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पूनम यादव
Bureau | April 8, 2018 | 0 Comments

Poonam Yadav won Gold in weight lifting at commonwealth games 2018

पूनम यादव
पूनम यादव

CWG 2018: भारत ने वेटलिफ्टिंग में जीता एक और गोल्ड, इस बार पूनम यादव ने बढ़ाया देश का सम्मान

21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की पूनम यादव ने महिला वेटलिफ्टिंग में गोल्ड जीत लिया है। पूनम यादव ने कुल 222 किलोग्राम भार उठाकर यहां गोल्ड मेडल पर कब्जा किया है। उन्होंने इंग्लैंड की सारा डेविस को पछाड़कर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। पूनम यादव से आगे निकलने के लिए सारा को आखिरी राउंड में कुल 128 किलोग्राम भार उठाना था, लेकिन उनके असफल प्रयास के चलते पूनम के खाते के खाते में गोल्ड आ गिरा।

बता दें कि कॉमनवेल्थ में अब तक भारत ने कुल पांच गोल्ड जीते हैं। ये सभी गोल्ड भारत को वेटलिफ्टिंग में मिले हैं। अब तक मिले पांचों गोल्ड में से तीन गोल्ड मेडल महिला वेटलिफ्टर्स ने जीते हैं। इसके अलावा भारत के ही वेंकट राहुल रगला और सतीश शिवलिंगम ने भी तीसरे दिन गोल्ड जीता था। इससे पहले भारत की महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू और संजीता चानू ने भी गोल्ड जीता था।

कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टर पूनम यादव ने भारत को दिलाया पांचवां गोल्ड, 222 किग्रा वजन उठाया

गोल्ड कोस्ट.यहां कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने लगातार चौथे दिन सोना जीता। वेटलिफ्टर पूनम यादव ने 69 किग्रा कैटेगरी में 222 (स्नैच में 100 और क्लीन एंड जर्क में 122) किग्रा का वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता। इंग्लैंड की सारा डेविस ने सिल्वर और फिजी की अपोलानिया वायवाय ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। पूनम कॉमनवेल्थ गेम्स में दो अलग-अलग कैटेगरी में पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय वेटलिफ्टर हो गईं हैं। पूनम ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में 63 किग्रा कैटेगरी में ब्रॉन्ज जीता था। उनसे पहले यह कारमाना संजीता चानू ने किया। चानू ने इस कॉमनवेल्थ गेम्स में 53 किग्रा कैटेगरी में 192 किग्रा वजन उठाकर गोल्ड जीता है। ग्लासगो में उन्होंने 48 किग्रा कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता था।

पूनम ने इस तरह जीता गोल्ड

– पूनम ने स्नैच की पहली कोशिश में 95, दूसरी में 98 और तीसरे में 100 किग्रा वजन उठाया। स्नैच के बाद वह और फिजी की अपोलानिया ही सबसे आगे थीं।

– पूनम ने क्लीन एंड जर्क में पहले प्रयास में 118 किग्रा वजन उठाया। दूसरे प्रयास में 122 ऑप्ट किया, लेकिन फाउल कर गईं। तीसरे प्रयास में 122 किग्रा वजन उठाया।

– वहीं सिल्वर मेडल जीतने वालीं सारा ने स्नैच की पहली कोशिश में 92 किग्रा वजन उठाया। दूसरी कोशिश में 95 किग्रा ऑप्ट किया, लेकिन फाउल कर बैठीं। तीसरी कोशिश में 95 किग्रा वजन उठाने में सफल रहीं।

– सारा ने क्लीन एंड जर्क में उन्होंने पहली कोशिश में 119 और दूसरी कोशिश में 122 किग्रा वजन उठाया। तीसरी कोशिश में पहले उन्होंने 124 किग्रा वजन ऑप्ट किया था, लेकिन गोल्ड जीतने के चक्कर में इसे बदलकर 128 कर दिया, लेकिन इसे उठाने में वह असफल रहीं और पूनम का गोल्ड पक्का हो गया।

– अपोलानिया ने स्नैच की पहली कोशिश में 97 और दूसरी में 100 किग्रा वजन उठाया। तीसरी कोशिश में 103 किग्रा ऑप्ट किया, लेकिन सफल नहीं हुईं। क्लीन एंड जर्क की पहली कोशिश में वह 115 किग्रा उठाने में असफल रहीं। दूसरी कोशिश में 116 किग्रा उठाया, तीसरी कोशिश में 122 किग्रा में ऑप्ट किया, लेकिन असफल रहीं।

