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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
Musing India | August 22, 2020 | 0 Comments

Drug Mafia Sushil Sharma spread drug business in many districts of Uttar Pradesh

भाजपा का झंडा लगा घूमता था ड्रग्स माफिया सुशील शर्मा उर्फ बच्चा, नेताओं ने की थी एडीजी से शिकायत, नहीं हुई सुनवाई

उत्तर प्रदेश के कानपुर में कई वर्षों से विजय नगर और शास्त्री नगर से पूरे शहर में चल रहा चरस, स्मैक, गांजे का धंधा सिर्फ पुलिस की जानकारी में ही नहीं बल्कि भाजपा के बड़े-बड़े नेताओं की जानकारी में भी था। भाजपाइयों ने एडीजी से शिकायत भी की लेकिन कुछ हुआ नहीं।

इसी का फायदा उठाकर धंधे का सरगना सुशील शर्मा उर्फ बच्चा अपने दोनों घरों के सामने ठाठ के साथ अपनी गाड़ी में भाजपा का झंडा लगाकर घूमता रहता था। जगह-जगह अपने को भाजपा पदाधिकारी बताकर रौब गांठता था। भाजपा जिला अध्यक्ष सुनील बजाज का कहना है कि उन्होंने कभी भाजपा में इसका नाम नहीं सुना है। फिर भी जांच कराएंगे।

भाजपा से विजय नगर के पूर्व पार्षद अरुण पाल, पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष विजय नगर, पांडु नगर क्षेत्र के पार्षद नीरज बाजपेई और पार्टी के वरिष्ठ नेता श्याम बिहारी त्रिपाठी ने दो महीने पहले 8 जून को एक ज्ञापन एडीजी को सुशील शर्मा और उसके गैंग के खिलाफ दिया था। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया था कि भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के बीच में ही इस सरगना का भी घर है और वहीं पर यह सारा धंधा चलता है।

इसके बावजूद इसके खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई। मजे की बात यह है कि एडीजी से शिकायत करने के बाद भी सरगना के खिलाफ  कार्रवाई होने में दो महीने लग गए। इस मामले की पुलिस से शिकायत करने वाले भाजपाइयों का कहना है कि अगर उसने गाड़ी में झंडा लगाया है और भाजपा का पोस्टर बनाया है तो किसी न किसी तरीके से सदस्यता तो जरूरी है।

सुशील शर्मा को भाजपा का सदस्य किसने बनाया, यह पता नहीं। जिलाध्यक्ष के अनुसार पार्टी में सक्रिय सदस्यों की पहचान तत्काल की जा सकती है। लेकिन यदि कोई भी अपने को भाजपाई कहता है तो उसकी पूरी पड़ताल के बाद ही सच्चाई सामने आ सकती है।

उत्तर प्रदेश: ड्रग्स माफिया बच्चा का कई जिलों में फैला है नशे का कारोबार, बोला पुलिस को पहुंचाता था रूपया

कानपुर के ड्रग्स माफिया सुशील शर्मा उर्फ बच्चा ने वर्ष 1990 में अपराध की दुनिया में कदम रखा। छोटी-मोटी चोरियों, लूटपाट और मारपीट से शुरूआत की। इसके बाद शहर के एक माफिया पप्पू डॉन के संपर्क में आकर वह बढ़ता चला गया। वर्ष 2004 में ऋषिकांत शुक्ला ने पप्पू डॉन को एनकाउंटर में मार गिराया।

इसके बाद बच्चा पुलिस का मुखबिर बनकर पप्पू गैंग समेत कई अन्य अपराधियों के शातिर गुर्गों को पकड़वाने लगा। जब कई अपराधी पीछे पड़ गए तो उसने काकादेव थाना क्षेत्र के विजय नगर में एक सुअर बाड़ा खोल दिया। पुलिस की शह पर इस सुअर बाड़े की आड़ में जुआ खिलवाने लगा। साथ ही चरस, गांजे व ड्रग्स का धंधा भी शुरू कर दिया। धीरे-धीरे पुलिस की मिलीभगत से पूरे शहर में ड्रग्स का कारोबार फैलाया।

फिर आसपास के जिलों से राजधानी लखनऊ तक नेटवर्क बना लिया। पश्चिम बंगाल, उड़ीसा व नेपाल से थोक मादक पदार्थ लाकर बेचने लगा। इसके बदले में वह धंधे के सहयोगी पुलिस कर्मियों को 50 हजार से लेकर दो लाख रुपये तक महीना सुविधा शुल्क पहुुंचाता था। ऐसे मेें बच्चा जब-जब किसी अपराध में गिरफ्तार हुआ, पुलिसवाले ही उसकी ढाल बने। उस पर ऐसी धाराएं लगतीं, जिससे जमानत मिलने में खास दिक्कत नहीं होती थी। 

