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मुख्यमंत्री याेगी अादित्यनाथ
Bureau | August 9, 2020 | 0 Comments

Girl committed suicide in Jalaun after Uttar Pradesh police harassment in police station

यूपी: पुलिस प्रताड़ना से आहत युवती ने की आत्महत्या, सहेली ने बयां की आपबीती, बोली- मांगा पानी तो मिलीं गालियां

जालौन जिले के उरई में नीशू व उसकी दोनों सहेलियों के साथ आठ घंटे तक उरई कोतवाली में कैसे और क्या पूछताछ हुई। किन-किन पुलिस वालों ने क्या-क्या सवाल किए और फिर कैसे उन्हें घर जाने दिया। नीशू की सहेली मोहिनी चौधरी ने पुलिस के जुल्म की दास्तां सुनाई तो लोग भौचक रह गए और सभी की आंखें नम हो गईं।

मोहिनी का कहना था कि जब पुलिस वालों से पीने के लिए पानी मांगा तो गालियां देकर पिटाई की गई। रामनगर निवासी मोहिनी पुत्री सूरज चौधरी ने बताया कि वह अपने उमरारखेड़ा निवासी सहेली शिवानी के साथ घर से राशन लेने के लिए निकली थी। तभी माहिल तालाब के पास शिवानी ने कहा कि उसे अपना मोबाइल ठीक कराना है। इस पर वे दोनों दुकान में मोबाइल ठीक कराने लगीं। उसी वक्त पड़ोस में रहने वाली सहेली नीशू भी वहां पहुंच गई।

जब मोबाइल ठीक नहीं हुआ तो वहीं से गुजर रहे शिवानी के भाई ने तीनों से कहा कि बलदाऊ चौक स्थित दुकान पर चले जाओ वहां मोबाइल ठीक हो जाएगा। इसके बाद वे तीनों उक्त दुकान पर पहुंचे और अभी मोबाइल ठीक ही करा रहे थे कि दुकान में खड़े लड़के उनकी फोटो खींचने लगे। नीशू समेत उन तीनों ने विरोध किया और इसी बीच पुलिस भी पहुंच गई। मोहिनी के मुताबिक, पुलिस की जीप में एक-दो महिला सिपाही के अलावा पुरुष पुलिसकर्मी थे। रास्ते में ही पुलिस ने गालियां देनी शुरू कर दी थीं।

बताया कि इसके बाद कोतवाली में बने एक कमरे में ले जाकर पूछताछ शुरू कर दी। कभी कोई पुरुष पुलिसकर्मी चोरी गए पर्स में रखे पासपोर्ट के बारे में पूछता तो महिला सिपाही इससे पहले कहां-कहां चोरी का सवाल उठातीं। बार-बार एक ही जैसे सवाल उन तीनों से किए जा रहे थे। नीशू बार-बार यही जवाब दे रही थी कि यदि उसने पर्स उक्त मोबाइल की दुकान से दो तीन दिन पहले ही चोरी किया होता तो वह दोबारा क्यों दुकान पर जाती, लेकिन पुलिस वाले थे कि मानने को तैयार नहीं थे।

मोहिनी ने बताया कि करीब 7-8 घंटे चली पूछताछ के दौरान सिर्फ पानी मांगने पर ही महिला सिपाहियों ने गालियां देने के बाद पानी दिया। बीच-बीच में गालियां दीं और मारपीट भी महिला सिपाहियों ने की, लेकिन कुछ भी खाने को नहीं दिया और रात 10 बजे के आसपास कोतवाली से जाने दिया।

महिला सिपाही के भरोसे की आठ घंटे पूछताछ

मामला चाहे चोरी के आरोप का हो या फिर पुलिस प्रताड़ना का, पूरे मामले में अफसर सवालों के घेरे में हैं। जवाब देने से अब पुलिस अधिकारी कतरा रहा है। जिले में जब एक महिला थाना और दो-दो महिला दरोगा तैनात हैं, तो कोतवाली पुलिस को क्या जरूरत थी कि वह तीन युवतियों को कोतवाली में आठ घंटे तक बैठाकर पूछताछ करती। यदि अधिकारी थोड़ी सी सतर्कता बरतते तो युवतियों को कोतवाली लाने के बजाए कुछ ही दूरी पर स्थित महिला थाना भेजा जाता।

