अखिलेश बनाम शिवपाल

UP assembly speaker lets Samajwadi Party withdraw plea to disqualify Shivpal Yadav as MLA

शिवपाल यादव की सदस्यता रद्द करने की याचिका समाजवादी पार्टी ने ली वापस, चाचा-भतीजा में मुलाकात का दौर शुरू, क्या समाजवादी पार्टी में होगी वापसी?

समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) की विधायकी रद्द करने वाली विधानसभा में दायर याचिका वापस ले ली है. उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित (Hriday Narayan Dikshit) ने गुरुवार को समाजवादी पार्टी को इसके लिए मंजूरी दे दी.

दरअसल, समाजवादी पार्टी की तरफ से रामगोविंद चौधरी ने पहले जसवंतनगर से विधायक शिवपाल यादव ) की शिवपाल यादव की सदस्यता रद्द करने के लिए याचिका लगाई थी लेकिन चौधरी ने याचिका वापस लेने की दरखास्त दी थी.

समाजवादी पार्टी के आग्रह पर विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने गुरुवार को शिवपाल यादव की सदस्यता समाप्त करने के लिए दी गई याचिका को वापस कर दिया है. हालांकि, कोरोना संकट के दौर में चाचा-भतीजा की बीच कई मुलाकातें हो चुकी हैं. ऐसे में एक बार फिर सियासी चर्चा गरम है कि क्या शिवपाल यादव की सपा में घर वापसी होगी?

समाजवादी पार्टी से बगावत कर अपनी अलग प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) पार्टी बनाने वाले शिवपाल सिंह यादव की विधानसभा सदस्यता पर मंडरा रहा खतरा खत्म हो गया है. सपा के आग्रह पर विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने गुरुवार को शिवपाल की सदस्यता समाप्त करने के लिए दी गई याचिका को वापस कर दिया है. हालांकि, कोरोना संकट के दौर में चाचा-भतीजा की बीच कई मुलाकातें हो चुकी हैं. ऐसे में एक बार फिर सियासी चर्चा गरम है कि क्या शिवपाल यादव की सपा में घर वापसी होगी या नहीं?

बता दें कि समाजवादी पार्टी के नेता रामगोविंद चौधरी ने चार सितंबर, 2019 को दल परिवर्तन के आधार पर शिवपाल यादव की विधानसभा से सदस्यता समाप्त करने की याचिका दायर की थी. लेकिन बाद में सपा ने 23 मार्च को प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर शिवपाल यादव के खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई करने की याचिका वापस करने की मांग की. लॉकडाउन के चलते विधानसभा सचिवालय बंद रहने की वजह से इस पर फैसला नहीं हो सका था.

समाजवादी पार्टी के आग्रह को विधानसभा स्पीकर हृदयनारायण दीक्षित ने स्वीकार कर शिवपाल यादव की विधायकी पर मंडरा रहे खतरे को टाल दिया है. सपा की याचिका वापस लेने के समय को देखें तो सियासी कयासों को बल मिलता है. शिवपाल के करीबी की मानें तो कोरोना संकट के बीच चाचा-भतीजे के बीच कई दौर की बैठक हो चुकी हैं. पिछले दिनों मुलायम सिंह यादव जब लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती थे तो शिवपाल देखने गए थे. इस दौरान शिवपाल की मुलाकात भतीजे अखिलेश यादव से भी हुई थी और दोनों नेताओं ने काफी देर तक बंद कमरे में चर्चा की थी.

शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से गठबंधन करने की शर्त रख रहे हैं. इस बात को शिवपाल कई बार सार्वजनिक रूप से भी कह चुके हैं, लेकिन अखिलेश इस बात पर राजी नहीं है. हालांकि, समाजवादी पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव की भी यही कोशिश है कि शिवपाल और अखिलेश एक हो जाएं. इसके लिए अभी चंद दिनों पहले ही लखनऊ में चाचा-भतीजा को एक साथ उन्होंने बैठाया था.क्या 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले शिवपाल यादव एक बार फिर अखिलेश यादव के साथ आएंगे?

शिवपाल ने बनाई थी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी

बता दें कि समाजवादी पार्टी से बगावत कर पूर्व मंत्री शिवपाल यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) बनाई थी.

2016 में शुरू हुई थी तनातनी

बता दें यूपी विधानसभा चुनाव से पहले 2016 में यादव परिवार में महाभारत की शुरुआत हुई थी. बात इतनी बढ़ गई थी की अखिलेश ने समाजवादी पार्टी पर एकाधिकार कर लिया है. उसके बाद चुनाव में समाजवादी पार्टी की हार के बाद शिवपाल ने बयानबाजी शुरू कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने समाजवादी मोर्चे का गठन किया और फिर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) का गठन कर लिया. इस बीच अखिलेश और शिवपाल के बीच सुलह की कई कोशिशें हुईं, लेकिन सभी नाकाम साबित हुईं थी.

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