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NBCC will complete all incomplete projects of Delhi NCR

दिल्ली-एनसीआर के सभी अधूरे प्रोजेक्ट एनबीसीसी पूरे करेगा

चुनाव तारीखों के ऐलान से पहले सरकार दिल्ली-एनसीआर में घर घरीदने वालों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार उन सभी अटके प्रोजेक्ट को पूरा करने का जिम्मा नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) को देने जा रही है।

वित्त और शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में इस पर फैसला लिया गया है। बैठक में एनबीसीसी के अधिकारी भी शामिल थे। कंपनी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक सरकार ने सभी प्रोजेक्ट पर रिपोर्ट मांगी है ताकि काम जल्द शुरू किया जा सके। इन प्रोजेक्ट के लिए अलग फंड बनाने पर भी सहमति बनी है। साथ ही कंपनियों की खाली जमीन के व्यवसायिक इस्तेमाल से रकम जुटाने को भी हरी झंडी दी जा चुकी है। एनबीसीसी सूत्रों ने फंड की दिक्कत से इनकार किया है। उनके मुताबिक बैंकों से कर्ज मिल जाएगा।

रिपोर्ट के बाद बोली लगेगी

एनबीसीसी के लिए एक साथ सभी प्रोजेक्ट बनाना संभव न हुआ तो केंद्र दूसरी कंपनियों से भी बोली मंगा सकता है। हालांकि एनबीसीसी की रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर फैसला होगा।

3.25 लाख घर खरीदार

दिल्ली-एनसीआर में करीब 3.25 लाख घर खरीदार आशियाने के इंतजार में हैं। कुछ प्रोजेक्ट आधे बने हैं तो कई में काम तक शुरू नहीं हुआ है। सभी औसतन 5 साल देरी से चल रहे हैं।

ग्रेटर फरीदाबाद में फ्लैट के लिए लड़ रहे 22 हजार निवेशक

अधूरे रिहायशी प्रोजेक्ट को नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) से पूरा करवाने के केंद्र सरकार के फैसले से ग्रेटर फरीदाबाद के करीब 22 हजार निवेशकों को कुछ आशियाना मिलने की कुछ उम्मीद बंधी है। हालांकि निवेशक गृह प्रवेश करने के बाद ही ही पूरी तरह राहत की सांस लेंगे, लेकिन सरकार के इस फैसले से निवेशकों में खुशी की लहर है।

20 प्रोजेक्ट नहीं हुए पूरेग्रेटर फरीदाबाद में करीब 20 प्रोजेक्ट अधूरे हैं। इनमें करीब 22 हजार निवेशकों का पैसा फंसा हुआ है। वर्ष 2009 तक यह प्रोजेक्ट पूरे हो जाने चाहिए थे लेकिन आठ वर्ष ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी लोगों को उनका आशियाना नहीं मिला है। अधिकांश प्रोजेक्ट ग्रेटर फरीदाबाद में ही हैं। कुछ फ्लैट जिला पलवल में भी हैं।

आर्थिक संकट में फंस गए निवेशकअपना घर के लिए निवेश करने वाले निवेशक बिल्डर्स की वजह से आर्थिक संकट में बुरी तरह फंस चुके हैं। बैंक से कर्ज लेने के बाद किराये के मकान में रहने को मजबूर हैं। बहुत से निवेशकों ने तो अपनी समूची जमा पूंजी खर्च करने के बाद आभूषण तक बेच डाले हैं। ऐसे भी काफी निवेशक हैं, जिनको बैंक की किस्त और मकान का किराया चुकाने के लिए पुश्तैनी जमीन तक बेचनी पड़ी है। क्योंकि निर्धारित समय के आठ वर्ष बाद भी घर नहीं मिलने की वजह से किराये में मकान में रहता उनकी मजबूरी हो गया है।

चुनावी घोषणा मान रहे कुछ निवेशकअधूरे प्रोजेक्ट को एनबीसीसी के पूरा करवाने के केंद्र सरकार के फैसले को कुछ निवेशक चुनाव की नजर से भी देख रहे हैं। ग्रेटर फरीदाबाद रेजिडेंटस एसोसिएशन की पदाधिकारी रेणू का कहना है कि लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, इसको लेकर केंद्र सरकार ने यह फैसला किया है। हालांकि चुनाव की आचार संहिता लागू होने के बाद धरातल पर कुछ नहीं हो पाए। हालांकि फिर भी उनको इस फैसले से कुछ उम्मीद जगी जरूर है, लेकिन जब तक उनको घर में कब्जा नहीं मिलने तब तक उनको विश्वास होना बहुत मुश्किल है।

Musing India
Author: Musing India

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