फिर वहीं पर महिला पुलिसकर्मी पूछताछ कर सकती थी। यदि पुलिस को शनिवार की सुबह भी नीशू से पूछताछ करनी थी तो वह महिला थाने में रात को ही उसे रोक भी सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। पुलिस ने मामले को हल्के में लिया और पूरे दिन कोतवाली में पूछताछ की फिर सुबह बेटी को भेजने के लिए पिता से हस्ताक्षर कराकर घर भेज दिया। शहर के लोगों के मुताबिक, महिला दरोगाओं को शोहदों के अभियान के लिए लगाया था, पर उनका काम सिर्फ स्कूल कालेजों के कार्यक्रमों हिस्सा लेना भर रह गया है। हालांकि, सीओ संतोष कुमार का कहना है कि पूछताछ के वक्त महिला दरोगा भी मौजूद थी, पर परिजन इनकार कर रहे हैं।

अफसरों की जिम्मेदारी भी सवालों के घेरे में

हैरत की बात यह है कि कोतवाली से लगा हुआ सीओ संतोष कुमार का दफ्तर भी है, जिस कमरे में दरोगा व अन्य पुलिस कर्मी पूछताछ कर रहे थे, उसके ठीक बगल में कोतवाल जेपी पाल का कमरा है, फिर भी किसी ने तीनों युवतियों के साथ हो रही गलत तरीके से पूछताछ पर अंगुली नहीं उठाई। अब जाकर पुलिस स्वयं को बचाने में लग गई है।

शिकायतकर्ता पुलिस का करीबी, पेशबंदी की तैयारी

बलदाऊ चौक के जिस मोबाइल विक्रेता की शिकायत पर पुलिस तीनों युवतियों को पकड़कर कोतवाली लाई थी, वह पुलिस का करीबी है। आसपास के दुकानदारों का कहना है कि कोतवाली से पुलिस अधिकारियों के लिए नया मोबाइल हो या कोई पार्ट्स सभी उक्त दुकान से जाता है। युवती की मौत के बाद मामला अब पुलिस के गले की फांस बन गया है। लिहाजा पुलिस कह रही कि जिस पर्स के चोरी करने का शक युवतियों पर था, उसमें एक पासपोर्ट भी था, जिस कारण ही पूछताछ की जा रही थी। पुलिस अब मोबाइल दुकान में लगे कैमरे भी खंगाल रही है, ताकि चोरी के शक की बात को साबित किया जा सके। इसके अलावा पुलिस का यह भी तर्क है कि कोतवाली से नीशू आराम से निकली थी, उसे टार्चर नहीं किया गया था। इसके बाद घरवालों ने उसके साथ रात में मारपीट की है, जिस कारण ही उसने फांसी लगाई है।

मां ने लगाया दस हजार रुपये मांगने का आरोप

कोतवाली के बाहर मौजूद नीशू की मां लौंगन देवी ने बताया कि दरोगा योगेंद्र पाठक बेटी को छोड़ने के लिए उससे दस हजार रुपये की मांग भी कर रहे थे। कह रहे थे कि पहले रुपये दो फिर बेटी को जाने देंगे। पुलिस ने दुकान पर बेटी की फोटो खींचने वाले को भी कोतवाली बुलाया और उससे रुपये लेकर उसे छोड़ दिया। सहेली मोहिनी के परिजन भी पुलिस पर रुपये मांगने का आरोप लगा रहे हैं।

