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एसआरएस ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन अनिल जिदल
Bureau | January 10, 2020 | 0 Comments

ED attaches over Rs 2,500-crore assets of Haryana-based SRS Group in connection with fraud case

आइपीएस अमिताभ ढिल्लो ने कसा था एसआरएस ग्रुप पर शिकंजा

एसआरएस का पूरा नाम ‘सब रहो साथ’ है। इसके चेयरमैन अनिल जिदल ने लोगों को मोटे मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपये निवेश करा लिए। निवेशकों को लगातार उच्च दर पर ब्याज का भुगतान करता रहा। लोगों का भरोसा कंपनी पर बढ़ता गया और एक के बाद एक निवेशक जुड़ते चले गए। एक समय ऐसा था जब फरीदाबाद, पलवल, दिल्ली व गुरुग्राम के लोग भी एसआरएस ग्रुप पर आंख मूंदकर विश्वास करते थे।

रियल एस्टेट, सिनेमा, ज्वैलरी सहित अन्य कारोबार से जुड़े एसआरएस ग्रुप ऑफ कंपनीज ने साल 2015 से ही निवेशकों को ब्याज देना बंद कर दिया था। अपनी जीवनभर की कमाई लगा चुके निवेशकों की इसके बाद आंखें खुलीं। उनकी तरफ से पुलिस को ग्रुप के खिलाफ लगातार शिकायतें दी जाने लगीं। मगर ग्रुप की साख इतनी बड़ी थी कि पुलिस कोई कदम नहीं उठा पा रही थी। कुछ निवेशकों ने एसआरएस पीड़ित मंच बनाकर ग्रुप के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और पुलिस को शिकायतें दीं, पर कोई भी अधिकारी ग्रुप पर हाथ डालने से डर रहा था। दिल्ली के महिपालपुर से हुए थे गिरफ्तार

आखिरकार वर्ष 2018 में तत्कालीन पुलिस आयुक्त आइपीएस अमिताभ ढिल्लो ने एसआरएस ग्रुप पर शिकंजा कसना शुरू किया। अमिताभ ढिल्लो ने एसआरएस के खिलाफ मिली सौ से अधिक शिकायतों की जांच कराई। जांच के बाद एसआरएस के चेयरमैन अनिल जिदल व उसके कारोबारी साथियों के खिलाफ मुकदमें दर्ज होने शुरू हुए। विभिन्न थानों में एक साथ 50 से अधिक मुकदमे दर्ज किए गए। मुकदमे दर्ज होने के बाद अनिल जिदल व उसके साथी फरार हो गए। 5 अप्रैल 2018 को पुलिस ने दिल्ली के महिपालपुर से गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद और भी मुकदमे दर्ज हुए। आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद ही सामने आया कि उन्होंने कितने बड़े स्तर पर घोटाला कर रखा है। पुलिस द्वारा दी गई सूचना के बाद ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉड्रिग की जांच शुरू की। जिसके बाद अब आरोपितों की संपत्ति अटैच की जा सकी है। अमिताभ ढिल्लो इस समय एसटीएफ हरियाणा के चीफ हैं।

मामले की जांच में जुटे पुलिस अधिकारी नाम ना छापने की शर्त पर बताते हैं कि एसआरएस ग्रुप ने लोगों की कितनी रकम हड़पी है, इसका कोई सीधा हिसाब-किताब नहीं। क्योंकि ग्रुप में लोगों ने बड़ी संख्या में दो नंबर की रकम निवेश की थी, वे लोग सामने नहीं आ पाए। यह भी आरोप लगते रहे हैं कि ग्रुप में पैसे निवेश करने वालों में कई राजनीतिज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हैं। जिन्होंने अपनी नंबर दो की कमाई को यहां निवेश किया था।

दो साल से ईडी सहित कई अन्य एजेंसियां कर रहीं हैं एसआरएस की जांच

एसआरएस ग्रुप के चेयरमैन अनिल जिंदल सहित बाकी निदेशकों की गिरफ्तारी के बाद से ही प्रवर्तन निदेशालय (सहित) अन्य एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी थी। एसआरएस ग्रुप के निदेशकों के खिलाफ पिछले दो सालों में फरीदाबाद सहित दिल्ली व पंजाब में 100 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। अनिल जिंदल आदि की गिरफ्तारी के बाद ही आयकर विभाग ने इनके खातों को खंगालना शुरू कर दिया था। लगातार आ रही शिकायतों पर ईडी, वित्त मंत्रालय के एसएफआईआ व अब सीबीआई ने भी इनके काले चिट्ठे की जांच शुरू कर दी है।

