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Raised builders in concessional homes

हरियाणा के ग्रेटर फरीदाबाद में रियायती घरों में भी बिल्डर कर रहे ‘उगाही’

लोगों को रियायती दरों पर घर देने का वादा बेकार साबित हो रहा है। जिन डिवेलपर ने अपने प्रॉजेक्ट को पूरा कर लिया है और सरकार से ओसी हासिल कर ली है, उन्होंने खरीदारों से जबरन उगाही शुरू कर दी है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट ने जो रेट तय किए हैं, उससे कहीं अधिक वसूली हो रही है। इस बात की शिकायत मुख्यमंत्री को सोशल मीडिया से की जाने लगी हैं, साथ ही सीएम विंडो पर भी आवाज उठने लगी है। लेकिन बिल्डर अलॉटमेंट को रद्द न कर दें, इस डर से खरीदार अभी खुलकर सामने आने से बच रहे हैं।

ताजा मामला सेक्टर-86 स्थित अडोर रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड का है। एक खरीदार के अनुसार, यहां टाइप-1 व टाइप-2 के 822 टू-बीएचके फ्लैट बने हैं। डिवेलपर ने निर्माण पूरा कर ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट भी हासिल कर लिया है। यहां खरीदारों को करीबन 21 लाख रुपये में फ्लैट मिला है, लेकिन अब जब पजेशन की बारी आई, तो बिल्डर ने उनसे मनमाने तरीके से अवैध वसूली शुरू कर दी है। खरीदारों को डिमांड लेटर देने के बजाय सिंपल कागज पर अलग-अलग खर्च गिनाकर राशि वसूली जा रही है। यह राशि करीब दो लाख रुपये तक बन रही है। इस पूरी राशि का भुगतान नकद करने का दबाव बनाया जा रहा है। उधर, डिवेलपर की ओर से जिम्मेदार अधिकारी भी बात करने को तैयार नहीं हो रहे। वे बार-बार इस मामले से खुद को अलग बताते हुए अपने सीनियर का नंबर देने में लगे रहे।

इस मामले में अडोर रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक, जितेश कुमार गुप्ता ने बताया कि हम खरीदारों से कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं मांग रहे। उन्हें सिर्फ यह बता रहे हैं कि ये चार्ज उन पर अभी आ सकते हैं।

‘समय से पहले दे रहे, इसलिए ले रहे’

एक खरीदार के अनुसार उनके पास डिवलेपर से पजेशन के बजाय ऑफर ऑफ पजेशन लेटर आया। इसमें कहा गया कि कुछ ड्यूज व फॉर्मेलिटी पूरी कर दें और पजेशन ले लें। जब डिवेलपर के पास गए तो उन्हें सिंपल कागज पर करीब 2 लाख रुपये की डिमांड बता दी। इस वसूली को गलत ठहराया तो डिवेलपर के प्रतिनिधियों ने कहा कि समय से पहले प्रॉजेक्ट दे रहे हैं, इससे आपका रेंट भी बचेगा, गलत क्या है?

ये है नियम

टाउन एंड कंट्री डिपार्टमेंट हरियाणा के सीनियर टाउन प्लैनर, नेपाल सिंह चौहान ने बताया कि अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी के अनुसार कोई भी डिवेलपर किसी भी अतिरिक्त राशि की वसूली खरीदार से नहीं कर सकता। डिवेलपर 4000 रुपये प्रति वर्ग फीट के हिसाब से कारपेट एरिया की कीमत ले सकता है, जबकि 500 रुपये प्रति वर्ग फीट के हिसाब से बालकनी की एवज में राशि खरीदार से ले सकता है।

ये खर्चे मांगे जा रहे

सुविधाएं चार्ज (रुपयों में)

एक्सटर्नल इलेक्ट्रिफिकेशन 34411

सरकार को जमा वैट 5899

एसटीपी 15000

यूटिलिटी कनेक्शन चार्ज 14041

फायर फाइटिंग चार्ज 14748

वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट 12000

लेबर सेस 7866

बिजली मीटर चार्ज 6000

पावर बैक अप (कॉमन एरिया) 15000

बिजली कनेक्शन चार्ज 20000

पीएनजी कनेक्शन चार्ज 3000

एक्सटर्नल डिवेलपमेंट चार्ज 71281

Musing India
Author: Musing India

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