राष्ट्रपति 13 मार्च, 2016 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारम्भ करते हुए।

President Pranab Mukherjee, Chief Justice of Supreme Court, Governor and Chief Minister Akhilesh Yadav address Sesquicentennial celebrations of Allahabad High Court

राष्ट्रपति 13 मार्च, 2016 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारम्भ करते हुए।
राष्ट्रपति 13 मार्च, 2016 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारम्भ करते हुए।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित भव्य समारोह को राष्ट्रपति, उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने सम्बोधित किया

भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को न्याय की शानदार विरासत बताते हुए कहा है कि यह उच्च न्यायालय ने केवल भारत का अपितु दुनिया का सबसे विशालतम् न्याय का मन्दिर है। न्याय एवं विधि के क्षेत्र में इसकी शानदार उपलब्धियों पर देश को गर्व है।

राष्ट्रपति ने आज इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित भव्य समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए कहा कि इस न्याय के मन्दिर से सम्बन्धित विधिवेत्ता और अधिवक्ताओं ने स्वतन्त्रता आन्दोलन में महती भूमिका का निर्वहन किया है। महामना मदन मोहन मालवीय, श्री कैलाश नाथ काटजू, श्री तेज बहादुर सप्रू, श्री पुरुषोतम् दास टण्डन, श्री मोतीलाल नेहरू और श्री जवाहरलाल नेहरू इसी उच्च न्यायालय से सम्बन्धित रहे हैं, जिनकी सेवाओं और न्याय के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को पूरा देश सम्मान के साथ स्मरण करता है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय सहित देश के अन्य न्यायालयों में न्यायाधीशों और अन्य जूडीशियल स्टाफ की कमी पर राष्ट्रपति ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए और उच्च न्यायालयों में बड़ी संख्या में लम्बित वादों को देखते हुए, सरकार को स्टाफ की कमी को पूरा करना चाहिए। उन्होंने बार के सदस्यों का आह्वान भी किया कि बड़ी संख्या में न्यायालयों में लम्बित वादों की संख्या को कम करने के लिए बेंच के साथ उनका सक्रिय सहयोग आवश्यक है।

मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव 13 मार्च, 2016 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए।
मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव 13 मार्च, 2016 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए।

इलाहाबाद बार के सदस्यों की प्रशंसा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि समय-समय पर उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों में बार के सदस्यों की भूमिका सराहनीय रही है। किसी भी उच्च न्यायालय की तुलना में इलाहाबाद उच्च न्यायालय को यह गौरव प्राप्त है कि भारत के सर्वाधिक मुख्य न्यायाधीश इस न्यायालय से सम्बन्धित रहे हैं। राष्ट्रपति ने इस अवसर विशेष पर उच्च न्यायालय के गौरवशाली इतिहास पर डाक टिकट तथा सिक्का जारी किया और एक स्मारिका का विमोचन भी किया।

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री टी0एस0 ठाकुर ने इलाहाबाद को पवित्र नगरी बताते हुए कहा कि यहाँ पर कुम्भ के अवसर पर गंगा, यमुना और सरस्वती के पावन त्रिवेणी तट पर दुनिया का सबसे बड़ा समागम कुम्भ का पर्व सम्पन्न होता है। यहीं सबसे बड़ा इलाहाबाद उच्च न्यायालय स्थापित है। इस उच्च न्यायालय की न्याय के क्षेत्र में महान उपलब्धियों को हर कोई जानता है और विधि के क्षेत्र में इलाहाबाद के योगदान पर पूरा देश गर्व करता है। यहाँ के न्यायविदों ने न्याय के क्षेत्र में जो सेवा की है, उसका उदाहरण कहीं और नहीं मिलता। उच्च न्यायालय के गौरवशाली अतीत की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि देश के सामने अभी बहुत सारी चुनौतियां हैं। बाहरी चुनौतियों से तो हम लड़ सकते है, लेकिन जो हमारी आन्तरिक चुनौतियां हैं, उनसे निपटने के लिए न्यायविदों और अधिवक्ता बन्धुओं का सहयोग अत्यन्त जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश ने इस अवसर पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इंस्टीट्यूशन रिव्यू का विमोचन कर राष्ट्रपति को भंेट किया।

