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आनन्द कुमार
Bureau | May 20, 2020 | 0 Comments

Biography of Anand Kumar an Indian Mathematics Educator

बिहार के जाने-माने शिक्षक एवं विद्वान श्री आनन्द कुमार की जीवनी

श्री आनन्द कुमार बिहार के जाने-माने शिक्षक एवं विद्वान हैं। बिहार की राजधानी पटना में सुपर-३० नामक आईआईटी कोचिंग संस्थान के जन्मदाता एवं कर्ता-धर्ता है। वह रामानुज स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स नामक संस्थान का भी संचालन करते हैं। आनंद कुमार सुपर-30 को इस गणित संस्थान से होने वाली आमदनी से चलाया जाता है। आनन्द कुमार की प्रसिद्धि सुपर-३० की अद्वितीय सफलता के लिए है। वर्ष २००९ में पूर्व जापानी ब्यूटी क्वीन और अभिनेत्री नोरिका फूजिवारा ने सुपर 30 इंस्टीट्यूट पर एक डाक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई थी। इसी वर्ष नेशनल जियोग्राफिक चैनल द्वारा भी आनंद कुमार के सुपर ३० का सफल संचालन एवं नेतृत्व पर डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाई गई थी।

आनंद कुमार का जन्म 1 जनवरी, 1973 को बिहार के पटना में हुआ था, एक निचला वर्ग परिवार में। उनके पिता भारत के डाक विभाग में एक क्लर्क थे, जो पुत्र की निजी स्कूली शिक्षा नहीं दे सकते थे। अनैच्छिक रूप से आनंद ने एक हिंदी माध्यम सरकारी स्कूल में भर्ती कराया। उन्होंने उस समय के दौरान गणित में अपनी गहरी रुचि विकसित की.

उन्होंने Mathematical Spectrum और The Mathematical Gazette में प्रकाशित किए गए क्रम के दौरान संख्या सिद्धांतों के आधार पर कुछ नोट बनाए। इस बीच, उन्होंने Cambridge University में प्रवेश प्राप्त किया, लेकिन अपने वित्तीय संकट और पिता की मृत्यु के कारण इसमें शामिल नहीं हो सके।

प्रोफेसर आनंद कुमार (Anand Kumar) वर्ष 2001 में सुपर-30 (Super 30) की स्थापना की और गरीब बच्चों को आईआईटी की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने लगे. Super 30 में कुल ३0 बच्चो का सिलेक्शन होता है। ये संस्थान IIT entrance की तयारी करवाता है. इस संस्थान Math, Physics and chemistry ये तीनो विषयो का पढाई कराया जाता है.

इस प्रोफेसर संस्थान का संचालना खुद आनंद कुमार (Anand Kumar करते है . इस संस्थान का रिकार्ड रहा है की हर साल सुपर 30 से ३० से २८ बच्चे IIT qualified करते है. यही इस संस्थान का खासियत है जिससे इसे सुपर 30 कहा जाता है । सुपर 30 [Super 30] जबसे बना है बिहार के बच्चो का शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ रहा है। वर्तमान में सुपर 30 में अब तक 330 बच्चों ने दाखिला लिया है, जिसमें से 281 छात्र की प्रवेश परीक्षा (IIT Entrance Exam) में पास हुए हैं. शेष इंजीनियरिंग संस्थान में पहुंचे हैं. आनंद कुमार सुपर-30 (Anand Kumar super 30) को इस गणित संस्थान से होने वाली आमदनी से चलाया जाता है। आनन्द कुमार की प्रसिद्धि सुपर-३० की अद्वितीय सफलता के लिए है। वर्ष 2009 में पूर्व जापानी ब्यूटी क्वीन और अभिनेत्री नोरिका फूजिवारा ने सुपर 30 इंस्टीट्यूट [super 30 institute] पर एक डाक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई थी। इसी वर्ष नेशनल जियोग्राफिक चैनल द्वारा भी आनंद कुमार के सुपर ३० का सफल संचालन एवं नेतृत्व पर डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाई गई थी।

सुपर 30 कोचिंग सेंटर के लिए सरकार का समर्थन है। जब उनका कोचिंग सेंटर धीरे धीरे बढ़ रहा था तो कई कंपनियां विज्ञापन के लिए आती रही., लेकिन आनंद कुमार हमेशा की तरह मना कर देते हे। आनंद संस्थान के लिए और विकास की इच्छा और केंद्र के पीछे की लागत के रूप में ज्यादा वह एक अन्य संस्थान में ट्यूशन देकर कमाते हैं।

