किसान क्रांति

Highlights on farmers protests

गिरते तापमान के बावजूद भी किसानों में दिखा जोश

गिरते तापमान के बावजूद किसानों का जोश कम नहीं दिख रहा है। कड़कड़ाती ठंड भी किसानों के कदमों को रोक नहीं पा रही है। स्थानीय इलाके के किसान भी अब अपनी बढ़-चढ़कर भूमिका निभा रहे हैं। खास बात तो यह है कि धरनास्थल पर जहां बुजुर्ग किसान इस आंदोलन की बागडोर संभाले हुए हैं, वहीं महिलाएं भी यहां खाना बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

मध्यप्रदेश से आए किसान नेता भी लंगर में बर्तन धोकर कर रहे हैं सेवा

आंदोलनस्थल पर बहुत ही अजीब नजारा देखने को मिला। मध्यप्रदेश से जो किसान अपने समर्थकों के साथ यहां नारेबाजी करते हुए पहुंचे। आज वे सेवाभाव में जुटे थे। किसान नेता सुरेंद्र सिंह चीमा समेत कई पदाधिकारी खुद बर्तन की धुलाई करते मिले। किसान नेता चीमा ने हिन्दुस्तान को बताया कि उन्हें सेवाभाव से परम संतुष्टि मिलती है। वे किसान के बेटे हैं। किसानों का दुख दर्द भली भांति जानते हैं। इसलिए वे केवल किसान नेता ही नहीं है। यहां धरनास्थल पर बैठे बुजुर्गों के बच्चे हैं। उनकी सेवा करना उनका कर्तव्य बनता है। पंजाब खंडूर साहब से आए सुखविंद्र भट्टी पर दूध गर्म करते हुए मिले। उन्होंने कहा कि यहां उन्हें काम करते बेहद प्रसन्नता हो रही है।

पलवल से लंगर में मदद करने पहुंची महिलाएं

ओल्ड जीटी रोड स्थित गुरुद्वारा से दलजीत सिंह के नेतृत्व में काफी संख्या में महिलाए शुक्रवार को यहां पहुंची। जहां उन्होंने आंदोलनकारी किसानों के लिए चल रहे लंगर में मदद की। यहां रणजीत सिंह के साथ सिमरन कौर, परविंद्र कौर, नरेंद्र कौर, जसप्रीत कौर समेत कई महिलाएं सब्जी काटने में मदद कर रहीं थीं। महिलाओं ने कहा कि वे भी जमीदार की बेटी हैं। पंजाब के शहीद भगत सिंह शहर के रहने वाली हैं। अब पलवल में रहती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ठंड में खुले आसामान के नीचे कड़कड़ाती ठंड में अपनी मांगों पर अडिग किसानों की मांगें माननी चाहिए। अन्नदाता का हर किसी को ख्याल रखना उनकी जिम्मेदारी बनता है। उन्होंने कहा कि वे यहां चल रहे लंगर में सेवा के अलावा आर्थिक तौर पर भी जितना संभव है, उतनी मदद करेंगे।

हुक्का गुड़गुड़ाते रहे भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले आए किसान

धरनास्थल पर किसान हुक्का गुड़गुड़ाते नजर आए। भारतीय किसान यूनियन एनसीआर के अध्यक्ष सुभाष चौधरी व उनके साथ आए उनके समर्थक धरनास्थल पर आए किसान नेताओं के भाषण सुनते हुए हुक्का पीते नजर आए। इस दौरान घोड़ी से पूर्व सरपंच छिदे सिंह नम्बरदार के नेतृत्व में काफी संख्या में ग्रामीण यहां पहुंचे। जो यहां बैठकर हुक्का गुड़गुडाते नजर आए। यहां मोहना से पहुंचे 70 वर्षीय समरजीत के अलावा दशरथ, सीता व नंदलाल समेत काफी संख्या में गांव से आए लोग किसानों की मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते नजर आए।

युवा संगठन पंचायत के बैनर तले काफी संख्या में पहुंचे युवा

जनजागृति पंचायत एवं युवा संगठन पंचायत के तहत काफी संख्या में पलवल व आसपास के गांवों से आए युवाओं ने धरनास्थल पर शिरकत कर आंदोलन को अपना समर्थन दिया। इस दौरान युवाओं ने कहा कि वे समाज सुधार की दिशा में अहम कदम उठाते रहे हैं। नशा मुक्ति व अन्य सामाजिक कार्यों को लेकर कई बार जागरूकता अभियान चला चुके हैं। उनका उद्देश्य केवल समाज हित में कार्य करना है। इस मौके पर बॉक्सर एसोसिएशन के प्रधान अमरीश चौधरी के अलावा काफी संख्या में युवा मौजूद थे। युवाओं के जत्थे में शामिल छज्जु नगर के सतेंद्र चौहान उर्फ कुल्लू नहर में डूबते एक युवक की जान बचा चुके हैं। उन्हें इस कार्य के लिए सम्मान भी मिल चुका है। अब वे किसान आंदोलन में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

