गोरखपुर में पांच दिन में 60 मौतें, जिम्मेदार कौन?

Staff nurse told the living child dead in women hospital Firozabad

उत्तर प्रदेश के योगी राज में महिला अस्पताल में लापरवाही की हद पार, स्टाफ नर्स ने जिंदा बच्चे को बताया मृत

फिरोजाबाद के महिला अस्पताल में बड़ी लापरवाही सामने आई है। अस्पताल के एसएनसीयू (सिक न्यूबार्न केयर यूनिट) में भर्ती नवजात को मृत बताकर स्टाफ नर्स ने ऑक्सीजन हटा दी, जबकि बच्चा जीवित निकला। इस लापरवाही पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया।
थाना टूंडला क्षेत्र के गांव सलेमपुर नगला खार निवासी शिवनरायण की पत्नी प्रियंका ने 29 अगस्त की रात को निजी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। समय से पूर्व हुए जन्म के कारण बच्चा कमजोर था। उसे सौ शैय्या अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया।

परिजनों ने आरोप लगाया कि 30 अगस्त की पूरी रात बच्चे को ऑक्सीजन नहीं लगाई। परिवारिजनों ने ऑक्सीजन लगाने को कहा कि स्टाफ नर्स ने फटकार कर बाहर निकाल दिया। शनिवार को सुबह के समय कुछ के लिए देर ऑक्सीजन लगाई। फिर निकाल दी।

नवजात को मृत बताकर परिजन से कराए हस्ताक्षर

स्टाफ नर्स ने नवजात शिशु के पिता शिवनरायण को फोन कर सूचना दे दी कि बच्चे की मृत्यु हो चुकी है। उसे अस्पताल से ले जाएं। इस खबर से परिवार में कोहराम मच गया। परिवारीजन एसएनसीयू वार्ड में पहुंच गए। उनसे कागज पर भी हस्ताक्षर कराने को कहा गया।

इसी बीच सुबह आठ बजे ड्यूटी बदली तो दूसरी स्टाफ नर्स ने बच्चे को ऑक्सीजन लगाई। बच्चा फिर से सांस लेने लगा। ऑक्सीजन लगाने को लेकर दोनों ही स्टाफ नर्स में झगड़ा होने लगा। यह देखकर परिजनों ने हंगामा शुरु कर दिया।

बाद में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एलके गुप्ता भी मौके पर आ गए। उन्होंने बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण कर ऑक्सीजन लगी रहने देने को कहा। वहीं परिजनों ने स्टाफ नर्स दीप्ती द्वारा की गई लापरवाही की शिकायत सीएमओ और सीएमएस से की है।

सीएमएस ने कहा- कार्रवाई के लिए लिखूंगी पत्र

महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ साधना राठौर ने कहा कि स्टाफ नर्स दीप्ती के खिलाफ पूर्व में भी शिकायत आई हैं, लेकिन उन्होंने जिंदा बच्चे को ही मृत घोषित कर दिया, यह जांच का विषय ही नहीं है बल्कि यह बड़ी लापरवाही है। स्टाफ नर्स को हटाने के लिए विभाग को पत्र लिखूंगी।

सीएमओ डॉ एसके दीक्षित ने कहा कि जिंदा बच्चे को मृत बताना गंभीर लापरवाही है लेकिन मुझे इस तरह की कोई भी जानकारी महिला अस्पताल की तरफ से नहीं दी गई है। यदि स्वास्थ्य अधिकारी किसी स्टाफ की सेवाओं से असंतुष्ट हैं कि तो पत्र लिखें, विभाग कार्रवाई करेगा।

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