समाजवादी पार्टी

Political move of Samajwadi Party to goodbye factionalism

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लोकसभा चुनाव- 2019, ‘गुटबाजी को गुडबाय’ करने के लिए ‘समाजवादी पार्टी की ये सियासी चाल’

गुटबाजी से निपटने के लिए लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी नया दांव आजमा सकती है। पार्टी हाईकमान यूपी के फर्रुखाबाद जिले से पिछड़ी जाति के ही किसी गैर यादव प्रत्याशी को चुनाव में उतार सकती है। एक कैबिनेट मंत्री के रिश्तेदार को भी पार्टी यहां से प्रत्याशी बनाकर स्थानीय क्षत्रपों में जारी शीतयुद्घ को कुछ हद तक कम करने की कोशिश कर सकती है।

फर्रुखाबाद में पार्टी के भतीर पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह यादव के पुत्र सचिन यादव और अलीगंज के पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव के पुत्र डॉ. सुबोध यादव के बीच लंब समय से गुटबाजी चल रही है। फर्रुखाबाद संसदीय सीट में अमृतपुर, भोजपुर, कायमगंज और फर्रुखाबाद विधानसभा के अलावा पड़ोसी जिले एटा की अलीगंज विधानसभा भी शामिल है। यहां करीब 13.33 लाख मतदाता है। इसमें पिछड़ी जाति के मतदाताओं की संख्या चार लाख से ज्यादा है।

पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के मुकेश राजपूत ने इस संसदीय सीट से चार लाख मतों से चुनाव में जीत हासिल की थी। सपा के रामेश्वर सिंह यादव 2.55 लाख मत पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। टिकट कटने के बाद सपा से बागी हुए पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह यादव के पुत्र सचिन यादव ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर 58 हजार मत हासिल किए थे। इस संसदीय सीट पर अच्छी संख्या में पिछड़ी जाति के मतदाताओं के चलते सपा यादव प्रत्याशी उतारती रही है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बार गुटबाजी समाप्त करने के लिए गैरयादव प्रत्याशी उतारा जा सकता है। जबकि पूर्व सांसद चंद्रभूषण सिंह मुन्नूबाबू, महेंद्र कटियार, सचिन यादव, डॉ. सुबोध यादव समेत सात नेताओं ने इस सीट से अपनी दावेदारी के लिए पार्टी हाईकमान से गुहार लगाई है। सपा से टिकट पाने की दौड़ में कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के दामाद डॉ. नवलकिशोर शाक्य भी शामिल हैं।

जिनको नौकरी मिलनी चाहिए, उनको सरकार से लाठियां मिल रहीं: अखिलेश

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर शिक्षामित्रों के मामले में बड़ा बयान दे डाला। सरकार को कोसते हुए अखिलेश ने अपने अॉफिशियल ट्विटर अकाउंट पर फिर से ट्वीट किया है।

ट्वीट कर कहा कि जिनको नौकरी मिलनी चाहिए उनको सरकार से लाठियां मिल रही हैं, दुर्भाग्यपूर्ण!

इससे पहले अखिलेश ने चुनाव में बैलेट पेपर से मतदान कराने को लेकर बया दिया था।

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कैराना व नूरपुर में बड़े पैमाने पर ईवीएम व वीवीपैट में गड़बड़ी का उल्लेख करते हुए एक बार फिर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि ईवीएम मशीनों से जनता का भरोसा उठता जा रहा है। लोकतंत्र की मजबूती के लिए ईवीएम के बजाय बैलेट से चुनाव होना चाहिए।

अखिलेश यादव मंगलवार को पूर्व चौधरी चरण सिंह को श्रद्धासमुन अर्पित करने के बाद मीडियाकर्मियों से मुखातिब थे। कहा कि चौधरी चरण सिंह ने गांव, गरीब, किसान की खुशहाली के लिए जो सपना देखा था समाजवादी उसी रास्ते पर चल रहे हैं। उनके कर्मक्षेत्र में सोमवार को हुए मतदान में ईवीएमए व वीवीपैट खराब होने की शिकायतें बड़े पैमाने पर मिलीं। कड़ाके की धूप में घंटों खड़े रहने के बावजूद लोग मतदान नहीं कर पाए। जिस तरह से ईवीएम खराब हैं, वीवीपैट मशीनें चल नहीं रही हैं, उससे संदेह पैदा हो रहा है। लोगों का भरोसा टूट रहा है।

कैराना व नूरपुर की घटनाओं से साबित हो गया है कि ईवीएम से मतदान लोकतंत्र के लिए खतरा है। सवाल यह भी है कि ये मशीनें उन्हीं इलाकों में क्यों खराब हुईं जहां रालोद, सपा व बसपा के वोटर थे। गरीब, मुस्लिम, दलित और किसान, मजदूर मतदान नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से शिकायतें आई हैं, हमें उम्मीद है कि निर्वाचन आयोग वहां दोबारा वोट डालने का मौका देगा। उन्होंने अंदेशा जताया कि मशीनें एक रणनीति के तहत मशीनें खराब की गईं थी।

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Author: Musing India

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