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ग्रेटर फरीदाबाद
Bureau | February 25, 2022 | 0 Comments

10th class student commits suicide by jumping from 15th floor in Greater Faridabad

ग्रेटर फरीदाबाद की सोसायटी में 10वीं कक्षा के छात्र ने 15वीं मंजिल से कूदकर दी जान

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा के ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर-80 की डिस्कवरी सोसायटी में 10वीं कक्षा के 16 वर्षीय छात्र ने अपनी सोसायटी की 15वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। आरवी मल्होत्रा नाम का यह छात्र यहां सोसायटी में अपनी मां आरती मल्होत्रा के साथ रहता था।

सुसाइड नोट में बताई वजह

साल 2007 में उसकी मां का तलाक हो गया था। तब से वह मां के साथ ही रह रहा था। आरवी मल्होत्रा ग्रेटर फरीदाबाद के एक निजी स्कूल का छात्र था। उसकी मां ने एक सुसाइड नोट भी पुलिस को सौंपा है। छात्र की मां ने बताया कि स्कूल में बच्चे उसके बेटे को चिढ़ाते थे।

इस कारण वह पिछले करीब आठ महीने से डिप्रेशन में था। अब वह धीरे-धीरे ठीक हो रहा था। सुसाइड नोट में उसने स्कूल प्रबंधन पर भी सुनवाई न करने के आरोप लगाए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

सुसाइड नोट में छात्र ने लिखा है कि स्कूल ने मुझे मार दिया है। इसी का संज्ञान लेते हुए पुलिस ने स्कूल की प्रिंसिपल और मैनेजमेंट के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है।

गुरुवार रात की आत्महत्या

बच्चे की मां भी उसी स्कूल में टीचर है जहां छात्र पढ़ता था। मां ने आरोप लगाया है कि गुरुवार रात 9.00 बजे उनका बेटा घर में अकेला था उसी समय उसने सोसायटी की 15वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। वह स्कूल में चल रही प्रताड़ना से डिप्रेशन में था और बीते एक साल से दिल्ली में उसकी प्रोफेशनल काउंसलिंग चल रही थी।

बीपीटीपी थाने में दर्ज कराई शिकायत में मां ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे ने उन्हें एक साल पहले बताया था कि दूसरे बच्चे उसे होमोसेक्शुअल बुलाते हैं। बच्चे ने अपनी मां के नाम एक भावुक सुसाइड नोट भी लिखा है जिसमें उसने अपनी मां से माफी मांगी है और दुनिया के सवालों से निडर रहने के लिए कहा है। उसने लिखा है कि आप इस ग्रह की सबसे अच्छी मां हैं। इस स्कूल ने मुझे मार दिया खासतौर से हायर अथॉरिटी ने। इसमें उसने स्कूल की हेड मिस्ट्रेस का नाम लिखा है।

व्यवहार में परिवर्तन, कहीं बुलिग का शिकार तो नहीं है बच्चा

स्कूल में सहपाठियों द्वारा मस्ती, हंसी-ठिठोली व मजाक आम बात है। मगर जब यह हद से अधिक बढ़ जाए, किसी बच्चे को उसकी किसी कमजोरी, रंग-रूप, कद-काठी, व्यवहार के लिए चिढ़ाया जाने लगे तो इसे बुलिग कहते हैं। बुलिग का शिकार बच्चा कई बार आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लेता है। जैसा कि शुक्रवार की सुबह सेक्टर-80 स्थित डिस्कवरी सोसायटी में हुआ, जहां से डीपीएस ग्रेटर फरीदाबाद में दसवीं कक्षा में पढ़ने आरवी नामक छात्र ने 15वीं मंजिल से कूद कर जान दे दी।

स्कूल में बच्चों के साथ लड़ाई-झगड़े,मारपीट या फिर किसी साथी द्वारा परेशान करने को बुलिग कहते हैं। इसके अलावा बच्चों को अलग-अलग नामों से चिढ़ाना, उन पर चुटकुले बनाना और उनका मजाक उड़ाना भी बुलिग की श्रेणी में आता है। ऐसे में बच्चे डरे सहमे रहने लगते हैं और उनका आत्मविश्वास काफी कम हो जाता है। बुलिग को लेकर हमने सर्वोदय अस्पताल की मनो चिकित्सक डा.सविता सिंह से बातचीत की।

