प्रधानमंत्री मोदी के प्रोजेक्ट भीम एप से खाली हो रहे हैं खाते

Cyber criminal’s eye on Prime Minister Modi’s bhim app

प्रधानमंत्री मोदी के प्रोजेक्ट भीम एप से खाली हो रहे हैं खाते
प्रधानमंत्री मोदी के प्रोजेक्ट भीम एप से खाली हो रहे हैं खाते

प्रधानमंत्री मोदी के प्रोजेक्ट भीम एप से खाली हो रहे हैं खाते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट भीम एप के जरिये लेन-देन करने वाले लोगों पर साइबर अपराधियों की नजर है। थाने की एक मुहर मात्र से साइबर अपराधी ऐसे लोगों के बैंक खाते साफ कर रहे हैं। बीते दिनों एसटीएफ ने ऐसे ही एक गिरोह को दबोचा तो चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं।

खुलासा हुआ कि साइबर अपराधी बैंककर्मियों की मदद से भीम एप इस्तेमाल करने वालों का मोबाइल नंबर व अन्य जानकारियां हासिल करके किसी भी थाने में मोबाइल फोन खोने की सूचना देकर नया सिमकार्ड हासिल करते हैं और एप डाउनलोड करके उनके खाते से रकम उड़ा देते हैं।

एसटीएफ के एएसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह ने बताया कि भीम एप साइबर अपराधियों का नया हथियार बन गया है। यह एप उपयोगकर्ता के लिए सुविधाजनक है तो वहीं इसके जरिये साइबर अपराधियों के लिए अकाउंट खाली करना भी बहुत आसान हो गया है।

उन्होंने बताया कि एप डाउनलोड करते वक्त उपयोगकर्ता को अपना मोबाइल नंबर, डेबिट कार्ड का नंबर और डेबिट कार्ड की एक्सपायरी डेट की सूचना दर्ज करानी होती हैं। इसके बाद संबंधित व्यक्ति अपने बैंक से संपर्क कर एक अथवा उससे ज्यादा अकाउंट नंबर को भीम एप से लिंक करा लेता है।

भीम एप में नहीं है रुपये ट्रांसफर करने की सीमा

साइबर अपराधी बैंककर्मियों को लालच देकर उनसे भीम एप उपयोगकर्ताओं के मोबाइल नंबर, डेबिट कार्ड का नंबर और उसकी एक्सपायरी डेट हासिल कर लेते हैं।

इसके बाद वह उपयोगकर्ता के नाम से किसी भी थाने में मोबाइल गुम होने के प्रार्थनापत्र पर पुलिस की मुहर लगाकर मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी से संपर्क करते हैं और वहां से उसी नंबर का दूसरा सिमकार्ड हासिल कर लेते हैं।

इस नए नंबर पर फिर से भीम एप डाउनलोड करते ही साइबर अपराधियों को संबंधित व्यक्ति के अकाउंट की सारी जानकारियां मिल जाती हैं और वह आसानी से रकम दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर कर लेते हैं। अगर एप में एक से ज्यादा बैंक के अकाउंट नंबर हैं तो साइबर अपराधी आसानी से सभी को खाली कर सकते हैं।

एएसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह ने बताया कि भीम एप में रुपये ट्रांसफर करने की कोई लिमिट नहीं तय है। अगर किसी के खाते में पांच-दस या पंद्रह लाख रुपये हैं तो उसे भी एक बार में ही ट्रांसफर किया जा सकता है। यही वजह है साइबर अपराधी सिर्फ उन्हीं लोगों के अकाउंट की जानकारी लेते हैं जिनके खातों में मोटी रकम जमा होती है।

इन कमियों का अपराधी उठा रहे फायदा

गोपनीयता के लिए एप में नहीं है पिन या पासवर्ड का विकल्प

एएसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह ने बताया कि भीम एप में उपयोगकर्ता की गोपनीयता बनाए रखने के लिए कोई भी विकल्प नहीं है। इसे डाउनलोड करते वक्त मोबाइल नंबर, डेबिट कार्ड नंबर और डेबिट कार्ड की एक्सपायरी डेट देनी होती है जो बैंक से लिंक करते ही उसके पास चली जाती है।

साइबर अपराधी एप की इसी कमी का फायदा उठा रहे हैं। एएसपी का कहना है कि अगर भीम एप उपयोगकर्ता के पास पिन या पासवर्ड का विकल्प होता तो शायद साइबर अपराधियों के लिए इससे अकाउंट की रकम उड़ाना उतना आसान नहीं होता।
क्या होना चाहिए : एएसपी का कहना है कि भीम एप को और सुरक्षित बनाने के लिए इसमें बायोमीट्रिक फीचर्स भी शामिल करने चाहिए।

डुप्लीकेट सिमकार्ड लेने की प्रक्रिया में भी सुधार जरूरी

डुप्लीकेट सिमकार्ड लेने की प्रक्रिया भी साइबर अपराधियों की मददगार बन रही है। थाने की मुहर लगाकर कोई भी व्यक्ति किसी के भी नाम से दूसरा सिमकार्ड हासिल कर सकता है। एएसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि इस प्रक्रिया में सुधार होना चाहिए।

क्या होना चाहिए : डुप्लीकेट सिमकार्ड जारी करने के लिए ठीक वही प्रक्रिया अपनाई जाए जो नया सिमकार्ड लेते वक्त की जाती है। यानी मोबाइल नंबर धारक के सभी दस्तावेज लेकर फिर से उसका सत्यापन कराना चाहिए।

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Author: Musing India

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