फरीदाबाद

There is no proper solution for disaster management in Greater Faridabad

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हरियाणा के ग्रेटर फरीदाबाद में आपदा प्रबंधन के कोई समुचित उपाय नहीं

ग्रेटर फरीदाबाद में आपातकालीन और प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए जिला प्रशासन के पास कोई पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। दो दिनों तक तूफान की आशंकाओं के बीच यहां के निवासियों ने भगवान का नाम लेते हुए अपने दिन बिताए।

उल्लेखनीय है कि औद्योगिक नगरी अलग हिस्सों में आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए अग्निशमन विभाग के कार्यालय बने हुए हैं, लेकिन ग्रेटर फरीदाबाद में इनका एक भी कार्यालय नहीं है। वैसे यहां पर अग्निशमन विभाग का कार्यालय बनाया जाना प्रस्तावित है। शायद सरकार और जिला प्रशासन किसी बड़ी हादसे का इंतजार कर रहा है। इसके अलावा अग्निशम विभाग के पास हाइड्रोलिक सीढि़यों वाली दमकल भी नहीं है। ऐसे में हाईराइज बि¨ल्डग में रहने वाले लोगों को सोसायटी में लगे उपकरणों से काम चलाना पड़ेगा।

बता दें कि करीब दो साल पहले गुरुग्राम से हाइड्रोलिक सीढि़यों वाली पुरानी दमकल मंगवाई गई थी, लेकिन वह खराब थी, जिसके बाद उसे वापस गुरुग्राम भेज दिया गया था। हाइड्रोलिक सीढ़ी वाली दमकल के जाने के बाद कोई अन्य ग्रेटर फरीदाबाद के लिए नहीं आई है। सरकार ने कभी ग्रेटर फरीदाबाद को हरियाणा का हिस्सा माना ही नहीं है। करोड़ों रुपये ईडीसी के रूप में देने के बावजूद विकास रुका हुआ है। ग्रेटर फरीदाबाद के निवासियों की सुरक्षा ध्यान रखते हुए कम से कम नई हाइड्रोलिक सीढ़ी वाली दमकल होनी चाहिए।

-प्रमोद मिनोचा ग्रेटर फरीदाबाद में एक अग्निशमन विभाग होना चाहिए। सेक्टर-15 से यहां तक पहुंचने में स्थिति विकट हो सकती है। इसके अलावा तूफान की सूचना होने के बाद भी कोई तैयारी नहीं करना यह सोचने वाली बात है।

-प्रदीप सिवाच करीब दो साल पहले हाइड्रोलिक प्लेटफार्म आया था, जिसकी ऊंचाई की क्षमता 150 फुट के करीब थी, पर उसकी एक्सपायरी डेट निकल जाने के बाद पंचकूला भेज दिया गया। दिल्ली-एनसीआर में इस प्लेटफार्म का उपयोग करने की अवधि दस साल है, जबकि पंचकूला चूंकि एनसीआर से बाहर है, इसलिए उसे वहां भेज दिया गया। उसके बाद से और कोई प्रबंध नहीं हो सका है।

-राम ¨सह खटाना, दमकल अधिकारी।

Musing India
Author: Musing India

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