2010 में, Time Magazine ने आनंद कुमार को सुपर 30 कार्यक्रम को सर्वश्रेष्ठ एशियाई संस्था के रूप में सम्मानित किया। उन्होंने भारत सरकार द्वारा कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों को सम्मानित किया और सुपर 30 को पूर्व United States के राष्ट्रपति बराक ओबामा से प्रशंसा मिली।

पुरस्कार –

उन्हें भारत सरकार से भी कई सारे प्रतिष्टित पुरस्कार भी मिल चुके है और उनके इस सुपर 30 अभियान के लिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी आनंद कुमार की तारीफ़ की थी।

आनंद कुमार के इस ‘सुपर 30’ अभियान पर मार्च 2009 में डिस्कवरी चैनल पर एक घंटे की डाक्यूमेंट्री भी दिखाई गयी थी। उनकी इस जबरदस्त कहानी को ‘द न्यू यॉर्क टाइम्स’ में भी प्रकाशित किया गया था।

गरीब बच्चो को आईआईटी-जेईई की कोचिंग देने के लिए उनका नाम सन 2009 में लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में भी शामिल किया गया है। उनका जो सुपर 30 अभियान था उसे ‘टाइम’ मैगज़ीन में ‘बेस्ट ऑफ़ एशिया 2010’ की सूची में भी शामिल किया गया था।

2010 में उन्हें इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड डॉक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंसेज (आईआरडीएस) की तरफ़ से ‘रामानुजन अवार्ड’ दिया गया था।

भारत में ही उन्हें राजकोट के आठवे राष्ट्रीय गणित सम्मलेन में रामानुजन गणित पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। मध्य प्रदेश सरकार ने भी उन्हें महर्षि वेद व्यास पुरस्कार से सम्मानित किया था और उन्हें कर्पगम यूनिवर्सिटी से डी एस सी की डिग्री भी दी गयी थी।

परदेश में भी उन्हें ब्रिटिश कोलम्बिया सरकार, कनाडा और जर्मनी के सैक्सनी शिक्षा मंत्रालय की तरफ़ से भी उन्हें सम्मानित किया गया है।

आईआईएफए, राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार जितने वाले निर्देशक विकास बहल ने मई 2016 में यह घोषित कर दिया था की गणितज्ञ आनंद कुमार के जीवन पर एक फ़िल्म बन रही है। इस फ़िल्म का निर्माण प्रीति सिन्हा करने वाली है और इस फ़िल्म की ज्यादातर शूटिंग पटना में ही की जाएगी और इस फ़िल्म में सुपरस्टार ह्रितिक रोशन नजर आएंगे।

हमारे देश ने दुनिया को कई सारे महान व्यक्ति दिए है। उन्होंने अपने अपने क्षेत्र में काफी बड़ा योगदान दिया है। किसी ने कला और साहित्य को बढ़ाने का काम किया तो किसीने खेल के क्षेत्र मे देश का नाम रोशन किया है।

पढ़ाई का माध्यम नहीं, इच्छाशक्ति महत्वपूर्ण है : आनंद कुमार

सुपर 30 के संस्थापक और हजारों-लाखों स्टूडेंट की प्रेरणा आनंद कुमार को जब 1994 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिला तो मानो सपना सच हो गया, लेकिन जब हकीकत से रूबरू हुए तो पता चला कि सिर्फ एडमिशन मिलना ही काफी नहीं है, बल्कि पैसा भी बहुत महत्वपूर्ण है।

आनंद कुमार के परिवार के पास फीस तो दूर, कैम्ब्रिज जाने के टिकट के भी पैसे नहीं थे, आखिरकार उन्हें सीट छोड़नी पड़ी। उस समय भले ही आनंद कैम्ब्रिज नहीं जा पाए, लेकिन आज आनंद कुमार की कोचिंग ‘सुपर 30’ से 100 प्रतिशत स्टूडेंट इंजीनियरिंग एंट्रेंस में सफल होकर बड़े कॉलेजों में न केवल दाखिला ले रहे हैं बल्कि आज उनके कई स्टूडेंट विदेशों में उच्च पदों पर हैं।