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों व अधिवक्ताओं का स्वागत करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस भव्य आयोजन में सम्मिलित होकर मुझे गर्व का अनुभव हो रहा है। न्याय के क्षेत्र में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के गरिमामयी अतीत और वर्तमान का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इतने बड़े प्रदेश में सबको जल्दी और सुलभ न्याय मिले, इसके लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की भूमिका बढ़ जाती है। उन्होंने कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका में बेहतर समन्वय पर बल दिया। उन्होंने कहा कि न्याय से आम आदमी को यह लगे कि उसे शीघ्र और सुलभ न्याय उपलब्ध हो रहा है इसमें सभी के सहयोग की जरूरत है।

भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी 13 मार्च, 2016 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए।
भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी 13 मार्च, 2016 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने प्रदेश की जनता की ओर से राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश, अन्य उच्च न्यायालयों से आये हुए मुख्य न्यायाधीशों, उच्चतम न्यायालय व अन्य उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों, विशेष रुप से उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डाॅ0 डी0वाई चन्द्रचूड़ व बार के अन्य सदस्यों तथा अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के इस महान अनुष्ठान में सम्मिलित होकर और सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्हें अपार हर्ष हो रहा है।

अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि इलाहाबाद शहर का अपना एक प्राचीन और गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। भारद्वाज मुनि के समय से संगम तट पर माघ मेलों और कुम्भ मेलों में देश-विदेश से लाखों लोग अपनी आशाओं, आकांक्षाओं और सपनों को लेकर इलाहाबाद आते रहे हैं और संगम की इस नगरी से आशीर्वाद लेते रहे हैं। यह परम्परा आज भी यथावत जारी है। उन्होंने कहा कि कन्नौज के राजा हर्षवर्धन भी यहां आए और चीन से विद्वान ह्वेनसांग भी यहां आये। यहीं महान सम्राट अकबर ने संगम तट पर ऐतिहासिक किला बनाया तो चन्द्रशेखर आजाद ने जंगे आजादी में यहीं अपने प्राणों की आहूति दी।

मुख्यमंत्री ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के गौरवशाली इतिहास की गौरव गाथा का वर्णन करते हुए कहा कि न केवल यह देश का सबसे बड़ा उच्च न्यायालय है, बल्कि यहां के विद्वान न्यायाधीशों ने समय-समय पर ऐसे ऐतिहासिक फैसले दिये, जो न्याय और संविधान के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हुए हैं। इन फैसलों ने देश की दिशा और दशा, दोनों को बदलने का काम किया है।

मुख्यमंत्री ने अपने सम्बोधन में यह भी कहा कि लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में सभी अंगों यानी विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के काम करने का उद्देश्य एक ही है और वह है जनहित, यानी आम जनता के हितों की रक्षा। उन्होंने कहा कि मेरे विचार से आजादी के इतने सालों बाद शायद यह समय आ गया है कि शासन और प्रशासन के साथ-साथ न्याय की भाषा भी जनता की भाषा हो, ताकि सत्ता और जनता की बीच की दूरी कम हो सके। उन्होंने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने और लोगों की इन्साफ दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार ने न्यायपालिका की सुविधाओं में बढ़़ोत्तरी का कार्य लगातार किया गया है। यही कारण है कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में न्याय विभाग का बजट 1700 करोड़ रुपये से साल दर साल बढ़कर 3100 करोड़ रुपये हो गया है।

श्री यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सालों पहले प्रदेश के लगभग सभी जनपदों और तहसीलों में अधिवक्ताओं और वादकारियों की सुविधा के लिए अधिवक्ता चैम्बर्स के लिए पर्याप्त धनराशि मुहैय्या करायी थी। अधिवक्ता बन्धुओं के कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों के लिए प्रदेश सरकार ने 200 करोड़ रुपये का काॅर्पस फण्ड बनाने का फैसला लिया है। इतना ही नहीं, नौजवान अधिवक्ताओं को वित्तीय मदद देने के लिए 10 करोड़ रुपये का एक अलग काॅर्पस फण्ड भी गठित किया जाएगा।

