छात्र-छात्राओं

I will not send my children to school – The parents of Faridabad

मैं नहीं भेजूंगा अपने बच्चों को स्कूल – फरीदाबाद के अभिभावक

हरियाणा में सरकार जुलाई में स्कूल खोलने पर विचार कर रही है। इसको लेकर अभिभावक व शिक्षाविदों से भी सुझाव मांगे गए हैं। शिक्षा निदेशालय के आदेश पर फरीदाबाद में शनिवार को मीटिंग हुई। दिल्ली स्थित एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया समेत कई संस्थानों ने अपनी स्टडी में जून और जुलाई में मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी का अंदेशा जताया है।

ऐसे में ज्यादातर अभिभावक बच्चों को जुलाई- अगस्त तक स्कूल नहीं भेजना चाहते। इन हालात में कई विशेषज्ञों और अभिभावकों ने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए होम स्कूलिंग और ऑड-इवन क्लासेज का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि अभिभावक छोटे बच्चों को घर पर ही पढ़ाएं, जबकि 10वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को शिफ्ट में स्कूल बुलाया जाए।

8वीं तक के बच्चों को न बुलाएं

पहली से 8वीं कक्षा के विद्यार्थियों को स्कूलों में न बुलाया जाए, क्योंकि इस कक्षाओं तक के बच्चों को इतनी समझ नहीं होती। इस बीमारी में सबसे अहम सोशल डिस्टेंसिंग है। बच्चे सोशल डिस्टेंसिंग नहीं कायम रख पाएंगे। बोर्ड परीक्षा के कारण 10वीं और 12वीं कक्षा के बच्चों को 2 शिफ्ट में बुलाया जाए। -रूचि गुप्ता, अभिभावक

छोटे बच्चे नहीं कर सकते बचाव

ज्यादा मरीज आने पर कैसे स्कूलों को खोला जा सकता है। अगर स्कूल खोलने की भी जरूरत पड़े तो ऑन-ईवन का तरीका अपनाया जाए। छोटे बच्चों के लिए परेशानी सबसे अधिक होगी, वे इस बीमारी से बचाव के तौर-तरीके नहीं अपना सकते। उनकी सेहत बड़ी प्राथमिकता है। आंवला और गिलोय का जूस बच्चों को दिया जाए। – डॉ. हेमंत अत्री

‘मैं नहीं भेजूंगा अपने बच्चों को स्कूल’

स्कूल नहीं खोले जाने चाहिए। इससे बीमारी और अधिक पनप सकती है। इजराइल में स्कूल खुलने पर 1 टीचर से 250 बच्चे संक्रमित हो गए। यह बड़ा उदाहरण है। पढ़ाई से अधिक महत्वपूर्ण बच्चे हैं। पढ़ाई 1 साल नहीं होगी तो इसमें क्या बिगड़ेगा। स्कूल खोले भी जाते हैं तो मैं अपने बच्चों को नहीं भेजूंगा। – योगेंद्र सिंह, डायरेक्टर, ऑर्बिट पावर सिस्टम

स्कूल और बस में रहेगा खतरा

बीमारी को लेकर बच्चे पहले से घबराए हैं। छोटी उम्र के बच्चों को स्कूल भेजने की जगह होम स्कूलिंग कराई जाए। बच्चे ही अधिक संपर्क में आते हैं, उन्हें समझ नहीं होती। बस और फिर स्कूल में संपर्क होना लाजिमी है। स्कूल 2 शिफ्ट में होने चाहिए। कम संख्या में विद्यार्थियों को बुलाया जाए। सुरक्षा के पर्याप्त संसाधन होने चाहिए। – शबनम

ऑनलाइन असाइनमेंट दिए जाएं

जुलाई में स्कूल खोलने का निर्णय जल्दबाजी होगा। मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। 9 जिलों में कोरोना मरीज नहीं हैं, सरकार वहां स्कूल खोलने का डेमो कर सकती है। 8वीं तक के बच्चों को सिर्फ ऑनलाइन असाइनमेंट दें। अभिभावक उन्हें घर पर पढ़ाएं। 10वीं-12वीं के बच्चों को ऑनलाइन और ऐप से पढ़ाया जा सकता है। – गौरव पाराशर, शिक्षाविद

अर्थव्यवस्था के लिए न खोले जाएं स्कूल

अर्थव्यवस्था बढ़ाने के लिए अगर सरकार स्कूल खोलने पर विचार कर रही है तो यह गलत है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल नहीं खोले जाने चाहिए। अगर खोलें भी, स्कूलों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों, 1 बेंच छोड़कर बच्चों को बैठाएं। बच्चों को जागरूक किया जाए, स्कूल मानवीय दृष्टिकोण से न्यूनतम फीस तय करें। – डॉ. अंजु लता सिंह, शिक्षाविद

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One Reply to “I will not send my children to school – The parents of Faridabad”

  1. It’s true atleast schools should not be opened due to this pandemic situation. I will not send my children to school untill unless the situation is 100% controlled. Even if I have to get my children dropped for an year or even more, I have no issues. I cannot put the life of my children to risk. Though, honestly speaking at the time of online classes, the tuition fees should have been reduced to 50% as the schools have no infrastructure cost such as electricity. I sincerely oppose the opening of the schools.

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