आखिर क्या रही है आनंद कुमार की प्रेरणा : छोटे शहर, कस्बों, गांव के स्टूडेंट को इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले आनंद कुमार की कैम्ब्रिज न जाने पाने की टीस ही उनकी प्रेरणा बनी और आज वे ‘प्रतिभाशाली’ गरीब बच्चों को अपनी ‘जादुई’ कोचिंग में प्रतिष्ठित और अत्यंत मुश्किल इंजीनियरिंग एंट्रेंस एक्जाम की सफल तैयारी करवाते हैं।

सुपर 30 की सफलता की कहानी तो सभी को पता है लेकिन हर सफलता के पीछे कई मुश्किलें भी होती हैं। आइए जानते हैं आनंद कुमार के जीवट व्यक्तित्व के बारे में, जिन्होंने दूसरों के सपनों को अपना सपना बना लिया।

मजबूरी को बनाया ताकत : दरअसल आनंद कुमार को कैम्ब्रिज न जा पाने की टीस थी और इसी दौरान उनके पिता का देहांत हो गया। उन्हें सरकार की ओर से क्लर्क के पद पर अनुकंपा नियुक्ति का प्रस्ताव मिला, लेकिन वे कुछ अलग करने की ठान चुके थे। मां ने भी मनोबल बढ़ाया। मां घर पर पापड़ बनाती थीं जिससे घर का खर्च चलता।

कैसे हुई सुपर 30 की स्थापना : 1992 में आनंद कुमार ने 500 रुपए प्रतिमाह किराए से एक कमरा लेकर अपनी कोचिंग शुरू की। यहां लगातार छात्रों की संख्या बढ़ती गई। 3 साल में लगभग 500 छात्र-छात्राओं ने आनंद कुमार के इंस्टीट्यूशन में दाखिला लिया।

याद आया अपना सपना : सन् 2000 की शुरुआत में एक गरीब छात्र आनंद कुमार के पास आया, जो IIT-JEE करना चाहता था, लेकिन फीस और अन्य खर्च के लिए उसके पास पैसे नहीं थे। इसके बाद 2002 में आनंद कुमार ने सुपर 30 प्रोग्राम की शुरुआत की, जहां गरीब बच्चों को IIT-JEE की मुफ्त कोचिंग दी जाने लगी।

हिन्दी माध्यम के सफल स्टूडेंट : आनंद कुमार बताते हैं कि पिछले 3 साल से उनके 30 में से 30 ही स्टूडेंट सफल हो रहे हैं, जिनमें से 27 बच्चे हिन्दी माध्यम से पढ़े हैं। आनंद कहते हैं कि जो फिजिक्स, मैथ्स, कैमिस्ट्री समझ सकता है वह अंग्रेजी भाषा तो आसानी से समझ सकता है। असली चीज इच्छाशक्ति है, उससे ही सफलता मिलती है।

सफलता का गूढ़ मंत्र : आनंद कहते हैं, ‘भाषा ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण है विषय का ज्ञान और उस ज्ञान को प्राप्त करने की योग्यता। लीड लेने के लिए स्टूडेंट, खासतौर पर छोटे शहरों से आने वालों के लिए यह आवश्यक है कि वे टेक्स्ट बुक लगातार पढ़ते रहें, रटने के बजाय विषय को गहराई से समझें।

अंग्रेजी की बाध्यता को लेकर वे कहते हैं, सरकार को भी पिछड़े इलाकों में जिला स्तर पर अंग्रेजी सिखाने की संस्थाएं खोलनी चाहिए, जिससे कि अंग्रेजी के प्रति यहां के बच्चों की झिझक मिट सके।
उन्होंने अंग्रेजी सीखने की महत्ता बताते हुए कहा कि हालांकि हमारे जीवन में अंग्रेजीयत नहीं आनी चाहिए लेकिन हमें संवाद के स्तर पर इस भाषा का ज्ञान होना आवश्यक है।

छोटे शहरों का बड़ा फायदा : आनंद कुमार कहते हैं कि अगर छोटे शहरों में सुविधाएं अपेक्षाकृत कम हैं तो यहां भटकाव भी कम है। वे कहते हैं कि छोटे शहरों में बहुत संभावनाएं हैं, आवश्यकता है तो सिर्फ इनकी प्रतिभा को निखारने की।

