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पंडित विकास दुबे
Bureau | July 8, 2020 | 0 Comments

Pandit Vikas Dubey political connection with BSP, SP and BJP

विकास दुबे के ‘सियासी आका’, बसपा से लेकर बीजेपी तक के नेताओं के बीच पकड़, बिना चुनाव प्रचार के ही जीत जाता था इलेक्शन

कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोपी मोस्टवांटेड विकास दुबे खुद को सिर्फ गुनाहों की दुनिया तक सीमित नहीं रखना चाहता था बल्कि सियासी गलियारों में भी दखल रखता है. वह अपना राजनीतिक गुरु पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरिकिशन श्रीवास्तव को मानता है तो मौजूदा दो बीजेपी विधायकों से अपनी नजदीकियों को भी जाहिर करता है. यह बात खुद विकास दुबे ने बताई है.

जिला पंचायत की राजनीति से हिस्ट्रीशीटर बने विकास दुबे ने शहर और कुछ गांवों में कब्जा जमाए रखा था। दबंगई का अंदाजा इसी से लगता है कि बिकरू से लगभग 40 किमी दूर स्थित घिमऊ जिला पंचायत निर्वाचन क्षेत्र में विकास का ही सिक्का चलता था। पिछले 20 साल में दस साल वह और उसकी पत्नी ही जिपं सदस्य हैं। वर्ष 2005 और 2010 में घिमऊ जिला पंचायत सीट पिछड़ा और एससी वर्ग आरक्षित जरूर रही लेकिन विकास के करीबी ही जीते।

बिल्हौर तहसील के घिमऊ जिला पंचायत निर्वाचन क्षेत्र में बिकरू गांव भी आता है। आतंक के बूते विकास इस सीट पर वर्ष 2000 से 2005 तक जिला पंचायत सदस्य रहा। वर्ष 2015 में सीट महिला के लिए रिजर्व हुई तो विकास ने पत्नी रिचा दुबे को मैदान में उतार दिया। रिचा वर्तमान में घिमऊ क्षेत्र से सदस्य है। वैसे बिकरू कभी कानपुर देहात के शिवली थानाक्षेत्र का गांव होता था पर राज्यमंत्री संतोष शुक्ल की हत्या के बाद यह गांव नगर के चौबेपुर थाने से जुड़ गया है। विकास का एक घर शिवली में भी है।

विकास से दोगुने वोटों से विजयी हुई थी रिचा

वर्ष 2000 में विकास दुबे 1854 मतों से विजयी हुए थे, जबकि उनकी पत्नी रिचा 2015 के चुनाव में 3000 से अधिक मतों से विजयी जीती। वर्ष 2015 के जिला पंचायत सदस्य चुनाव के प्रत्याशी रहे संतोष वाजपेयी का दावा है कि विकास अपने वर्चस्व वाले गांवों में पूरा बूथ कब्जा कर लेता है। घिमऊ न्याय पंचायत का अधिकतर हिस्सा बिकरू के आसपास का जुड़ा है।

पत्नी कभी प्रचार में नहीं निकलती थी

वर्ष 2015 के चुनाव में रिचा दुबे भले ही घिमऊ जिला पंचायत सीट से विजयी हुई हो पर वह कभी प्रचार को नहीं निकली। रानेपुर निवासी राजेश व रमाकांत का कहना है कि मतदान के एक दिन पहले विकास या फिर उनके साथी गांवों आकर फरमान जारी करके चले जाते थे। इसी दहशत की वजह से उनकी पत्नी बिना प्रचार पर निकले ही सदस्य चुनी गईं।

ईंट-भट्ठों और कोल्ड स्टोरों में जमाता था महफिल

हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे बिकरू के आसपास के गांवों की राजनीति करता था। पंचायत चुनाव में भी इन्हीं गांवों में उसका दखल रहता था लेकिन विधानसभा या लोकसभा में किसी न किसी की मदद करता रहा। बड़े नेताओं को वोट दिलाता था और उनसे अपने गुनाहो के लिए मदद मांगता रहा। हर सरकार में उसके करीबी नेताओं की कमी नहीं थी। पिछले 20 साल से नगर व देहात की ग्रामीण राजनीति में सक्रिय ही नहीं था बल्कि सपा-बसपा की सरकार हो या फिर अन्य दलों की रही हो, हर एक में उसका रुतबा गालिब रहा है। वर्ष 2007 से 2017 तक विकास आतंक के बूते चौबेपुर से लेकर लालपुर तक और घिमऊ से लेकर बिल्हौर तक बने कोल्ड स्टोरेजों, ईंट-भट्ठों में बैठकें करता था। यही वजह रही कि कई सालों से बिल्हौर इलाके के रहने वाले लोग ही जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज रहे।

कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोपी विकास दुबे पुलिस की पहुंच से दूर जरूर है. मोस्टवांटेड विकास दुबे खुद को सिर्फ गुनाहों की दुनिया तक सीमित नहीं रखना चाहता था बल्कि सियासी गलियारों में भी दखल रखता है. वह अपना राजनीतिक गुरु पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरिकिशन श्रीवास्तव को मानता है तो मौजूदा दो बीजेपी विधायकों से अपनी नजदीकियां को जाहिर करता है. यह बात खुद विकास दुबे ने बताई है.