प्रारम्भ में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डाॅ0 डी0वाई0 चन्द्रचूड़ ने राष्ट्रपति व अन्य अभ्यागत न्यायाधीशों के साथ ही, बार के सदस्यों का स्वागत करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के गौरवमयी अतीत पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने न्याय के क्षेत्र में विधिवेत्ताओं और जंगे आजादी में यहां के अधिवक्ताओं और न्यायविदों की भूमिका की सराहना की और कहा कि इस उच्च न्यायालय से सम्बन्धित न्यायाधीशों और बार के सदस्यों से न्याय के क्षेत्र में देश का गौरव सदैव बढ़ा है। इस अवसर पर उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय से सम्बन्धित सेन्टर आफ इन्फाॅरमेशन टेक्नोलाॅजी प्रकल्प की स्थापना की चर्चा करते हुए कहा कि 150 वर्ष के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसलों के डिजिटलाईजेशन के लिए एक ऐतिहासिक कदम है।

समारोह का संचालन रजिस्ट्रार श्री एम0 मेहदी और श्रीमती रचना दीक्षित ने किया। अन्त में धन्यवाद ज्ञापन इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति श्री राकेश तिवारी द्वारा किया गया।

समारोह में केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री श्री डी0वी0 सदानन्द गौड़ा सहित उच्चतम और उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति, अधिवक्ता, मीडियाकर्मी, शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

पूर्व में मुख्यमंत्री ने इलाहाबाद स्थित बमरौली हवाई अड्डे पर भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी का गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम के उपरान्त मुख्यमंत्री ने बमरौली हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति को विदाई भी दी।

राष्ट्रपति 13 मार्च, 2016 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ पर सिक्के का विमोचन करते हुए। साथ में हैं, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव।
राष्ट्रपति 13 मार्च, 2016 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ पर सिक्के का विमोचन करते हुए। साथ में हैं, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव।

Country is proud of Allahabad High Court tremendous achievements in the field of law and justice : President

Co-operation between bench and bar is necessary for reducing pendency of cases

President releases a postal stamp, a coin and a souvenir on the glorious history of Allahabad High Court

Legal services rendered by the legal luminaries of Allahabad are unparalleled : Chief Justice Supreme Court

Chief Justice of India releases the Institution Review of Allahabad High Court and presents it to the President of India

Role of Allahabad Court assumes great significance in order to provide speedier and easier justice to all in UP : Governor

Judgments of Allahabad High Court have changed both the direction and condition of the country : Chief Minister

Language of judiciary besides, government and administration should become the language of the people, so that the divide between government and people could be minimised

State government is committed towards protection of democratic values and providing justice to the people

Budget of the law department had increased from Rs. 1,700 crore to Rs. 3,100 crore year by year

Describing the Allahabad High Court as a glorious heritage of justice, the President of India, Mr. Pranab Mukherjee, said that the Allahabad High Court is a grand temple of justice not only of India, but of world also. He said, the country is proud of its tremendous achievements in the field of law and justice.

The President was addressing the sesquicentennial celebrations of Allahabad High Court as chief guest in Allahabad today. He said that the legal luminaries and advocates associated with this temple of justice had played a significant role in the freedom movement. Luminaries like Mahamana Madan Mohan Malviya, Kailash Nath Katju, Tej Bahadur Sapru, Purushottam Das Tandon, Motilal Nehru and Jawaharlal Nehru were associated with this High Court, whose services and unparalleled contribution in the sphere of justice is reverently remembered even today by the entire country. Referring to the dearth of judges and other judicial staff in the courts of the country including Allahabad High Court, the President said that the government should meet the want of staff in view of future challenges and pendency of cases in a large number in High Courts. He also called upon the members of the Bar to lend their active cooperation to the Bench in reducing the number of pending cases in courts.

Praising the members of Allahabad Bar, the President said that the role of the Bar’s members had been commendable in the important judgments delivered by the High Court from time to time. Among all the High Courts, it is Allahabad High Court, which the highest number of Chief Justices of India had been associated with. On this occasion, the President released a postal stamp, a coin and a souvenir on the glorious history of Allahabad High Court.