बड़ा सवाल – इंजीनियरिंग के बाद भी बेरोजगार क्यों : देशभर में बेतहाशा इंजीनियरिंग कॉलेज खुल गए हैं, यहां स्टूडेंट डिग्री तो ले लेते हैं, लेकिन उनके लिए रोजगार नहीं है। इस विषय में आनंद कुमार कहते हैं, ‘गुमनाम कॉलेजों से इंजीनियरिंग करने वाले 80 प्रतिशत स्टूडेंट में वह काबिलियत नहीं है कि वे सिर्फ अपनी डिग्री के दम पर नौकरी पा सकें।

कुछ साल पहले भारत में सॉफ्टवेयर क्रांति आई और सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की बड़ी संख्या में मांग बढ़ी, लेकिन अब यह मांग पूरी हो चुकी है, इसलिए बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग करने वाले नौकरी नहीं हासिल कर पा रहे। इसके अलावा अब बैंकिंग, फायनेंस, लॉ जैसे क्षेत्रों में भी संभावनाएं बढ़ी हैं, जिससे इंजीनियरिंग के प्रति स्टूडेंट का क्रेज उतना नहीं रह गया है।

वर्तमान में भारत में जहां एक ओर आईआईटी और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला दिलाने के नाम पर कई कोचिंग संस्थाएं लाखों रुपए फीस के तौर पर ले रही हैं, वहीं ‘सुपर 30’ के शानदार सिलेक्शन रिकॉर्ड के जरिए आनंद कुमार जैसे कुछ लोग साबित करने में लगे हैं कि…

‘ऐसा नहीं कि खुश्क है चारों तरफ ज़मीन
प्यासे जो चल पड़े हैं तो दरिया भी आएगा’

आनंद कुमार से जब पूछा गया कि सुपर 30 का नाम सुपर 30 ही क्यों रखा गया, 40 या 50 क्यों नहीं. तो इस पर उन्होंने बताया कि जो बच्चे सुपर 30 में पढ़ाई कर रहे हैं उनका रहने का खर्च हम ही लोग उठाते हैं और बच्चों का खाना मेरी मां बनाती हैं. उन्होंने कहा उस समय आमदनी इतनी नही थी.

आनंद ने बताया कि सुपर 30 को चलाने के लिए आज तक किसी भी तरह का चंदा नहीं लिया. हमारी टीम शाम को कुछ ऐसे बच्चों को ट्यूशन देती है जो फीस दे सकते हैं. उन्हीं पैसों से बच्चों की पढ़ाई और उनके खाने का खर्चा उठाया जाता है. उन्होंने बताया देश के “प्रधानमंत्री, अंबानी, मुख्यमंत्री समेत कई बड़े- बड़े लोगों ने कहा की करोड़ों रुपये चंदा ले लो लेकिन आज तक हमने कभी किसी से 1 रुपये चंदा नहीं लिया है”.

आनंद ने कहा ये सफर आसान नहीं था. इस दौरान हमें कई माफियाओं से भी जूझना पड़ा. कई बार माफिया लोगों ने हमारे ऊपर हमला किया. कई केस मुकदमे में फंसाने की कोशिश की. जिसकी वजह से हमारे निर्दोष सहयोगी को तीन महीने की जेल भी हुई. बाद में जब बिहार पुलिस ने कार्यवाही की तो उसमें वह निर्दोष साबित हुए. यहीं नहीं मेरे भाई पर भी हमला किया गया.

उन्होंने कहा है ये वहीं लोग है जो नहीं चाहते “राजा का बेटा राजा नहीं बल्कि हकदार ही राजा बने”.उन्होंने बताया सबसे ज्यादा खुशी मुझे उस दिन होती है जब मालूम चलता है कि ऑटो ड्राइवर की बेटी, ईंट भट्टी में काम करने वाले के बच्चे जेईई परीक्षा में सफल हो गए हैं. उस समय गर्व महसूस होता है

आनंद कुमार से पूछा गया कि जब शोहरत मिलती है तो कैसे आप खुद को लाइमलाइट से दूर रख पाते हैं. इस पर उन्होंने जवाब दिया “सिंपल तरीके से रहना हमारी मजबूरी है हम चाहकर भी कोर्ट टाई पहनेंगे तो कंफर्टेबल नहीं रहेंगे”. इसलिए हम आराम से रहते हैं बेफिक्र रहते हैं. उन्होंने कहा जब इंसान दिखावे से दूर हटता है जो उसका मन काम में लगता है. उन्होंने कहा दिखावे से दूर रहे हैं और क्वालिटी काम करें. क्योंकि इंसान अपने काम से पहचाना जाता है.

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Author: Bureau

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