कच्चा रास्ते पर बनी रही फिसलन से स्लिप होते रहे वाहन

धरनास्थल के समीप वाहन चालकों को कच्चे रास्ते से हाईवे तक पहुंचना किसी खतरे से खाली नहीं। धरनास्थल के समीप खेतों से अटौंहा चौक पर चढ़ते वक्त काफी ऊंचाई है। जहां वाहनों के चलते हर समय धूल उड़ती रहती है। शुक्रवार को वहां पानी से छिड़काव करवाया गया, लेकिन इसके बाद स्थिति और दयनीय बन गई। जब भी कोई वाहन उस ऊंचाई से हाईवे पर चढ़ने का प्रयास करता तो वहां फिसलन बने होने से वाहन स्लिप होने लग जाता। इससे वाहन चालकों में घबराहट की स्थिति बनी रही। एक कार चालक ने जब कार को चढ़ाने का प्रयास किया तो वह कार पीछे की ओर स्लिप होनी शुरू हो गई। इससे कार में सवार महिला घबरा गई। उसने कार से उतरकर कार के पीछे एक पत्थर लगाकर नीचे की ओर स्लिप होने से रोका। इसके बाद एक अन्य ड्राईवर की मदद लेते हुए उस कार को सड़क तक पहुंचवाया। इससे यहां से गुजरते वक्त वाहन चालकों में काफी घबराहट बनी रहती है।

यूपी से भारतीय किसान यूनियन का जत्था अटोंहा पहुंचा

कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए अटौंहा चौक पर किसानों का आंदोलन शुक्रवार को भी जारी रहा। कड़कड़ाती ठंड के बावजूद किसानों का यहां पहुंचना जारी है। इसी कड़ी में शुक्रवार को भी नारेबाजी करते हुए यूपी से भारतीय किसान यूनियन का जत्था एनसीआर अध्यक्ष सुभाष चौधरी के नेतृत्व में यहां पहुंचा। उनके जोश को देख धरनास्थल पर बैठे लोगों में भी जोश आ गया।

किसान नेता सुभाष चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री को तत्काल प्रभाव से कृषि के तीन नए कानून रद्द करने होंगे। अन्यथा किसान आंदोलन को और भी तेज कर देगा। इस मुद्दे पर देश भर का किसान एकजुट हो चुका है। अब किसान किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं। इसलिए सरकार को समय रहते कृषि के ये तीनों कानून रद्द कर किसान हित में निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि रविवार को यूपी से 500 किसानों का जत्था पलवल के अटौंहा चौक स्थित धरनास्थल पर पहुंचकर किसानों के इस आंदोलन में कूदेगा।

किसान नेता रतन सिंह सौरोत व शिक्षाविद महेंद्र सिंह चौहान के नेतृत्व में भी काफी संख्या में किसान यहां पहुंचे। शिक्षाविद चौहान ने बताया कि औरंगाबाद से प्रतिदन किसान ट्रैक्टरों से यहां पहुंच रहे हैं। इसके अलावा स्थानीय गांवों से भी किसान अपनी भागीदारी निभाग रहे हैं। इसी तरह पलवल ब्लॉक समिति के पूर्व चेयरमैन सोनू बैंसला व एडवोकेट रवि तेवतिया ने भी धरनास्थल पर पहुंचकर किसानों को संबोधित किया।

विधायक करण सिंह दलाल के भाई प्रेम दलाल भी पहुंचे धरनास्थल

विधायक करण सिंह दलाल के भाई प्रेम दलाल भी अपने समर्थकों के साथ धरनास्थल पर पहुंचे। जहां उन्होंने किसान आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए कृषि कानून को रद्द कराए जाने की मांग की। इसके बाद उन्होंने यहां ठहरे मध्यप्रदेश के किसानों का हाल चाल भी पूछा तथा लंगर इंचार्ज से मुलाकात कर उन्हें हर संभव मदद करने का भरोसा दिलाया।

