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सीएम योगी आदित्यनाथ
Bureau | August 22, 2020 | 0 Comments

Father carrying the dead body of the son on his shoulder in Uttar Pradesh

उत्तर प्रदेश के योगीराज में सुल्तानपुर में संवेदनहीन हुआ स्वास्थ्य महकमा, बेटे के शव को कंधे पर लाद पिता पहुंचा बस स्टेशन

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता दिखाई दी है। यहां के जिला अस्पताल में मासूम की इलाज के दौरान मौत के बाद मृतक के पिता ने शव को घर ले जाने के लिए वाहन की मांग की। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने कोई मदद नहीं दी। मजबूर पिता पहले तो कुछ देर चिकित्सकों व एम्बुलेंस चालकों से मिन्नते की, जब उसकी किसी ने नहीं सुनी तो वह बेटे के शव को कंधे पर लादकर बस स्टेशन पहुंचा। वहां से बस में सवार होकर बेटे के शव को कुंधे पर लादे-लादे कादीपुर निकल पड़ा। यहां पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने उसे ई-रिक्शा से घर भेजा।

कंधे पर बेटे के शव को लादे पहुंचा बस स्टेशन

दरअसल, पड़ोसी जनपद जौनपुर के सरपतहा थानाक्षेत्र के उस्रौली गांव निवासी रामयश विंद पुत्र तीन वर्षीय पुत्र दिव्यांश को शुक्रवार की देर रात विषैले जंतु ने काट लिया था। पिता उसे लेकर सूरापुर में एक चिकित्सक को दिखाया, जहां हालत गंभीर देख उसे कादीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया। सीएचसी पर चिकित्सकों ने हालत नाजुक देख एम्बुलेंस से सुलतानपुर जिला चिकित्सालय भेज दिया गया। देर रात वह जिला अस्पताल पहुंचा था, जहां शनिवार की सुबह इलाज के दौरान मासूम की मौत हो गई। यहां चिकित्सकों ने रामयश को बच्चे का शव सौंप दिया। आरोप है कि मृतका का पिता जिला चिकित्सालय में शव को ले जाने के लिए काफी गुहार लगाता रहा, लेकिन उसकी किसी ने न सुनी। अस्पताल परिसर में खड़ी एक एम्बुलेंस ने शव को ले जाने के लिए उससे 1800 रुपये की मांग की, लेकिन रुपये न होने पर वह अपने मृत पुत्र के शव को कंधे पर लादकर सुलतानपुर बस स्टेशन चल पड़ा।

पुलिस ने बैठा दिया बस में

यहां मृत बच्चे के रहते कोई अपने साधन पर बैठाने को तैयार नहीं हुआ। बस स्टेशन पर ड्यूटी में लगी पुलिस ने उक्त लाचार को परिवहन निगम की बस में बैठाया, जो कादीपुर बस अड्डे पर उतरा। बस स्टेशन पर मृतक की मां बिलख रही थी इसे देख चौराहे पर तैनात सिपाही अजय कुमार व होमगार्ड गुरदीन सिंह ने ई- रिक्शा कर उन्हें घर छुड़वाया।

क्या कहते हैं जिम्मेदार ?

इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ सीबीएन त्रिपाठी ने कहा कि रामयश द्वारा जिला अस्पताल में इंट्री ही नहीं कराई गई। वह पोस्टमॉर्टम के लिए भी तैयार नहीं था। इंट्री न होने के कारण उसे वाहन नहीं मिल सका।

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Author: Bureau

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