पूनम ने ग्लासगो में 63 किलोग्राम कैटेगरी में जीता था ब्रॉन्ज

– पूनम ने 2014 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में 63 किलोग्राम कैटेगरी में ब्रॉन्ज जीता था।
– उन्होंने 2017 कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप (गोल्ड कोस्ट) में 69 किग्रा कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता था।
– उन्होंने 2015 में पुणे में हुई कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप में 63 किग्रा कैटेगरी में गोल्ड जीता था।
– पिछले साल अमेरिका के अनॉहाइम में हुई वर्ल्ड चैम्पियनशिप में वह 69 किग्रा कैटेगरी में नौवें नंबर पर रहीं थीं। तब उन्होंने 218 (स्नैच में 98 और क्लीन एंड जर्क में 120) किग्रा का वजन उठाया था।
– हालांकि, कजाखिस्तान के अलमाटी में 2014 में हुई वर्ल्ड चैम्पियनशिप में उनका प्रदर्शन बहुत बढ़िया नहीं रहा था। तब वह 63 किग्रा कैटेगरी में 20वें नंबर पर रहीं थीं।

खुद भूखा रहकर बहन को बनाया इंटरनेशनल प्लेयर, ऐसी है इन स‍िस्टर्स की स्टोरी

इंटरनेशनल वेटलिफ्टर पूनम यादव के प‍िता मामूली किसान हैं। पूनम के स्ट्रगल के दिनों में बड़ी बहन शशि और छोटी बहन पूजा की अहम भूमिका रही।

”खुद भूखा रहकर मुझे रोटि‍यां खि‍ला देती थी दीदी”

– बहन शशि ने बताया, ”गरीबी इतनी थी कि खाना बनाने के लिए घर पर स्टोव, चूल्हा तक नहीं था। छोटी बहन पूजा पत्ते बीनकर लाती थी, तो चूल्हा जलता था।”
– पूजा ने बताया, ”भैसों की देख-रेख पूनम करती थी। 2012 में जब वो हम दोनों बहनों से लोकल लेवल पर अच्छा खेलने लगी तो हमने खेल से दूरी बना ली। 2014 में कॉमनवेल्थ में जब पूनम ने मेडल जीता तो लोगों को मिठाई खिलाने के पैसे तक हम लोगों के पास नहीं थे।”
– ”परिवार बड़ा था और पिताजी अकेले किसानी कर कमाने वाले। भैसों का दूध बेचकर कुछ खर्चा निकलता था। दूध नापते समय ही रोज एक गिलास दूध चुपके से निकालकर पूनम को दे देती थी।”
– रेलवे में टीटीई की पोस्ट पर काम कर रहीं पूनम ने बताया, ”तीनों बहनें साथ में प्रैक्टिस करने जाती थी। शशि दीदी सुबह अपने नाश्ते की सब्जी मुझे चुपके से खिला देती थी। जूते भी हम बहनों के पास नहीं थे। दीदी ने अपना जूता मुझे दे दिया और बोला छोटा हो रहा है, तुम पहनो। दीदी ने मेरा गेम देखकर खुद की डाइट मुझे देने का निर्णय किया और खुद भूखा रहकर रोटियां मुझे खिला देती थीं।”
– ”ठंड के दिनों में उन्होंने अपना ट्रैक शूट तक मुझे दे दिया। कभी अगर घर पर दाल बन जाती थी तो दीदी अपनी कटोरी छिपाकर रखती थी। चुपके से आकर मुझे दाल खि‍ला देती थी।
– शशि‍ ने बताया, ”2012 में हम और बहन पूजा ने पूनम के लिए खेलना कम कर दिया। 2014 में स्कॉटलैंड के ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स को देखकर तैयारी करवाई गई। पूनम ने 63 किलो वेट कैटेगरी में ब्रोंच मेडल जीतकर भारत का नाम रौशन किया था।”
– ”पूनम को एशियाड 2014 में सिल्वर मेडल, सीनियर नेशनल 2014 में सिल्वर मेडल, स्कॉटलैंड के ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2014 ब्रांच मेडल मिला है। उसे तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने लखनऊ में रानी लक्ष्मी बाई अवॉर्ड से नवाजा था।”

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