किसानों के समर्थन में टिकरी बॉर्डर पहुंचे बॉक्सर विजेंदर सिंह, बोले- लड़ाई तीन काले कृषि कानूनों से है

नए कृषि कानूनों को वापस कराने की मांग पर अड़े किसानों का आंदोलन आज 23वें दिन भी जारी है। शांतिपूर्वक दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसान सरकार से जल्द से जल्द इन कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। सिंघु बॉर्डर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। किसानों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार बातचीत के लिए बुलाएगी तो हम जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शांति से बैठें, हम यहां शांति से बैठे हैं। कोर्ट ने कहा है कि बात शुरू हो। बीते 8 दिन से बात नहीं हो रही। हम बातचीत के लिए तैयार हैं। वहीं सरकार की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि कानून वापस नहीं होगा, लेकिन संशोधन संभव है।

बता दें कि किसान हाल ही बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों – द प्रोड्यूसर्स ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन) एक्ट, 2020, द फार्मर्स ( एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेज एक्ट, 2020 और द एसेंशियल कमोडिटीज (एमेंडमेंट) एक्ट, 2020 का विरोध कर रहे हैं।

दिल्ली: कांग्रेस नेता और मुक्केबाज विजेंदर सिंह ने टिकरी बॉर्डर पर किसानों के विरोध प्रदर्शन के लिए जमींदारा छात्र संगठन (JSO) द्वारा आयोजित लंगर में भोजन वितरित किया। उन्होंने कहा कि हम यहां अपने देश के किसानों की सेवा के लिए आए हैं। हमारी लड़ाई सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि 3 काले कानूनों के खिलाफ है।

टिकरी बॉर्डर : बॉक्सर और कांग्रेस नेता विजेंदर सिंह कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों का समर्थन करने के लिए आज टिकरी बॉर्डर पहुंचे।

नए कृषि कानूनों को वापस कराने की मांग पर अड़े किसानों का आंदोलन आज 23वें दिन भी जारी है। शांतिपूर्वक दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसान सरकार से जल्द से जल्द इन कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। सिंघु बॉर्डर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। किसानों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार बातचीत के लिए बुलाएगी तो हम जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शांति से बैठें, हम यहां शांति से बैठे हैं। कोर्ट ने कहा है कि बात शुरू हो। बीते 8 दिन से बात नहीं हो रही। हम बातचीत के लिए तैयार हैं। वहीं सरकार की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि कानून वापस नहीं होगा, लेकिन संशोधन संभव है।

बता दें कि किसान हाल ही बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों – द प्रोड्यूसर्स ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन) एक्ट, 2020, द फार्मर्स ( एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेज एक्ट, 2020 और द एसेंशियल कमोडिटीज (एमेंडमेंट) एक्ट, 2020 का विरोध कर रहे हैं।

दिल्ली: कांग्रेस नेता और मुक्केबाज विजेंदर सिंह ने टिकरी बॉर्डर पर किसानों के विरोध प्रदर्शन के लिए जमींदारा छात्र संगठन (JSO) द्वारा आयोजित लंगर में भोजन वितरित किया। उन्होंने कहा कि हम यहां अपने देश के किसानों की सेवा के लिए आए हैं। हमारी लड़ाई सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि 3 काले कानूनों के खिलाफ है।

टिकरी बॉर्डर : बॉक्सर और कांग्रेस नेता विजेंदर सिंह कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों का समर्थन करने के लिए आज टिकरी बॉर्डर पहुंचे।

गाजियाबाद : किसानों ने ट्रैक्टर से सर्विस लेन की बैरिकेडिंग हटाई। यूपी गेट पर एलिवेटेड रोड की तरफ से आने वाले रास्ते पर दो दिन पहले ही बैरिकेडिंग की गई है।

किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव श्रवण सिंह पंढेर ने कहा कि कमेटी बनाना समस्या का हल नहीं है, पहले भी किसानों ने छोटी कमेटी बनाने से इनकार किया था। तोमर जी ने कल जो चिट्ठी लिखी है वो देश को भ्रमित करने वाली है, उसमें कुछ नया नहीं है। कुछ नया होता तो हम उस पर टिप्पणी करते।

कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब के दयाल सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने जो कमेटी बनाई है उसमें हम यकीन नहीं रखते। अगर सरकार बातचीत करके काले कानून वापस लेती है तो ठीक, नहीं तो हम ये मोर्चा नहीं छोड़ेंगे। प्रधानमंत्री को किसानों से बात करनी चाहिए और कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए।

Musing India
Author: Musing India

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