एसआरएस ग्रुप ने नवंबर 2015 में निवेशकों से हाथ खींचने शुरू कर दिए थे। ब्याज के चेक बाउंस होने के बाद तो निवेशकों को लगने लगा था कि एसआरएस ग्रुप अब डूबता हुआ जहाज है। इस कारण निवेशकों ने अनिल जिंदल सहित बाकी निदेशकों के घरों पर भी धरने प्रदर्शन करने शुरू कर दिए थे। वर्ष 2016 में तो एसआरएस ग्रुप ने बैंकों से लिए ऋण की किस्तों का भुगतान भी बंद कर दिया था। इसके बाद निवेशकों ने पुलिस में शिकायतें करनी शुरू की, मगर जांच के नाम पर उन शिकायतों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे एसआरएस ग्रुप के निदेशकों के हौसले बुलंद थे। वर्ष 2018 में तत्कालीन पुलिस आयुक्त अमिताभ सिंह ढिल्लों से निवेशकों ने शिकायत कर अनिल जिंदल सहित बाकियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की थी। इस पर पुलिस आयुक्त ने उनके खिलाफ मामले दर्ज करवाए और 5 अप्रैल 2018 को अनिल जिंदल सहित चार निदेशकों को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया।

ये हैं व्हीशल ब्लोवर

निवेशकों सहित बैंकों के साथ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोपी अनिल जिंदल व अन्य निदेशकों की कारगुजारियों को उजागर करने वालों में सीए सतीश मित्तल, डीके अग्रवाल व मनोज अग्रवाल प्रमुख हैं। इन्होंने सूचना के अधिकार सहित विभिन्न सूत्रों के उनके काले चिट्ठे के दस्तावेज जमा कर जांच एजेंसियों तक पहुंचाए। पुलिस कार्रवाई नहीं होने के कारण तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर को फरीदाबाद बुलवाकर इन्होंने घोटाले के दस्तावेज सार्वजनिक किए। दबाव बढ़ते देख दूसरे दिन ही पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।

बैंकों का बकाया है 2163 करोड़

एसआरएस ग्रुप ने अपने अलग-अलग प्रोजेक्टों के लिए करोड़ों रुपये का ऋण विभिन्न बैकों से ले रखा था। इस मामले के व्हीसल ब्लोवर सतीश मित्तल के अनुसार 31 मार्च 2018 तक एसआरएस ग्रुप पर विभिन्न बैंकों का 2163 करोड़ रुपये बकाया था, जोकि अब बढ़कर और अधिक हो गया होगा। बैंकों ने एसआरएस ग्रुप के चेयरमैन अनिल जिंदल सहित निदेशक बिशन बंसल, नानक चंद तायल सहित अन्यों के नाम से गिरवी रखी कोठियों को जब्त कर उनकी नीलामी की कार्रवाई शुरू कर दी थी।

संपत्ति अटैच करने से पहले ईडी ने 48 लोगों की मांगी थी जानकारी

एसआरएस ग्रुप की संपत्ति अटैच करने से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छह माह पहले ही फरीदाबाद और बल्लभगढ़ के तहसीलदारों से इस ग्रुप से जुड़े करीब 48 लोगों और कंपनियों की संपत्तियों का पूरा ब्योरा मांगा था। इसमें ग्रुप के चेयरमैन अनिल जिंदल व उसके परिवार के अलावा निदेशकों सहित कई अधिकारियों के नाम शामिल हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉर्डिंग एक्ट के तहत इन संपत्तियों को अटैच किया है।

रियल एस्टेट में निवेश, एफडी पर मोटा ब्याज और ज्वैलरी के कारोबार में लोगों को फंसाकर उनके करोड़ों रुपये हड़पने के आरोपी एसआरएस ग्रुप के चेयरमैन अनिल जिंदल सहित पांच निदेशकों बिशन बंसल, नानक चंद तायल, विनोद मामा और देवेंद्र अधाना को पांच अप्रैल 2018 को पुलिस ने दिल्ली के एक होटल से गिरफ्तार किया था। उस दौरान तत्कालीन पुलिस आयुक्त अमिताभ ढिल्लो के आदेश पर पुलिस ने उन पर 20 से अधिक एफआईआर दर्ज की थीं।