ये होते हैं बुलिग के लक्षण

अगर आपको शक है कि आपका बच्चा भी स्कूल में बुलिग का शिकार हो रहा है। तो कुछ लक्षणों पर गौर करके आप इसकी सच्चाई का पता लगा सकते हैं। बुलिग के शिकार बच्चों के व्यवहार में अचानक परिवर्तन आने लगता है। अनिद्रा, खाना न खाना, स्कूल न जाने की जिद करना, डरा-सहमा रहना, खेल और पढ़ाई में मन न लगना बुलिग के लक्षण होते हैं।

क्या करें अभिभावक

-अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा बुलिग का शिकार है, तो बिना देर किए सबसे पहले स्कूल अध्यापक को इस बात से अवगत कराएं। स्कूल प्रबंधन के साथ मिलकर समस्या का समाधान निकालें।

-कई बार बच्चों में बुलिग के चलते आत्मविश्वास की कमी हो जाती है। बच्चों को पौष्टिक खाना देने के साथ-साथ उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रखने के लिए शतरंज, डांस, मार्शल आर्ट जैसी चीजें सिखाएं।

-जरूरी नहीं है कि अगर आपका बच्चा बुलिग का शिकार हो तभी उसकी तरफ ध्यान दें। बच्चों को पहले से बुलिग जैसी घटनाओं से अवगत कराएं और उन्हें गुस्से पर नियंत्रण रखना भी सिखाएं। क्या करें शिक्षक

-अगर कक्षा में कोई बच्चा गुमसुम या अलग-थलग रहता है तो उससे प्यार से बात करें और वजह जानने का प्रयास करें। कहीं वह बुलिग का शिकार तो नहीं।

-बच्चा किसी अन्य बच्चे द्वारा चिढ़ाए जाने या छेड़खानी की शिकायत करता है तो उसे नजरअंदाज न करें। तुरंत उसे गंभीरता से लेकर उचित कार्रवाई करें।

-बुलिग करने वाले बच्चों को चिह्नित करें। उन्हें भी समझाए जाने की जरूरत है। उनके अभिभावकों को बुलाकर उनकी काउंसिलिग करें। क्या करे बच्चा

-अगर कोई बच्चा चिढ़ाता है या किसी तरह से खिचाई करता है तो बिना डरे या झिझके इसकी शिकायत अपने शिक्षक से करें।

-अगर शिक्षक ध्यान न दे तो अपने माता-पिता को जरूर बताएं।

-बुलिग को लेकर बच्चे को अंदर ही अंदर नहीं घुटना चाहिए। बुलिग करने वालों का सामना करना चाहिए।

बुलिग के शिकार बच्चे अक्सर स्कूल जाने से कतराने लगते हैं और स्कूल न जाने की जिद करते हैं। अगर आप जानते हैं कि आपका बच्चा बुलिग का शिकार है, तो उसे स्कूल जाने के लिए मजबूर न करें। ऐसे में बच्चे को कहीं बाहर घुमाने ले जा सकते हैं। कुछ दिनों तक आप खुद बच्चों को तय समय पर स्कूल छोड़ने और लेने जाएं। -डा.सविता सिंह, मनो चिकित्सक, सर्वोदय अस्पताल

अधिकतर स्कूल करते हैं काउंसलर के नाम पर खानापूरी

हर स्कूल को अपने यहां एक काउंसलर नियुक्त करना अनिवार्य होता है, ताकि बुलिग के शिकार या बुलिग करने वाले बच्चों की काउंसिलिग की जा सके। हर स्कूल में डिग्रीधारक व अनुभवी काउंसलर होना चाहिए। एमए साइकोलाजी के साथ-साथ मार्गदर्शन व काउंसिलिग के विविध कोर्स करने वाले काउंसलर शहर के सभी बड़े व नामी स्कूलों में नियुक्त हैं, पर अधिकतर स्कूल काउंसलर के नाम पर खानापूरी करते है। वे किसी भी शिक्षक को काउंसलर बना देते हैं। यह प्रवृति कई बार घातक साबित होती है।

इस तरह होती है साइबर बुलिग

साइबर बुलिग एक तरह से आनलाइन रैगिग है। यह इंटरनेट के माध्यम से होने वाला शोषण है। इसमें किसी को धमकी देना, उसके खिलाफ अफवाह फैलाना, भद्दे कमेंट व घृणास्पद बयानबाजी करना, अश्लील भाषा, फोटो का गलत इस्तेमाल आदि काम किए जाते हैं। आनलाइन गेम के जाल में फंसा कर रुपये ऐंठना भी बुलिग का नया प्रचलित तरीका है।

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Author: Bureau

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