फरीदाबाद

The foundations of Greater Faridabad buildings are weak

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हरियाणा के ग्रेटर फरीदाबाद की इमारतों की नींव हो रही कमजोर

बुधवार रात ग्रेटर नोएडा के गांव शाहबेरी में जमींदोज हुई दो इमारत की घटना के बाद ग्रेटर फरीदाबाद के लोग भी परेशान दिखाई दे रहे हैं। ग्रेफ में रहने वाले लोग समय-समय पर हाईराइज बिल्डिंग के निर्माण में घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल करने के आरोप लगाते रहे हैं। ग्रेफ में गंदा पानी भी विभिन्न सोसायटी की बेसमेंट में एकत्रित हो रहा है, जिससे नींव लगातार कमजोर हो रही है, क्योंकि गंदे पानी की निकासी की कोई वैध व्यवस्था नहीं है।

ग्रेटर फरीदाबाद में विभिन्न सोसायटी की हाईराइज बिल्डिंगों को स्थापित हुए एक दशक से ज्यादा हो चुका है। घटिया सामग्री की वजह से सोसायटी की दीवारों में जगह-जगह सीलन देखी जा सकती है। वर्ष 2012 में एक सोसायटी परिसर में निर्माणाधीन स्कूल की इमारत गिर गई थी। छह साल में स्कूल का मलबा तक नहीं उठा है। इसी तरह ग्रेटर फरीदाबाद निवासी हिमांशु ने जब दो साल पहले एसआरएस रेजीडेंसी में किराए पर फ्लैट लिया था। वह अपना एलईडी टीवी दीवार पर लगाकर हटे ही थे कि अचानक टीवी गिर गया। इससे उन्हें 35 हजार रुपये का नुकसान हुआ था। बिल्डर द्वारा सीवर के पानी की निकासी की सही व्यवस्था नहीं है। सीवर का पानी बेसमेंट में इकठ्ठा हो रहा है, जिसकी वजह से नींव कमजोर हो रही है। प्रशासन और सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।-जितेंद्र गर्ग, आरडब्ल्यूए प्रधान, एसआरएस रेजीडेंसी ग्रेटर नोएडा हादसे का दुख है, इसीलिए हम अपनी बिल्डिंग को लेकर भी ¨चतित हैं। सोसायटी को बने करीब पांच साल ही हुए हैं और जगह-जगह सीमेंट उखड़ने लगा है। वॉटर प्रू¨फग के नाम पर खानापूर्ति हुई है। जगह-जगह सीलन दिखाई देती है, जो बिल्डिंगों को कमजोर कर रहा है।

-अबनीश कुमार, आरडब्ल्यूए प्रधान, एसआरएस रॉयल हिल्स पूरा ग्रेटर फरीदाबाद डार्क जोन में है। कुछ एक अपवाद छोड़ कर विभिन्न सोसायटी में निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री का प्रयोग प्रमुख समस्या है। एसटीपी बहुत कम क्षमता वाले है। पाइप लाइन में पानी भरने के बाद ओवरफ्लो होकर बेसमेंट में इकठ्ठा होता है।

-अरुण सिंह आर्य, आरडब्ल्यूए प्रधान, ओमेक्स न्यू हाइट्स अवैध निर्माण मामले में समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। पुलिस, बिजली निगम, तहसील के अधिकारियों से सहयोग के लिए कई बार पत्र लिखे जाते हैं। कुछ मामले ऐसे आए हैं लेकिन हमारे यहां इतनी बड़ी इमारत अवैध रूप से रूप से नहीं बनी हैं। अवैध निर्माण शुरू होते ही हम इसे तोड़ देते हैं। हमने कई एफआइआर भी कराई हैं।

-नरेश कुमार, जिला नगर योजनाकार इंफोर्समेंट अवैध इमारतों व अन्य निर्माणों पर नजर रखने के लिए टीमों का गठन किया हुआ है। अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की हुई है। अगर मुझे कहीं भी अवैध निर्माण की शिकायत मिली तो संबंधित जेई, एसडीओ व एक्सईएन से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और कार्रवाई भी होगी।

-मोहम्मद शाइन, निगमायुक्त नॉन प्रोफेशनल वास्तुकार, जो काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स से मान्यता प्राप्त नहीं है। वे सही प्रकार से इमारत के नक्शे तैयार नहीं करते। प्रशासन द्वारा भी वास्तुकार से सलाह नहीं ली जाती। इसलिए ऐसे हादसे हो रहे हैं और लोगों की जान जा रही है। इसके अलावा इमारत के निर्माण से पूर्व सामग्री की प्रयोगशाला में जांच होनी चाहिए। ऐसे हादसों के लिए सख्त कानून बनाए जाने की दरकार है।

-निर्मल मखीजा, संयुक्त सचिव, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्चर कुछ घटनाएं

-11 अक्टूबर 2017 : ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर-88 में मे निर्माणाधीन इमारत गिरने से हुए हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई। इस हादसे में 5 मजदूर घायल हो गए। यह इमारत एक अस्पताल की थी।

-6 नवंबर 2016 : ओल्ड फरीदाबाद की पुरानी चुंगी क्षेत्र में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत गिरी थी। तीसरी मंजिल बनाने का कार्य चल रहा था। इसमें दो मासूम बच्चों सहित सात लोगों के घायल हो गए थे।

-17 जनवरी 2018 : गांव मादलपुर में दो मंजिला एक इमारत के लेंटर को उठाया जा रहा था, तभी पूरी की पूरी इमारत गिर गई। इस घटना में एक मजदूर की दबकर मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया।

-11 दिसंबर 2012 : सेक्टर-88 में निर्माणाधीन स्कूल की छह मंजिला निर्माणाधीन इमारत जमींदोज होने से तीन मजदूरों की मौत। सात लोग घायल।

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Author: Musing India

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