चीखों से गूंजी कोतवाली, दरोगा को घेरा

पुलिस प्रताड़ना से क्षुब्ध नीशू के शनिवार सुबह घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या करने से बदहवास मां लौंगन देवी की चीखें कोतवाली के गेट से लेकर भीतर तक गूंजती रहीं। जहां कोई दरोगा और अधिकारी उसे दिख जाता, वह हाथ जोड़कर रोते हुए उसके पीछे चल देती। बेटी का नाम लेकर बार-बार चीखती रही और दरोगा और सिपाही पर बेटी को मारने का आरोप लगाकर अधिकारियों से इंसाफ मांगती रही।

मां की बदहवासी देख साथ आए लोगों की भी आंखें नम हो रही थीं। यही हाल नीशू की बड़ी बहन वंदना और पिता कल्लू का भी था। वह भी रो रोकर हर अधिकारी से हाथ पांव जोड़कर बेटी की मौत पर इंसाफ की मांग करते पूरे दिन कोतवाली के अंदर-बाहर दौड़ते रहे। इसी बीच दरोगा संतराम कुशवाह को वहां बैठी महिलाओं ने यह कहकर घेर लिया कि जिस वक्त पुलिस कमरे में युवतियों को बंद कर रखा था, उस वक्त उन लोगों ने दरोगा से मदद मांगी थी, लेकिन वह पूरी तरह से मदद भी न कर पाए थे।

उधर, बसपा नेताओं ने परिजनों की ओर से पुलिस को जो तहरीर दी है, उसमें चोरी के शक का कोई जिक्र नहीं है। लिखा है कि नीशू के साथ बाजार में कुछ लड़कों ने छेड़खानी की, तब किसी की सूचना पर पहुंचे चौकी इंचार्ज योगेश पाठक और चार सिपाही बेटी व उसकी सहेलियों को लेकर कोतवाली आ गए, जहां पर उसके साथ मारपीट की गई, जिससे क्षुब्ध होकर ही बेटी ने फांसी लगा जान दे दी। तहरीर देने वालों में बसपा जिलाध्यक्ष संजय गौतम, शैलेंद्र शिरोमणि आदि रहे।

बिटिया को दई गारी औउर पट्टा से भी मारिन

मां लौंगन देवी ने बताया कि आठ घंटे तक पुलिस वाले बिटिया को कमरे में बंद किए रहे और उसे पानी भी नहीं पीने दिया। बिटिया को दई गारी औउर पट्टा से भी मारिन, जिससे बिटिया काफी परेशान थी। घर आकर उसने रात में कुछ खाया-पीया नहीं। कितने अरमान थे कि बेटी की डोली उठाएंगे, लेकिन क्या पता था कि उसकी अर्थी को कंधा देना पड़ेगा।

कांग्रेसियों ने की नारेबाजी, डटी रही फोर्स

नीशू की मौत की सूचना फैलते ही कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनुज मिश्रा व महासचिव दिपांशु समाधिया भी साथियों संग श्मशान घाट पहुंचे। अंतिम संस्कार के लिए शव के पहुंचते ही कांग्रेसी नारेबाजी करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पीड़ित पक्ष को मुआवजा दिलाने की मांग कर हंगामा करने लगे। कांग्रेसियों ने श्मशान घाट के बाहर ही जाम लगाने का प्रयास किया। सूचना पर भारी पुलिस फोर्स और क्यूआरटी भी पहुंच गई। पुलिस ने सड़क पर बैठे कांग्रेसियों को हटाकर उन्हें शांत कराया। इसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो सकी। मोहिनी और नीशू के घरों के बाहर भी देर रात तक पुलिस फोर्स डटी रही। कांग्रेस जिलाध्यक्ष का कहना है कि वे इस मामले में खामोश नहीं बैठेंगे, पार्टी आंदोलन करेगी। जाम लगाने वालों में कुछ बसपा के कार्यकर्ता भी शामिल रहे।

एडीएम बोले, मजिस्ट्रेटी जांच कराई जाएगी

देर शाम जाम की सूचना पाकर पहुंचे अपर जिलाधिकारी पीके सिंह और एएसपी डाक्टर अवधेश सिंह भी पहुंचे और आश्वासन दिया कि मामले की मजिस्ट्रेटी जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा, उसे किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।

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Author: Bureau

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