नीरव मोदी

Now crores scam in Provident Fund

नीरव मोदी
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प्रॉविडेन्ट फंड में करोड़ों का घोटाला, अब इस शहर से जुड़ रहे तार

दिल्ली के द्वारका में पीएफ विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा किए करोड़ों के घोटाले के तार कानपुर से भी जुड़ गए हैं। शातिरों ने कानपुर दक्षिण के एक बैंक खाते में भी लेन-देन करके करीब 20 लाख रुपये निकाल लिए हैं। अब विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। उधर, कर्मचारी नेताओं ने भी आउटसोर्स कर्मचारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

दिल्ली में द्वारका में ईपीएफओ कार्यालय है। देशभर से आने वाले पीएफ के ऑनलाइन क्लेम द्वारिका आफिस से ही पास होते हैं। यहां कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों ने क्लेम लेने वालों के फर्जी एकाउंट खोल कर फर्जी क्लेम पास करा लिए। यह सब ऑनलाइन हुआ। शुरूआती जांच में करीब 10 करोड़ के घोटाले का मामला अब तक प्रकाश में आ चुका है। लेकिन यह रकम और भी बढ़ सकती है।

क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि विभाग की ओर से दिल्ली के द्वारका थाने में 20 मार्च को इस मामले की शिकायत की गई थी। इसमें में एक व्यक्ति की पुलिस ने अब तक गिरफ्तारी की है। कई और लोगों के शामिल होने की आशंका है। जब विभाग ने अपनी विभागीय जांच की तो पता चला कि दक्षिण कानपुर के बैंक आफ बड़ौदा की एक शाखा से भी 26 फरवरी को 20 लाख रुपये एक क्लेम धारक के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए। अब इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है। विभाग पता लगा रहा है कि किस स्तर पर चूक हुई। रकम की भी जानकारी जुटाई जा रही है। यह रकम 20 लाख से और भी अधिक हो सकती है।

ऐसे की करोड़ों की हेराफेरी

सूत्रों ने बताया कि दिल्ली के द्वारिका स्थित इस विभाग से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के दिल्ली-एनसीआर के अलावा पूरे देश के ऑनलाइन खातों का संचालन किया जाता है। ऑनलाइन लेन-देन का कार्य कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने आउटसोर्स कर रखा है। तमाम खातों की डेटा इंट्री करने समेत अन्य ऑनलाइन काम करने की जिम्मेदारी जिस कं पनी के कर्मचारियों को दी, उन्हीं आउटसोर्स कर्मचारियों ने करीब 10 फर्जी खाते खोल कर करोड़ों रुपये के फंड ट्रांसफर करके पैसा भी निकलवा लिया।

मिटा देते थे अन्य ऑनलाइन जानकारी

सूत्रों ने बताया कि बेहद शतिराना अंदाज में घोटाले को अंजाम दिया गया। द्वारका आफिस में अफसरों के घर जाने के बाद यह आउटसोर्स कर्मचारी काम अधिक होने की बात कहकर विभाग में रुक जाते थे। इनके पास सभी पीएफ खाताधारक की सभी जानकारी रहती थी। यह आउटसोर्स कर्मचारी इतने शातिर थे कि ऑनलाइन क्लेम दाखिल करके क्लेम सेेटेल करवा लेते थे। इसके बाद विभाग से इन क्लेमों की जानकारी डिलीट कर देते थे।

ऐसे पकड़ में आया मामला

फर्जीवाड़ा की जानकारी वित्तीय वर्ष खत्म होने के दौरान की गई मिलान में पकड़ी गई। देखा गया कि ऑनलाइन कैश लेनदेन की रकम खातों में जमा रकम से मेल नहीं खा रही है। कुछ ऐसे खाते पाए गए जिसकी जानकारी विभाग में भी नहीं थी।

कर्मचारी बोले, खत्म हो आउटसोर्सिंग व्यवस्था

इंप्लाइज प्रॉविडेंट फंड स्टाफ फेडरेशन के राष्ट्रीय सलाहकार राजेश कुमार शुक्ला ने आउटसोर्स व्यवस्था पर नाराजगी जताई है। उनका क हना है कि वित्तीय मामलों को भी आउटसोर्स किया जा रहा है। यह उचित नहीं है। एक बाहरी कंपनी के कर्मचारियों के पास विभाग की हर गोपनीयता की जानकारी है। यही स्थिति रही तो इससे भी बड़े घोटाले सामने आएंगे। विभाग को ऐसे कामों के लिए स्थायी कर्मचारियों-अफसरों की नियुक्ति करनी चाहिए।

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Author: Musing India

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