर्यावरण मानकों के कारण टेनरियों की बंदी ने आग में और घी उड़ेला है।

स्थायी कर्मियों पर भी लटक रही तलवार

चमड़ा कारोबार से यहां 1.20 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। अप्रत्यक्ष रोजगार भी बड़ी संख्या में मिलता है। बंदी व मंदी के कारण बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए 20 हजार से अधिक श्रमिक काम न मिलने के कारण घरों को लौट चुके हैं। उधर, कंपनी को घाटे से बचाने के लिए दूसरे सेक्टर के उद्यमियों ने भी पहली छंटनी अस्थायी कर्मचारियों से शुरू कर दी है। बड़ी मार ठेका श्रमिकों पर है। हालांकि, ठेकेदार इस पर खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार 8-10 फीसद तक श्रमिक घटे हैैं। कुछ बड़ी कंपनियां स्थायी मैनपावर भी घटाने की तैयारी में हैं। एक बड़ी कंपनी में प्रबंधन से जुड़े अधिकारी बताते हैैं कि कंपनी इसका मेल भी जारी कर चुकी है।

कानपुर का कारोबार

कुल औद्योगिक इकाइयां : 17444
मध्यम और भारी उद्योग : 92
कुल कामगार : 3.25 लाख
चर्म उद्योग में रोजगार : 1.20 लाख

-बीते 10 महीने में चमड़े से जुड़े तीन हजार करोड़ के आर्डर कानपुर से बाहर जा चुके हैैं। पिछले साल से नौ फीसद निर्यात घटा है। टेनरियां बंद होने से नहीं पता कि माल कब दे पाएंगे? काम न मिलने के कारण 20 हजार श्रमिक घर लौट चुके हैैं। -असद इराकी, महासचिव, लेदर इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन

-मेरा फुटवियर का कारोबार है। पिछले साल के मुकाबले इस साल 15-20 फीसद कारोबार कम हुआ है। कारोबारी गिरावट की यही स्थिति अन्य उद्योगों की भी दिख रही है। मेरी राय में नोटबंदी की वजह से भी लोगों की क्रय क्षमता घटी है। -आलोक अग्रवाल, चेयरमैन, आइआइए कानपुर चैप्टर

-मंदी के कारण स्टील व रोलिंग का कारोबार 30 फीसद घटा है। पांच साल पहले इंगट व सरिया की 56 फैक्ट्रियां थीं, अब तीन बची हैैं। पांच में ताला तो चार महीने के अंदर पड़ गया है। सरकार ने सिर्फ लग्जरी आइटम को ही मदद दी है। -उमंग अग्रवाल, स्टील उद्यमी एवं फीटा महासचिव

-स्टील रोलिंग का काम आधा रह गया है। पहले हमारे यहां 100 कर्मचारी काम करते थे। वे महीने में 24 दिन काम करते थे, लेकिन अब केवल 12 दिन ही उद्योग चलता है। इस कारण 50 कर्मचारी निकालने पड़े। -शशांक दीक्षित, स्टील उद्यमी

-अधिकांश उद्योग मंदी से जूझ रहे हैं। सबसे ज्यादा रोजगार पैदा करने वाले एमएसएमई सेक्टर को आगे बढ़ाने की जरूरत है। नौकरियां जाती रहेंगी तो बाजार की क्रय शक्ति घटेगी। सरकार के कदमों से फेस्टिव सीजन तक सुधार की उम्मीद है। -सुनील वैश्य, पूर्व अध्यक्ष, आइआइए

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Author: Bureau

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