Blog

ग्रेटर फरीदाबाद
Bureau | January 30, 2022 | 0 Comments

Omaxe Heights Society is polythene free

ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-86 स्थित ओमेक्स हाईट्स सोसासटी हो गई पालीथिन मुक्त

ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-86 स्थित ओमेक्स हाईट्स सोसायटीवासियों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। यहां की आरडब्ल्यूए और वेस्ट सैगरीगेशन टीम ने अपनी सोसासटी को पालीथिन फ्री कर पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका अदा की है। आरडब्ल्यूए का दावा है कि ग्रेटर फरीदाबाद की यह पहली ऐसी सोसायटी बन गई है, जहां सामान लाने में पालीथिन का प्रयोग नहीं किया जाता। विकल्प के रूप में सभी घरों में कपड़े के थैले उपलब्ध करा दिए गए हैं। सोसायटी के अंदर स्थित दुकानों पर भी थैले रखे हुए हैं।

लिया संकल्प, दिखाया जज्बा और सोसायटी हो गई पालीथिन मुक्त

इरादे मजबूत हों, ²ढ़ संकल्प हो और कुछ अच्छा करने का ठान लिया जाए, तो फिर राह अपने आप मंजिल बनती चली जाती है।

चुनौती थी कठिन, घर-घर दस्तक देकर समझाया

सोसायटीवासी मंजू गुप्ता, रूपाली भारद्वाज और रितु बजाज के अनुसार पालीथिन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है। यह हम सबको पता है, पर उसके बावजूद इसका प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। आरडब्ल्यूए के प्रधान अनुरोध शर्मा के नेतृत्व में पूरी टीम और सोसायटी के जागरूक निवासियों ने यह सोचा कि क्यों न अपनी सोसायटी को पालीथिन मुक्त करने की दिशा में काम किया जाए। इस सोच को संकल्प में बदला, हालांकि चुनौती कठिन थी, पर जागरूक निवासियों की टीम ने सोसायटी में स्थित 40 टावर के 1700 फ्लैट में जा-जाकर दस्तक दी। लोगों को पालीथिन के नुकसान से अवगत कराते हुए जागरूक किया और साथ भी जोड़ा। इस तरह काम आसान होता चला गया।

डेड लाइन तय की

आरडब्ल्यूए ने इसके लिए एक डेडलाइन तय की। सर्वसम्मति से तय किया गया कि सभी को जागरूक करने और वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए एक वर्ष का समय निर्धारित किया जाए। वर्ष भर ईमेल और वाट्सएप के जरिये लोगों को प्रोत्साहित किया जाता रहा। अब 18 जनवरी 2022 को साल पूरा होने पर सोसायटी में पालीथिन के प्रयोग पर पूरी तरह से रोक लगाने में सफलता मिल गई।

पुराने कपड़े से बनते हैं थैले

स्थानीय निवासी दीपा गर्ग, वंदना, विक्रम खत्री के अनुसार पालीथिन के विकल्प के रूप में सोसायटी में स्थापित 50 दुकानों पर कपड़े के थैले रखवाए गए। लोगों को भी थैले दिए गए। सोसायटी में लोगों से पुराने कपड़े डस्टबिन में न फेंकने की अपील की गई। सभी लोग पुराने कपड़े राधे किरयाना स्टोर पर जमा कर देते हैं। यहां से एक एनजीओ के पास भेज कर इन कपड़ों से थैले बनवाए गए। इन महिलाओं को एक थैले की सिलाई करने के 10 रुपये अदा किए जाते हैं। इससे महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है। ये थैले हर घर में दिए जा चुके हैं, सभी दुकानों पर रखे हुए हैं। अगर कोई घर से थैला लाना भूल जाता है, तो दुकानदार उसे थैले में सामान देता है।

कचरे की करते हैं छंटाई और सदुपयोग

सोसायटी में हर घर से कचरा अलग-अलग करके एकत्रित किया जाता है। एक एनजीओ कचरे को यहां से ले जाती है। गीले कचरे से खाद बनाई जाती है तो सूखे कचरे को रिसाइकिल कर दोबारा इस्तेमाल में लिया जाता है। एनजीओ खाद को उन्हें दे जाती है। इस खाद का प्रयोग सोसायटी के पार्क, ग्रीनबेल्ट में किया जाता है। दूध, चिप्स सहित अन्य खाद्य सामग्री तो कंपनी से ही पैक होकर आती है, उस प्लास्टिक का भी सदुपयोग किया जा रहा है। एनजीओ इस तरह की प्लास्टिक को रिसाइकिल कर रही है।

सोसायटी पालीथिन फ्री करने में दुकानदारों का भी बहुत बड़ा योगदान है। अब वे दुकान पर पालीथिन रखते ही नहीं हैं। ग्राहकों को कपड़े के थैले लाने के लिए प्रेरित करते हैं। सभी सोसायटी वासियों का धन्यवाद। -अनुरोध शर्मा, प्रधान आरडब्ल्यूए

दुकान पर हमेशा कपड़ों के थैले रखे रहते हैं। जो अपने घर से थैले नहीं लाते, उन्हें 10 रुपये में थैला दे दिया जाता है। इस तरह से अब सोसायटी के अंदर कोई भी दुकानदार पालीथिन में सामान नहीं दे रहा है। -संजय मंगला, दुकानदार

Bureau
Author: Bureau

musingindia.com is a leading company in Hindi / English online space. musingindia.com is a leading company in Hindi/English online space. Launched in 2013, musingindia.com is the fastest growing Hindi/English news website in India, and focuses on delivering around the clock national and international news and analysis, business, sports, technology entertainment, lifestyle and astrology. As per Google Analytics, musingindia.com gets 10,000 Unique Visitors every month.

Facebooktwitterredditpinterestlinkedinmail

Bureau

musingindia.com is a leading company in Hindi / English online space. musingindia.com is a leading company in Hindi/English online space. Launched in 2013, musingindia.com is the fastest growing Hindi/English news website in India, and focuses on delivering around the clock national and international news and analysis, business, sports, technology entertainment, lifestyle and astrology. As per Google Analytics, musingindia.com gets 10,000 Unique Visitors every month.

Related Posts

Leave a Comment

Your email address will not be published.