सिंधी कालोनी में भट्ठा मालिक के घर डाली थी डकैती   

बच्चा ने साथियों संग मिलकर सिंधी कालोनी निवासी एक भट्ठा मालिक के घर दिन दहाड़े डकैती डाली थी। सूत्रों के अनुसार इसमें रकम के बंटवारे को लेकर विवाद हो गया था जिसके बाद डकैती का खुलासा हुआ था। इस डकैती में शामिल कुछ लोग अब सफेदपोश बन गए हैं। दिन दहाड़े हुई डकैती के बाद सिंधी कालोनी के सभी प्रवेश द्वारों पर गेट लगवाए गए थे।

पुलिस पकड़ती थी, पुलिस ही बचाती थी 

बच्चा जब-जब गिरफ्तार हुआ, पुलिस धाराआें में खेल कर उसे बचा लेती थी। चरस, गांजा, स्मैक बरामद होने के बाद पुलिस इसे कम दिखाकर धाराओं में हेरफेर कर उसे जेल भेज देती। जिसके एवज में वह बच्चा से अच्छी खासी रकम लेती थी। धाराएं कमजोर होने से वह आसानी से छूटता रहा और गोरखधंधे में दिन दूना, रात चौगुनी तरक्की करता रहा। 

पत्नी बनती रही बच्चा की ढाल

विजय नगर में सुअरबाड़ा खोलने के बाद बच्चा ने शादी की। पुलिस जब सुअरबाड़े की आड़ में उसके जुआ, चरस व गांजे के कारोबार पर छापा मारने पहुंचती, पत्नी सामने आ जाती। जब तक पुलिस उससे पूछताछ करती बच्चा नशे का सामान लेकर भाग निकलता। मोहल्ले के लोगों से भी बच्चा का अच्छा बर्ताव रहता था जिससे उसकी मदद करने वालों की अच्छी सख्या हो गई थी। उसने इलाके में अपने कई मुखबिर छोड़ रखे थे। 

चलती गाड़ी में खिलवाता था जुआ

सूत्रों के मुताबिक बच्चा ड्रग्स के धंधे से पहले जुए का सबसे बड़ा फड़ चलवाता था। घर पर लगातार पुलिस का छापा पड़ने से वह चलती गाड़ी में जुआ खेलवाने लगा। धीरे-धीरे उसने तीन गाड़ियां जुटा लीं। लेकिन उसके विरोधियों ने पुलिस से साठगांठ कर गाड़ियां पकड़वा दीं। 

ड्रग्स माफिया बच्चा के परिवार के पांच सदस्यों के 31 एकाउंट सीज, मेहरबान रहने वाली पुलिस कर रही कार्रवाई

कानपुर के विजय नगर के ड्रग माफिया बच्चा के परिवार के 31 बैंक एकाउंट पुलिस ने सीज कर दिए हैं। एकाउंटों में 15 लाख रुपये मिले हैं। पोस्टआफिस में खुले एकाउंटों में कितने रुपये हैं, उसकी जानकारी मांगी गई है। एसपी पश्चिम डॉ अनिल कुमार ने बताया कि बच्चा और उसका भाई राजकुमार दोनों ही काकादेव थाने के हिस्ट्रीशीटर होने के साथ ही सक्रिय बदमाश हैं।

पुलिस ने गुरुवार को विजय नगर और शास्त्री नगर में छापा मारकर करीब ढाई करोड़ का गांजा, चरस, स्मैक और नशीली दवाइयां पकड़ी थीं। चार तस्करों को गिरफ्तार किया था जबकि सरगना हिस्ट्रीशीटर सुशील शर्मा उर्फ बच्चा फरार हो गया था। इस कारोबार में पुलिस की मिलीभगत भी थी।

पुलिस को छानबीन में पता चला है कि बच्चा व उसके परिवार के खातों से रोज लेन-देन होता था। खाते सीज होने के बाद अब अवैध कारोबार से अर्जित की गई उसकी संपत्तियों की जांच भी की जा रही है। डीआईजी प्रीतिंदर सिंह के आदेश पर संपत्ति कुर्क की जाएगी। इसके लिए नगर निगम, केडीए और जिला प्रशासन से सहयोग मांगा गया है।

महिलाओं से बिकवाता था गांजा-स्मैक 

कोचिंग मंडी में स्मैक-गांजा बिकने की शिकायत लंबे अरसे से लोग कर रहे थे। स्थानीय लोगों का रहना दूभर हो गया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती थी। आस-पास के चाय-पान के खोखे, छोटी-छोटी दुकानें, खाने-पीने के अड्डे नशे के अड्डों में तब्दील हो चुके थे। कोचिंग मंडी की गलियों में छोटे-छोटे लड़के घूम-घूम कर नशे का सामान बेचते थे। पुलिस ने बताया कि बच्चा के गैंग में कई महिलाएं भी शामिल हैं जो कोचिंग मंडी के आस-पास स्मैक-गांजा बेचती हैं। पान की दुकानों में भी बेचती हैं। उनकी तलाश के लिए एक टीम गठित कर दी गई है।

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Author: Musing India

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