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Musing India | August 22, 2020 | 0 Comments

181 women helpline shutdown in Uttar Pradesh

यूपी में 181 महिला हेल्पलाइन बंद होने से सैकड़ों महिलाएं सड़क पर, बकाए वेतन और वैकल्पिक नौकरी के लिए हैं परेशान

बकाया वेतन पाने और वैकल्पिक नौकरी की मांग को लेकर पिछले छह दिन से धरने पर हैं महिलाएं     
यह योजना घरेलू महिला हिंसा विरोधी कानून के सेक्शन (1) और (10) के तहत बनाई गई थी

सीमा भारती उत्तर प्रदेश की 181 महिला हेल्पलाइन में काम किया करती थी। चौबीसों घंटे की इस नौकरी में उन्हें महिलाएं मदद के लिए कॉल किया करती थीं। फोन आने के बाद दिन हो या रात, वे तुरंत अपनी टीम के साथ महिला की मदद के लिए पहुंचती थीं और उन्हें आवश्यक मदद मुहैया कराती थीं।

लेकिन पिछले तीन महीने से उनके पास कोई काम नहीं है। आरोप है कि सिर्फ एक सूचना पर यह सेवा बंद कर दी गई और उनके जैसी सैकड़ों महिलाएं बेरोजगार हो गई हैं। यह सब ऐसे समय में हुआ है, जब सरकार कोरोना काल में पीड़ितों की सहायता के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा कर रही थी।
 
सीमा भारती ने अमर उजाला को बताया कि इससे भी बड़ी परेशानी की बात यह है कि उनके इस काम के लिए पिछले एक साल से उन्हें कोई वेतन भी नहीं दिया गया है। इस वेतन को पाने के लिए, और उन्हें कोई अन्य वैकल्पिक नौकरी देने के लिए उनके साथी पिछले छह दिन से उत्तर प्रदेश सरकार के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से मदद का कोई आश्वासन नहीं मिला है। आरोप यहां तक है कि आर्थिक तंगी के चलते 181 सेवा में उन्नाव जिले में काम कर चुकी कानपुर की एक महिला आयुषी सिंह गत चार जुलाई को आत्महत्या तक कर चुकी हैं।

महिलाओं को भीख मांगने के लिए सड़क पर छोड़ा

वर्कर्स फ्रंट के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर ने बताया कि एक तरफ तो सरकार गरीब मजदूरों, महिलाओं की सहायता करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों महिलाओं को एक झटके में सड़क पर भीख मांगने के लिए छोड़ दिया गया। अब इन महिलाओं के पास अपने परिवार को चलाने के लिए कोई विकल्प नहीं मिल सका है।

उन्होंने बताया कि इसी प्रकार महिला समाख्या योजना को भी बिना किसी सूचना के बंद कर दिया गया। इसमें भी लगभग 850 महिला कर्मचारी काम किया करती थीं, लेकिन इन्हें भी पिछले 20 महीनों से कोई वेतन नहीं दिया गया है।
 
राज्य सरकार ने यूपी में एम्बूलेंस सेवा को भी एक प्राइवेट एजेंसी (GVKEMRI) को सौंप रखा है। इसी एजेंसी को ‘रानी लक्ष्मी बाई आशा ज्योति 181 महिला हेल्प लाइन’ सेवा को भी सौंप दिया गया था। लेकिन लगातार फंड न मिलने की आड़ में अब इस योजना को बंद कर दिया गया है। इस मुद्दे पर सरकार की तरफ से कोई पक्ष नहीं मिल पाया है।
 
यह योजना घरेलू महिला हिंसा विरोधी कानून के सेक्शन (1) और (10) के तहत बनाई गई थी। इसकी शुरुआत यूपी में 11 जिलों के साथ की गई थी, इसकी उपयोगिता देखने के बाद राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में लागू कर दिया था।

मिले वैकल्पिक रोजगार

जानकारी के मुताबिक महिलाओं के कड़े विरोध को देखते हुए शुक्रवार को 6.96 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिससे बकाए वेतन का भुगतान किया जा सकेगा। लेकिन वर्कर्स फ्रंट का कहना है कि केवल बकाया वेतन देना पर्याप्त नहीं है। कोरोना के इस संकट काल में सरकार को महिलाओं के लिए वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए।
 
अब महिलाओं के लिए कोई अलग व्यवस्था नहीं है। अब 181 नंबर पर फोन करने के बाद यह सामान्य पुलिस सेवा को ही फोन ट्रांसफर कर दिया जाता है और उन्हीं के जरिए महिलाओं को समस्या का समाधान हो पाता है। हालांकि, महिला मामलों के विशेषज्ञ इसे सही कदम नहीं मान रहे हैं।

महिला ही सुने महिला की बात

मेरा हक फाउंडेशन की चेयरपर्सन फरहत नकवी कहती हैं कि महिलाओं की समस्या केवल आपराधिक समस्याएं नहीं होतीं। ज्यादातर मामलों में यह सामाजिक संबंधों और मानसिक समस्याओं का एक बेहद जटिल मिश्रण होता है। महिलाएं अपनी समस्याएं पुरुष पुलिसकर्मियों को नहीं बता पाती हैं।

ऐसे में 181 की योजना बेहद कारगर योजना है और यह काफी सफलतापुर्वक काम भी कर रही थी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के संवेदनशील मुद्दों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सरकार को इस योजना को तत्काल शुरू करना चाहिए और बकाये वेतन का भुगतान भी जल्द से जल्द किया जाना चाहिए।

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Author: Musing India

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