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सीएम योगी आदित्यनाथ
Bureau | June 21, 2020 | 0 Comments

Corruption increases in Uttar Pradesh’s Yogi Adityanath government

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार में भ्रष्टाचार, ‘हवा’ में सड़क…भ्रष्टाचार के लिए लंबाई ही नहीं चौड़ाई में भी किया खेल

महाराजगंज में ‘हवा’ में ही 27 करोड़ की सड़क मंजूर करवा लेने के मामले में परत दर परत गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत इस प्रोजेक्ट में रकम हड़पने के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में सड़क की लंबाई के बाद सड़क की भूमि की चौड़ाई भी गलत दर्ज की गई है।

पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने 16 मीटर चौड़ी राजमार्ग की भूमि को 30 मीटर दिखाकर डीपीआर भी मंजूर करा ली थी। ‘अमर उजाला में महाराजगंज में एनएच-730 के रामनगर से सिसवा बाबू सेक्शन के इस निर्माणाधीन सड़क का खुलासा किया था। 

इसके बाद आनन-फानन में अफसरों ने शनिवार को छुट्टी के बावजूद पीडब्ल्यूडी मुख्यालय का संबंधित दफ्तर खुलवाया और दोषी तत्कालीन एक्सईएन के खिलाफ आरोपपत्र फाइनल करके शासन को भेजा। सूत्रों के मुताबिक सोमवार को आरोपपत्र संबंधित अधिकारी को भेज दिए जाएंगे। 

यह है पूरा मामला 

वर्ष 2018 में सिसवा बाबू सेक्शन के 21.12 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण के लिए डीपीआर केंद्र सरकार को भेजी गई। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए 185.18 करोड़ रुपये की स्वीकृति जारी कर दी। जबकि, सड़क के इस भाग की लंबाई कुल 18.39 किलोमीटर ही है। 
 
इस तरह एस्टीमेट में 2.73 किलोमीटर सड़क ज्यादा दिखाकर इस हिस्से की लागत 26.9432 करोड़ रुपये हड़पने के लिए यह पूरा खेल किया गया।  इतना ही नहीं, सड़क की भूमि की चौड़ाई (आरओडब्ल्यू) भी डीपीआर में गलत दिखाई गई। सड़क के चैनेज 501.850 पर स्थित सक्सेना चौराहे पर आरओडब्ल्यू 30 मीटर दिखाया गया, जबकि चौराहे पर राजमार्ग की भूमि मात्र 16 मीटर ही उपलब्ध है। 

इस भूमि पर भी अन्य व्यक्तियों का कब्जा था, जिन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग की नीति के तहत मूल्यांकन करते हुए मुआवजा दिए जाने की व्यवस्था है, लेकिन राजमार्ग के गैर स्वामित्व वाली भूमि को भी राजमार्ग के आरओडब्ल्यू में दिखाया गया। 

डीपीआर में राजमार्ग के स्वामित्व के बाहर की भूमि के लिए मुआवजा भुगतान के लिए डीपीआर में कोई प्रावधान नहीं किया गया। इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति का संकट भी पैदा हुआ।

कई सेवाएं अब भी जनहित गारंटी अधिनियम में नहीं

मुख्यमंत्री के बार-बार निर्देश के बावजूद कुछ विभाग कई विभागीय सेवाओं को जनहित गारंटी अधिनियम के दायरे में नहीं ला रहे हैं। हाल में मुख्यमंत्री के निर्देशों पर अमल की समीक्षा की गई तो पता चला कि विद्युत सुरक्षा निदेशालय और पर्यावरण विभाग ने कई सेवाएं अभी तक अधिनियम में अधिसूचित नहीं कराई हैं। 

नतीजतन, इनकी सेवाओं को ई-डिस्ट्रिक्ट, निवेश मित्र पोर्टल व मुख्यमंत्री के दर्पण डैशबोर्ड से इंटीग्रेट नहीं कराया जा सका है। इस पर अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल ने अपर मुख्य सचिव ऊर्जा अरविंद कुमार व प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण सुधीर गर्ग को इस संबंध में पत्र लिखकर सीएम की नाराजगी बताई है। 

उन्होंने दोनों अफसरों को चिह्नित सेवाएं 15 दिनों में अधिसूचित कर इंटीग्रेट कराने को कहा है। गौरतलब है कि सीएम ने  विभिन्न सेवाओं को जनहित गारंटी अधिनियम के दायरे में लाकर लोगों     को तय समयसीमा में काम सुनिश्चित कराने को कहा था। 

अधिसूचित सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन हो जाती है तो मुख्यमंत्री विभिन्न कार्यों में होने वाली प्रगति को सीधे देख सकते हैं। इससे यह पता चल जाता है कि किस काम को होने में कितने दिन लग रहे हैं, या किस अफसर की वजह से देरी हो रही है। 
 
ऑनलाइन सेवाओं से जुड़े कार्मिकों का प्रशिक्षण भी दें  
अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री ने कहा है कि विभागीय ऑनलाइन व्यवस्था व अन्य आवश्यक निर्देशों के अनुपालन से जुड़े कार्मिकों को कोविड-19 महामारी के मद्देनजर आनलाइन प्रशिक्षण दिया जाए। इसके लिए वीडियो व ट्यूटोरियल्स डवलप कर उपलब्ध कराए जाएं।

विद्युत सुरक्षा निदेशालय की इन सेवाओं को अधिसूचित कराने का निर्देश 

  • वाणिज्यिक  इंस्टालेशन के लिए प्रारंभिक एनओसी 
  • औद्योगिक इंस्टालेशन के लिए सिंगल विंडो पोर्टल के जरिए प्रारंभिक एनओसी 
  • इंस्टालेशन की पाक्षिक जांच
  • कांट्रैक्टर, वायरमैन व सुपरवाइजर के लिए लाइसेंस व परमिट  
  • इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से छूट, वापसी, समायोजन  
  • बिजली दुर्घटना पूछताछ 

वन विभाग की इन सेवाओं को अधिसूचित कराने का फरमान 

  • आरा मशीन का नवीनीकरण 
  • आरा मशीन का नामांतरण व स्थानान्तरण
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Author: Bureau

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