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Negligence: Poor family wandering for treatment with Ayushman card, elderly man dies

लापरवाही: आयुष्मान कार्ड लेकर इलाज के लिए भटकता रहा गरीब परिवार, बुजुर्ग ने तोड़ा दम

बरेली के मतलूब हुसैन के हाथ जब आयुष्मान कार्ड आया था तब शायद उन्होंने नहीं सोचा होगा कि इसी कार्ड के धोखे में एक दिन उनकी जान चली जाएगी। मंगलवार रात उनकी हालत बिगड़ी तो परिवार के लोग उन्हें एक-एक कर शहर के चार मशहूर अस्पतालों में ले गए, लेकिन आयुष्मान कार्ड देखते ही उन्हें बाहर कर दिया गया। सीएमओ को फोन किया तो उन्होंने सुबह लिखित शिकायत लेकर दफ्तर आने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया, मगर सुबह होने से पहले ही मतलूब हुसैन दुनिया से कूच कर गए।

प्रेमनगर इलाके के दीवानखाना में रहने वाले 60 वर्षीय मतलूब की तबीयत मंगलवार शाम अचानक बिगड़ गई। घरवाले रात करीब आठ बजे उन्हें लेकर चौकी चौराहे से चौपुला जाने वाले रोड पर एक बड़े अस्पताल में पहुंचे। आयुष्मान कार्ड दिखाया तो स्टाफ ने फिजीशियन न होने का बहाना बनाते हुए उन्हें भर्ती करने से इनकार कर दिया।

मतलूब को इसके बाद स्टेडियम रोड पर एक अस्पताल में ले जाया गया। स्टाफ उन्हें इमरजेंसी वार्ड में ले गया, लेकिन जैसे ही कार्ड दिखाया तो बेड खाली न होने का बहाना बनाने लगा। कहा 12 हजार रुपये जमा करा दो तो इलाज शुरू हो जाएगा। मजबूरी में घिरे परिवार वाले मतलूब को यहां से स्टेशन रोड पर एक अस्पताल ले गए। यहां उन्हें एंबुलेंस से उतारने की भी नौबत नहीं आई।

आयुष्मान कार्ड देखते ही उन्हें भर्ती करने से साफ मना कर दिया गया। उन्हें एक मेडिकल कॉलेज में ले जाने की सलाह दे दी गई। मतलूब के घरवालों ने इस पर अमल भी किया और रात दो बजे मतलूब को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे लेकिन यहां भी आयुष्मान कार्ड ने साथ नहीं दिया। हारकर परिवार उन्हें उसी हालत में लेकर घर लौट आया। सुबह करीब चार बजे मतलूब ने दम तोड़ दिया।

इलाज तो नहीं कर पाएंगे, किराए पर एंबुलेंस चाहिए तो ले जाओ

बीमार मतलूब को किसी अस्पताल ने भर्ती नहीं किया गया लेकिन पर्ची कटवाकर एंबुलेंस जरूर दे दी गई। चौपुला रोड के अस्पताल से पांच सौ रुपये में एंबुलेंस करके वह स्टेडियम रोड के अस्पताल पहुंचे। यहां से आठ सौ रुपये में स्टेशन रोड के अस्पताल के लिए एंबुलेंस मिली। फिर यही एंबुलेंस उन्हें आठ सौ रुपये में मेडिकल कॉलेज ले गई। मेडिकल कॉलेज से भी किराये की एंबुलेंस में परिवार बुजुर्ग को लेकर घर लौटा।

देर रात एक महिला ने फोन पर शिकायत की थी। उन्हें लिखित शिकायत देने को बोला था। मदद मांगने पर मरीज को मेडिकल कॉलेज ले जाने को भी कहा था। फिर दोबारा उनका फोन नहीं आया। निजी अस्पतालों का यह रवैया गलत है। वे सरकार की महत्वपूर्ण योजना बेकार कर रहे हैं। अपना फायदे के लिए योजनाओं में शामिल होते हैं और फायदा न हो तो हाथ खींच लेते हैं। शिकायत मिली तो इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। – डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ

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