इन मामलों में पुलिस ने पूछताछ शुरू की तो नए-नए खुलासे होते चले गए। पुलिस भी एसआरएस ग्रुप में हुई करोड़ों की हेराफेरी को देखकर हैरान थी। मामले की परतें खुलती गईं तो पता चला कि एसआरएस ग्रुप ने कई बड़े खेल कर रखे हैं। इस पर पुलिस आयुक्त अमिताभ ढिल्लो ने इसकी जांच के लिए आयकर विभाग सहित प्रवर्तन निदेशालय को भी पत्र लिखा था, जिस पर उन्होंने जांच शुरू की थी।

इनकी संपत्तियों का मांगा था ब्योरा

इसी जांच के दौरान ईडी ने जुलाई 2019 में बल्लभगढ़ व फरीदाबाद के तहसीलदार को पत्र लिखकर एसआरएस ग्रुप के चेयरमैन अनिल जिंदल, बेटे प्रतीक जिंदल, शशी जिंदल, उर्वशी जिंदल, शैली गर्ग, निदेशक नानक चंद तायल, प्रवीण तायल, नवीन तायल, सपना तायल, बिमलेश तायल, वंदना तायल, निदेशक बिशन बंसल, तोशी बंसल, राजू बंसल, संजना बंसल, कुनाल बंसल, श्याम सुंदर बंसल, ललित कुमार बंसल, सुरेश बंसल, जितेंद्र गर्ग, अंकित गर्ग, ऋतु राज गर्ग, भूमिका गर्ग, अतिका गर्ग, प्रवीण कपूर, तुषार कपूर के अलावा मनसा ग्रुप, मैसर्स ओमेगा ज्वैलर्स, माधव बुलियंस, अक्षत ज्योति, अलैय बिल्डटेक, क्लासिक जेम्स एंड ज्वैल्स, फेम सेल्स एजेंसी, यूएफएल पोर्टफोलियां लिमिटेड, टॉप च्वाइस कंप्यूटेक लिमिटेड, सुकॉन इंडिया लिमिटेड, राहुल बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड, प्रीमियर रियल बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड, प्रयास ट्रैकऑन लिमिटेड, ऑप्टिमिस्टक ट्रैडिंग कंपनी प्राइवेट लिमोिटेड, नवनिर्माण एसएसआर पाथवेज प्राइवेट लिमिटेड, एलएसएस फिनवेस्ट प्राइवेट लिमिटेड, जेएमए बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड, जेकेएस बिल्टेक, जेकेएस डेवलर्प्स प्राइवेट लिमिटेड, जेबीएम ऑटो लिमिटेड, गुन्नूृ फेशनस प्राइवेट लिमिटेड के नाम शामिल हैं।

ईडी ने जेल में की थी पूछताछ

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने एसआरएस ग्रुप के चेयरमैन अनिल जिंदल सहित जेल में बंद सभी निदेशकों से अलग-अलग पूछताछ की थी। चंडीगढ़ से आई ईडी की टीम ने सितंबर 2019 में अदालत से अनुमति लेकर पूछताछ शुरू की। सूत्रों के अनुसार सभी निदेशकों से अलग-अलग दिनभर पूछताछ हुई, जबकि अनिल जिंदल से टीम ने दो दिन पूछताछ की थी।

A provisional order for attachment of these properties has been issued under the Prevention of Money Laundering Act (PMLA).

The Enforcement Directorate (ED) has attached movable and immovable assets worth Rs 2,511 crore of the SRS Group, its promoters and their family members and associate companies under the Prevention of Money Laundering Act, 2002 (PMLA) in a cheating and fraud case.

The assets attached consist of land, real estate projects, commercial projects, residential houses, school, cinema hall, balances in bank accounts and fixed deposits.

ED is investigating SRS Group and its promoters on the basis of numerous FIRs filed at various police stations in Faridabad, charge sheets filed by Haryana Police as well as FIR filed by Economic Offence Wing (EOW), New Delhi.

During its investigation, ED found out that promoters of SRS Group – Anil Jindal, Jitender Kumar Garg and Praveen Kumar Kapoor – and their associates lured investments from several individual and institutions on fake promises of high returns from investments in shops, plots, flats, apartments etc.

The money thus collected was then siphoned off to other group companies through various shell companies controlled indirectly by the promoters of the group through dummy directors.

The promoters also showed inflated assets and turnover through fake and fabricated balance sheets. They kept investors in the dark by not giving them specific investment plans. To keep the companies afloat, they further availed loans, which were used for repayments to investors.

The investigation by ED also revealed that movable and immovable properties were illegally acquired in the name of various companies of SRS Group and family members of the promoters.

Bureau
Author: Bureau

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