Describing Allahabad as a holy city, the Chief Justice of India, Justice Mr. TS Thakur, said that the world’s largest human confluence assembled at the holy Triveni banks of the Ganga, Yamuna and Saraswati rivers on the occasion of Kumbh and this is the very place where the largest Allahabad High Court is established. Everyone knows the grand achievements this High Court has made in the sphere of justice and the entire country takes pride on contribution of Allahabad in the field of law and justice. The legal services rendered by the legal luminaries of this city are unparalleled. Dwelling upon the glorious past of Allahabad High Court, he said there are still numerous challenges before the country and the cooperation of legal experts and lawyers is a must to deal with these challenges. On this occasion, the Chief Justice of India released the Institution Review of Allahabad High Court and presented it to the President of India.

Welcoming the President, the Chief Justice of India, the judges of the High Court and advocates, the UP Governor, Mr. Ram Naik, said that he was very happy in being a part of this grand occasion organised to mark the sesquicentennial celebrations of Allahabad High Court. Referring to the glorious past and present of the Allahabad High Court, he said that the role of Allahabad Court assumed a greater significance in order to provide speedier and easier justice to all in such a big state of Uttar Pradesh. He laid stress on better coordination among executive, judiciary and legislative. He said that the justice should be such as makes the people feel that they are being given speedy justice.

Everyone should cooperate in this task, he added. Welcoming the dignitaries gracing the occasion on behalf of the people of the state, the UP chief Minister, Mr. Akhilesh Yadav, said that he was immensely happy on being a part of this grand ceremony of Allahabad High Court amidst the country’s highest dignitaries. In his address, the Chief Minister said that Allahabad city had an ancient and glorious history. Since the time of Bhardwaj Muni, millions of the people loaded with their hopes, aspirations and dreams had been coming to the place of holy Sangam not only from the country, but also from overseas during Magh Melas and Kumbh Melas and had been taking blessings from this city of Sangam. Even today, this tradition is going on as usual. He said that the King of Kannauj Harshvardhan and Chinese scholar Fahien had visited this place. This is the place where the great emperor Akbar built historic Fort and Chandrashekhar Azad, the doyen of Freedom Movement, laid down his life. Mentioning the glorious saga of Allahabad High Court, the Chief Minister said that this court is not only the country’s largest High Court, but the scholarly justices of this court have delivered historic judgments from time to time, which are milestones in the spheres of justice and constitution, and these judgments have changed both the direction and condition of the country.

The Chief Minister in his address said that legislature, executive and judiciary, the three parts of democratic system revolves around only one objective of public interest. He said that now the time had come when the language of judiciary besides, government and administration should become the language of the people, so that the divide between government and people could be minimised. Reiterating the commitment of the state government towards protection of democratic values and providing justice to the people, he said that the state government had continuously worked for increasing the facilities of judiciary. This was the reason that the budget of the law department had increased from Rs. 1,700 crore to Rs. 3,100 crore year by year.

राष्ट्रपति एवं राज्यपाल 13 मार्च, 2016 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ पर डाक टिकट का विमोचन करते हुए। साथ में हैं, मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव।
राष्ट्रपति एवं राज्यपाल 13 मार्च, 2016 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ पर डाक टिकट का विमोचन करते हुए। साथ में हैं, मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव।

Mr. Yadav said that the state government had many years ago made the provision for enough amount of money for lawyers’ chambers in almost all the districts and tehsils to facilitate advocates and litigants. The state government had taken the decision for corpus fund of Rs. 200 crore for the welfare of lawyers. Besides, another corpus fund of Rs. 10 crore would be established to provide financial assistance to young lawyers.

Earlier Chief Justice of Allahabad High Court Dr. D.Y. Chandrachud while welcoming the President and other dignitaries discussed the glorious past of Allahabad High Court. Appreciating the role of legal fraternity in the field of judiciary and freedom struggle, he said that justices and the members of bar had enhanced the prestige of the country.

Discussing about the establishment of Centre of Information Technology Project, he said that the digitisation of Allahabad High Court orders covering the period of 150 years was a historic step.

The function was conducted by registrar Mr. M. Mehdi and Mrs. Rachna Dixit. The senior judge of Allahabad High Court Mr. Rakesh Tiwari proposed the vote of thanks. On this occasion, the Union Minister of Law & Justice Mr. D.V. Sadananda Gowda, Justices of Supreme Court and High Court, advocates, media persons, senior officers and eminent citizens were present.

Earlier, the Chief Minister welcomed the President of India Mr. Pranab Mukherjee at Bamrauli Airport in Allahabad. He also bid farewell to the President at the Airport after the function.

Musing India
Author: Musing India

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