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Akhilesh Yadav
Bureau | May 7, 2020 | 0 Comments

Akhilesh Yadav says about Yogi Government of giving jobs to labour

श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराने का भाजपा सरकार का दावा धोखा : अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर से बीजेपी पर जोरदार हमला बोला है. बीजेपी पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि झूठ के पैर नहीं होते है. इस कहावत का सच जगजाहिर है, पर बीजेपी को इस पर यकीन नहीं है. यही वजह है कि बीजेपी सरकार और उसके प्रवक्ताओं के झूठे दावों का सच सामने आने में देर नहीं लगती है. कोरोना संकट के दौर में स्थानीय बेरोजगारों और बाहर से आने वाले मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने के बीजेपी के दावे धोखे साबित हो रहे हैं.

अखिलेश यादव ने कहा कि सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की रिपोर्ट बताती है कि 3 मई 2020 तक बेरोजगारी दर बढ़कर 27.1 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि मार्च 2020 में यह 8.74 प्रतिशत थी. देश में 24.95 फीसदी मजदूरों के पास कोई काम नहीं है. फिर रोजगार किसे और कहां मिल रहा है? क्या बीजेपी ने भ्रमित करने का ठेका ले रखा है?

सीएम योगी पर निशाना साधते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर के श्रमिकों ने ही बताया कि भिवंडी से गोरखपुर लाने के लिए उनसे 745 रुपये ट्रेन का किराया वसूला गया. बीजेपी सरकार उत्तर प्रदेश के श्रमिकों को बाहर से मुफ्त वापस लाने का दावा करते नहीं थकती है, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है. श्रमिकों के साथ यह धोखा शर्मनाक है. प्रदेश के अन्य जनपदों के श्रमिक भी अपनी टिकटें दिखा रहे हैं. लोग कह रहे है कि अगर ये रेल टिकट नहीं है, तो क्या बंधक श्रमिकों को छोड़ने पर ली गई फिरौती की सरकारी रसीद है? देशभर के मजदूरों को लग रहा है कि अब वो बीजेपी सरकार के बंधक बन गए हैं.

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि यह कहावत जगजाहिर है कि झूठ के पैर नहीं होते पर भाजपा को इस पर यकीन नहीं। इसलिए भाजपा सरकार व उसके प्रवक्ताओं के झूठे दावों का सच सामने आने में भी देर नहीं लगती है। कोरोना संकट के दौर में स्थानीय बेरोजगारों और बाहर से आने वाले श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराने के भाजपा के दावे भी धोखे साबित हो रहे हैं।

अन्य जिलों के मजदूर भी दिखा रहे टिकट

प्रदेश के अन्य जिलों के मजदूर भी अपना टिकट दिखा रहे हैं। लोग कह रहे है कि अगर ये रेल टिकट नहीं है तो क्या बंधक श्रमिकों को छोड़ने पर ली गई फिरौती की सरकारी रसीद है ? उन्होंने कहा कि संकट के समय मजदूर भावनात्मक रूप से अपने घर और घर वालों से दूरी महसूस कर रहे हैं।

उन्हें अपने गांव-घर में ही सुरक्षा की उम्मीद है। वे जहां निराश्रित और बेरोजगार होकर पड़े है, वहां से जल्दी से जल्दी निकलना चाहते है। संवेदनहीन सरकार इनकी पुकार कब सुनेगी?

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Author: Bureau

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