दरअसल, विकास दुबे 25 साल से प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ रहा है. विकास दुबे 15 साल तक बसपा के साथ रहा तो 5 साल बीजेपी में और 5 साल सपा में रहा है. पंचायत चुनाव के दौरान उसे बसपा से समर्थन मिला था जबकि उसकी पत्नी को चुनाव में सपा का समर्थन हासिल रहा था. शायद इसीलिए कोई भी दल विकास दुबे के खिलाफ खुलकर बोलने में संकोच कर रहा है.

उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के दौरान ही विकास दुबे ने बिल्हौर, शिवराजपुर, रनियां, चौबेपुर के साथ ही कानपुर नगर में अपना रसूख कायम किया था. इस दौरान शातिर अपराधी विकास दुबे ने कई जमीनों पर अवैध कब्जे किए. यहीं नहीं, इसके अलावा जेल में बंद रहते हुए भी हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे ने शिवराजपुर से नगर पंचयात चुनाव भी लड़ा था और जीत हासिल की थी.

विकास दुबे के राजनीतिक गुरु

मोस्टवांटेड विकास दुबे का 2006 का वीडियो सामने आया है. वीडियो में विकास दुबे कहता है कि उसे सियासत में लाने का श्रेय पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरिकिशन श्रीवास्तव का है और वही मेरे राजनीतिक गुरु हैं. विकास दुबे वीडियो में कह रहा है, ‘मैं अपराधी नहीं हूं, मेरी जंग राजनीतिक वर्चस्व की जंग है और ये मरते दम तक जारी रहेगी.’

बता दें कि, हरिकिशन श्रीवास्तव कानपुर के चौबेपुर विधानसभा सीट से 4 बार विधायक रह चुके हैं. वह बसपा सरकार में विधानसभा अध्यक्ष भी रहे हैं. हालांकि, वो पहली बार विधायक जनता पार्टी से बने और बाद में जनता दल और फिर बसपा का दामन थामा और विधानसभा पहुंचते रहे हैं. हरिकिशन श्रीवास्तव दिग्गज नेता माने जाते थे और विकास दुबे उनके करीबी समर्थकों में से एक था.

1996 में कानपुर की चौबेपुर विधानसभा सीट से हरिकिशन श्रीवास्तव बसपा से चुनाव लड़े थे और उनके खिलाफ बीजेपी से तत्कालीन जिला अध्यक्ष संतोष शुक्ला चुनाव लड़े थे. इस चुनाव में हरिकिशन ने जीत दर्ज की थी. राजनाथ सिंह 2000 में यूपी के सीएम बने तो उन्होंने संतोष शुक्ला को दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री बनाया, लेकिन सियासी रंजिश में 11 नवंबर 2001 कानपुर के थाना शिवली के अंदर गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई. संतोष शुक्ला की हत्या में विकास दुबे का नाम आया था, लेकिन कोर्ट से बरी हो गया था.

विकास दुबे का बीजेपी कनेक्शन

गैंगस्टर विकास दुबे का साल 2017 का वीडियो भी सामने आया है. इस वीडियो में 2017 में हुई एक हत्या के संबंध में एसटीएफ द्वारा उससे पूछताछ हो रही है. इसमें विकास दुबे ने बताया कि कैसे एक हत्या में उसका नाम कथित रूप से डाला गया था, जिसे निकलवाने में कुछ नेता उसकी मदद कर रहे थे. इस वीडियो में विकास दुबे बिल्हौर से बीजेपी विधायक भगवती प्रसाद सागर और बिठूर से बीजेपी विधायक अभिजीत सांगा के नाम का जिक्र किया है. इसके अलावा विकास ने ब्लॉक प्रमुख राजेश कमल, जिला पंचायत अध्यक्ष गुड्डन कटियार के नाम भी लिए थे. विकास ने कहा है कि इन नेताओं से उसके राजनीतिक संबंध हैं.

हालांकि, बीजेपी के दोनों विधायकों ने विकास दुबे के साथ अपने संबंध होने से इनकार किया है. अभिजीत सांगा पहले कांग्रेस में थे और फिलहाल बीजेपी से विधायक हैं. वहीं, भगवती प्रसाद सागर बीएसपी से बीजेपी में आए हैं. बिल्हौर विधानसभा से विधायक भगवती प्रसाद सागर 2017 में ही बीजेपी में शामिल हुए थे. वहीं अभिजीत सांगा भी 2017 में ही बीजेपी में आए और बिठुर से विधायक बने हैं.

