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Mehul Choksi, RBI
Bureau | April 28, 2020 | 0 Comments

Banks technically write off loans worth over Rs 68,000 crore, including to Mehul Choksi’s firms: RTI

कांग्रेस का दावा, मोदी सरकार ने नीरव-चोकसी जैसे 50 घोटालेबाजों का 68,607 करोड़ का कर्ज माफ किया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक आरटीआइ में स्वीकार किया है कि उसने शीर्ष 50 विलफुल डिफॉल्टर्स के 68,607 करोड़ की बड़ी रकम बट्टा खाते में डाल दी है। इन विलफुल डिफॉल्टर्स में भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी का भी नाम है। एक आरटीआइ कार्यकर्ता ने बताया कि यह बकाया इन कर्जदारों के इस वर्ष 16 फरवरी की लोन स्थिति के हिसाब से है। आरटीआइ कार्यकर्ता का कहना था कि इस वर्ष 16 फरवरी को संसद में पूछे गए इसी से संबंधित सवाल का सरकार ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया था, जिसके बाद आरटीआइ के माध्यम से आरबीआइ से इसका जवाब मांगा।

आरबीआइ के जवाब के मुताबिक कर्ज की यह रकम 30 सितंबर, 2019 के आधार पर है, जिसे बट्टा खाते में डाला गया। हालांकि, आरबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए विदेशी कर्जदारों के बारे में जानकारी देने से इन्कार कर दिया। बहरहाल, आरबीआइ की इस सूची में सबसे ऊपर मेहुल चोकसी द्वारा नियंत्रित कंपनी गीतांजलि जेम्स लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनियों जिली इंडिया लिमिटेड और नक्षत्र ब्रांड्स लिमिटेड के नाम हैं। इन कंपनियों पर संयुक्त रूप से करीब 8,100 करोड़ बकाया है। सूची में संदीप झुनझुनवाला और संजय झुनझुनवाला की डायरेक्टरशिप वाली कंपनी आरईआइ एग्रो का भी नाम है, जिस पर 4,314 करोड़ बकाया है।

आरबीआइ की इस विलफुल डिफॉल्टर्स की सूची में कई हीरा कारोबारी हैं, जिनमें एक अन्य भगोड़े हीरा कारोबारी जतिन मेहता की कंपनी विन्सम डायमंड्स एंड ज्वैलरी का 4,076 करोड़ बट्टा खाते में डाला गया है। सूची में तीन हजार करोड़ रुपये से कम के कर्ज मामलों में रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड (2,850 करोड़ रुपये), पंजाब की कुडोस केमी (2,326 करोड़ रुपये), इंदौर की रुचि सोया इंडस्ट्रीज (2,212 करोड़ रुपये) और ग्वालियर की जूम डेवलपर्स (2,012 करोड़ रुपये) जैसे नाम हैं। वहीं, 2,000 करोड़ रुपये से कम के मामलों में 18 कंपनियों के कर्ज को आरबीआइ ने बट्टा खाते में डालने की मंजूरी दी है।

RBI ने 68,000 करोड़ रुपये के कर्ज को बट्टा खाते में डाला, मेहुल चोकसी समेत इन कर्जदारों के नाम हैं शामिल

कांग्रेस का दावा है कि 14 अप्रैल को एक आरटीआई के जवाब में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश के 50 सबसे बड़े बैंक घोटाला करने वाले लोगों का 68,607 करोड़ रुपये माफ करने की बात स्वीकार की है। इस सूची में भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसों के नाम भी शामिल हैं। 

वहीं, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस मामले में केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। राहुल ने कहा कि कुछ सप्ताह पहले संसद में उनके सवाल का जवाब न देकर इसी सच को छिपाया गया था। उन्होंने ट्वीट किया, ‘संसद में मैंने एक सीधा सा प्रश्न पूछा था- मुझे देश के 50 सबसे बड़े बैंक चोरों के नाम बताइए। वित्त मंत्री ने जवाब नहीं दिया।’  

