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कोरोना संक्रमण
Bureau | July 12, 2020 | 0 Comments

Coronavirus: 116 new cases in Faridabad

फरीदाबाद में 116 नए कोरोना संक्रमित मिले

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा के फरीदाबाद कोरोना के लिहाज से रविवार का दिन राहत वाला रहा। छुट्टी वाले दिन 142 संक्रमितों को कोरोना के संक्रमण से आजादी मिली और एक भी मरीज की मौत नहीं हुई हैं। कोरोना से स्वस्थ होने वालों की दर अब 81.02 फीसद हो गई है। इसके अलावा कोरोना के 116 नए केस आए हैं।

स्वस्थ्य विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, ओल्ड फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और एनआइटी के विभिन्न क्षेत्रों से कोरोना के मामले आए हैं। जिले में 925 सक्रिय केस हैं और अब तक 34342 कोरोना संदिग्धों के सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें से 5417 में कोरोना का संक्रमण मिला है, जबकि 4389 लोग कोरोना के संक्रमण को हरा चुके हैं। सोमवार को 282 सैंपलों की रिपोर्ट आने की उम्मीद है। 36 मरीजों की स्थिति गंभीर है। इनमें से नौ मरीज वेंटिलेटर पर है। अब तक 103 मरीजों की मौत हुई है। जिले में मृत्युदर 1.9 फीसद है। 13.3 फीसद कोरोना संदिग्धों के सैंपल की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.रामभगत ने बताया कि जिले में कोरोना वायरस के संक्रमण के रफ्तार से तेज मरीजों के स्वस्थ होने की रफ्तार है। 142 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया है। डिस्चार्ज होने वाले सभी को 14 दिन के होम क्वारंटाइन के निर्देश दिए गए हैं।

ये लापरवाही, कहीं पड़ न जाए भारी

कोरोना वायरस से बचाव के लिए चिकित्सकों और कर्मचारियों द्वारा पहने जाने वाले पीपीई किट व ग्लव्स को डिस्पोज करने की बजाय उसे यूं ही खुले में फेंका जा रहा है। हैरत की बात यह भी कि यह सब मुख्य चिकित्सा अधिकारी के आवास से कुछ दूरी पर हो रहा है। इसके बावजूद वे इससे अनजान हैं। यह लापरवाही कोरोना के संक्रमण को बढ़ा सकती है और आसपास के लोगों के लिए भारी पड़ सकती है।

वैश्विक महामारी कोरोना जिले में अब तक 103 कोरोना संक्रमित की जान ले चुका है और पांच हजार से अधिक लोग इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इस संक्रमण से बचाव के लिए लगातार सरकार और जिले के अधिकारी अपील कर रहे हैं, पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी ही कोरोना की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों पर पलीता लगा रहे हैं। पीपीई किट व ग्लब्स एवं मास्क को खुले में फेंकने से कोरोना वायरस का संक्रमण फैल सकता है। यदि खुले में पड़ी पीपीई किट व ग्लब्स तक आवारा पशु पहुंच गए, तो कोरोना संक्रमण उनके जरिए और भयावहता के साथ फैलने की आशंका बढ़ सकती है। व्यवस्थित डिस्पोजल है आवश्यक

कोरोना संक्रमितों का इलाज में जुटे चिकित्सकों, सैंपल लेने वाले लैब टेक्नीशियन, संक्रमित को घर से लाकर अस्पताल में भर्ती करने वाले विभाग के कर्मचारी व एंबुलेंस चालक के लिए पीपीई किट अनिवार्य है। सैंपलिग एवं इलाज के दौरान संक्रमित के संपर्क में आने आने से पीपीई किट में भी कोरोना का संक्रमण हो जाता है। यदि इसे सुरक्षित तरीके से नहीं उतारा जाए, तो स्वास्थ्यकर्मी के संक्रमण की चपेट में आने की आशंका रहती है। पीपीई किट, ग्लब्स व मास्क को डिस्पोज करने के लिए अलग से व्यवस्था होना चाहिए। इन्हें जहां-तहां फेंक रहे हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। वर्जन.

इस संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। यदि मेरे आवास के पास पीपीई किट खुले में पड़ी हैं, तो उन्हें उठवाया जाएगा और खुले में पीपीई किट, मास्क और ग्लव्स फेंकने वालों को जवाब तलब जाएगा। – डॉ. रणदीप सिंह पूनिया, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।

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Author: Bureau

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