दरअसल, अपराध की दुनिया में नाम कमाने के बाद विकास दुबे की दहशत का आलम ये था कि किसी भी चुनाव में वह जिस पार्टी या उम्मीदवार को समर्थन देता था, पूरे गांववाले उसे ही वोट देते थे. यही एक बड़ी वजह थी कि चुनाव के वक्त इन गांवों में वोट पाने के लिए सपा, बसपा और भाजपा के कुछ नेता उसके संपर्क में रहते थे. ये उसकी दहशत का ही नतीजा था कि विकास दुबे 15 सालों से जिला पंचायत सदस्य के पद पर कब्जा बनाए हुए है.

विकास दुबे खुद तो जिला पंचायत सदस्य है और साथ ही उसने अपनी पत्नी ऋचा दुबे को भी घिमऊ से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़वाया था. जिसमें वह जीत गई थी. इतना ही नहीं उसने अपने चचेरे भाई अनुराग दुबे को पंचायत सदस्य बनवाया था. बताया जाता है कि उसका हर पार्टी के नेताओं के साथ उठना बैठना ही नहीं बल्कि गहरे राजनीतिक संबंध भी हैं.

विकास से जुड़े कुछ पुराने वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। ऐसे ही एक वीडियो में दुबे अपने राजनैतिक रसूख की बात कर रहा है और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के दो नेताओं का नाम भी लिया है। जिसके बाद हंगामा मचा हुआ है।

कानपुर शूटआउट में 8 पुलिस वालों की हत्या के बाद फरार हिस्ट्रीशीटर गैंगस्टर विकास दुबे अबतक पुलिस के हाथ नहीं आया है। लेकिन दुबे को लेकर खुलासे पर खुलासे हो रहे हैं। विकास से जुड़े कुछ पुराने वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। ऐसे ही एक वीडियो में दुबे अपने राजनैतिक रसूख की बात कर रहा है और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के दो नेताओं का नाम भी लिया है। जिसके बाद हंगामा मचा हुआ है। वायरल वीडियो साल 2017 का बताया जा रहा है। एसटीएफ जांच के इस वीडियो में दुबे ने दो राजनेताओं के नाम कबूले हैं। वीडियो में विकास ने भाजपा विधायक अभिजीत सिंह सांगा और बिल्हौर विधानसभा से भाजपा विधायक भगवती प्रसाद सागर का नाम लिया है। भाजपा नेताओं के नाम सामने आने पर सियासी हलचल भी तेज हो गई है, दोनों नेताओं ने संबंधित टीवी चैनल पर आकर अपना पक्ष रखते हुए विकास दुबे से संबंधों से इनकार किया है। दरअसल, जिला पंचायत चुनाव के दौरान विकास दुबे पर एक शख्स की हत्या का आरोप लगा था। इस मामले में एसटीएफ ने उससे 2017 में पूछताछ की थी। तब यह वीडियो रिकॉर्ड किया गया था। वीडियो में एक शख्स विकास से पूछ रहा है कि ये थाने में जो तुम्हारी एफिडेविट पड़ रही है तो उसके लिए क्या तुम पर कोई दबाव बनाया था? इसपर विकास ने कहा “दबाव जैसा नहीं, लेकिन अपनी प्रयास किया था, अपने लोकल नेता, हमारे यहां के प्रबुद्ध लोग हैं, उनसे किया था।”

इसपर वीडियो बना रहे शख्स ने कहा कि वे नेता कौन हैं? इसका जवाब देते हुए विकास दुबे ने कहा “हमारे लोकल विधायक हैं, भगवती प्रसाद सागर जी हैं और अभिजीत सिंह सांगा जी हैं एमएलए और हमारे ब्लॉक प्रमुख हैं, राजेश कमल जी और जिला पंचायत अध्यक्ष हैं और 3-4 प्रधान लोग भी हैं।” इसके बाद विकास से पूछा गया कि तो इन लोगों ने क्या डराया धमकाया? इसपर गैंगस्टर ने कहा “डराया धमकाया नहीं, इन लोगों ने समझाया था कि देखो अगर ये नहीं हैं और ये फर्जी हैं तो इनकी मदद करो, अगर मुल्जिम हैं तो कई बात नहीं, लेकिन ये फर्जी हैं इसलिए इनके लिए जो हिसाब करना था उनको वो किया।” बता दें -बिठूर से भाजपा विधायक अभिजीत सिंह सांगा का कहना है कि मेरा न तो कभी उससे संबंध रहा है और न ही मैं उससे कभी मिला हूं। ये अपराधी है और सत्ता का संरक्षण लेने के लिए इस तरह से नाम लेता रहा है, वह ऐसे ही झूठ बोलता है। हमारा कभी कोई संबंध नहीं रहा है। वहीं गवती प्रसाद सागर ने कहा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो वर्ष 2017 का है और उस वर्ष चुनाव में विकास दुबे ने खुलकर बसपा प्रत्याशी का साथ दिया था। बसपा प्रत्याशी के साथ विकास दुबे और एक फिल्मी हीरोइन ने मंधना से बिल्हौर तक रथ भी निकाला था। इसकी वीडियोग्राफी भी उस समय चुनाव आयोग के आदेश पर हुई थी, जो जिला प्रशासन के पास होगी अधिकारी उसे देख सकते हैं।

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