उन्होंने दावा किया कि अब रिजर्व बैंक ने नीरव मोदी, मेहुल चोकसी सहित भाजपा के ‘मित्रों’ के नाम बैंक चोरों की लिस्ट में डाले हैं। इसीलिए संसद में इस सच को छिपाया गया।’ गौरतलब है कि संसद के बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी ने कर्ज अदा नहीं करने वाले 50 सबसे बड़े चूककर्ताओं के नाम पूछे थे। इस पर सरकार ने कहा था कि केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) की वेबसाइट पर सारे नाम दिए जाते हैं और ये नाम वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

Banks technically write off loans worth over Rs 68,000 crore, Mehul Choksi among 50 top wilful defaulters: RTI

Indian banks have technically written off a staggering amount of Rs 68,607 crore due from 50 top wilful defaulters, including absconding diamantaire Mehul Choksi, according to a reply under RTI from the Reserve Bank of India (RBI).

Prominent RTI activist Saket Gokhale had filed an RTI query seeking details of the 50 Top Wilful Defaulters and their current loans status till February 16.

“I filed this RTI because Finance Minister Nirmala Sitharaman and Minister of State for Finance Anurag Thakur had refused to reply to this starred question asked in the Parliament by Congress MP Rahul Gandhi in the last Budget Session on February 16,” Gokhale told IANS.

Disclosing what the government didn’t, the RBI’s Central Public Information Officer Abhay Kumar provided the replies on Saturday (April 24), with several startling revelations in the ‘diamond-studded list’, said Gokhale.

An inadvertent error had crept in a previous version of the report, which has now been now corrected.

“The apex bank also declined to provide the relevant information on overseas borrowers citing a Supreme Court judgement of December 16, 2015,” Gokhale told IANS.

Topping the list is Choksi’s scam-hit company, Gitanjali Gems Limited, which owed Rs.5,492 crore, besides other group companies, Gili India Ltd and Nakshatra Brands Ltd, which had taken loans of Rs 1,447 crore and Rs 1,109 crore, respectively.

Choksi is currently a citizen of Antigua & Barbados Isles, while his nephew and another absconder diamond trader Nirav Modi is in London.

The second in the list is REI Agro Ltd., with an amount of Rs 4,314 crore, and its directors Sandip Jhujhunwala and Sanjay Jhunjhunwala who are already under the scanner of the Enforcement Directorate (ED) since over a year.

The next on the list in the Rs 4,000-crore bracket is absconding diamantaire Jatin Mehta’s Winsome Diamonds & Jewellery owing Rs 4,076 crore and which is being probed by the Central Bureau of Investigation for various bank frands.

In the Rs 2,000-crore category, there is the Kanpur-based writing instruments giant, Rotomac Global Pvt. Ltd., part of the famed Kothari group, which owed Rs 2,850 crore.

The others in this category include: Kudos Chemie, Punjab (Rs.2,326 crore), Baba Ramdev and Balkrishna’s group company Ruchi Soya Industries Ltd., Indore (Rs.2,212 crore), and Zoom Developers Pvt. Ltd., Gwalior (Rs.2,012 crore).

There are 18 companies in the Rs.1K-segment with some prominent names like Harish R. Mehta’s Ahmedabad-based Forever Precious Jewellery & Diamonds Pvt. Ltd. (Rs.,1962 crore), and absconder liquor baron Vijay Mallya’s defunct Kingfisher Airlines Ltd. (Rs 1,943 crore).

Another 25 companies fall in the sub-1K-crore category with outstandings ranging from Rs 605 crore to Rs 984 crore, either individually or as group companies.

Six among the 50 top wilful defaulters are connected with the glittering diamond and/or gold jewellery industries.

“A majority of them have defaulted prominent nationalist banks over the past several years and many of them are either absconding or facing action by various probe agencies and some are under litigation,” Gokhale said.

Bureau
Author: Bureau

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