पूनम यादव

CWG 2018 Gold medal winner Punam Yadav came Varanasi grand welcome

पूनम यादव
पूनम यादव

CWG में गोल्ड मेडल विजेता पूनम यादव पहुंची काशी, एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत

ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल में स्वर्ण पदक जीत कर देश का नाम बुलंद करने वाली काशी की बेटी पूनम यादव शुक्रवार को वाराणसी पहुंची। बाबतपुर एयरपोर्ट पर सैंकड़ों की संख्या में लोग गोल्डेन गर्ल के स्वागत के लिए उमड़े। लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पूनम यादव का भव्य स्वागत किया गया। बाबतपुर से लेकर दांदूपुर तक जगह-जगह विभिन्न संस्थाओं की ओर से बनारस की बेटी का स्वागत किया गया।

पूनम यादव जैसे ही मुख्य टर्मिनल भवन से बाहर निकली लोगों ने उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया उसके बाद टर्मिनल भवन के बाहर जीप में पूनम सवार हुईं और हाथों में तिरंगा लहराते हुए और हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। पूनम के स्वागत के लिए क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी एस एस मिश्रा, विनय कुमार सिंह, कृपा शंकर तिवारी के अलावा पूनम की बहन पूजा यादव, भाई आशुतोष, अभिषेक सहित अन्य रिश्तेदार भी पहुंचे थे।

बाबतपुर एयरपोर्ट पर स्वागत के बाद खुली जीप से उनको शहर तक लाया गया। शहर से होते हुए वह अपने गांव दांदूपुर गई। यहां उनके परिजनों और ग्रामीणों ने फूल-माला से स्वागत किया। हर हर महादेव का उद्घोष और भारत माता की जय के नारे भी लगाए। लोग काशी की बेटी की इस उपलब्धि पर फूले नहीं समा रहे।

पूनम यादव ने कहा कि आज मेरे लिए बहुत बड़ा दिन है। यह मेरी तैयारियों और मेहनत का फल है की मुझे गोल्ड मेडल मिला है। जब मैंने इस खेल में जाने की सोची थी तब पापा के पास खाने के पैसे नहीं हुआ करते थे। वो दूसरों से लेकर मुझे खिलाते थे। आज मैंने पापा का सपना पूरा किया है। उन्होंने इस पूरी सफलता का श्रेय अपने कोच और परिवार को दिया।

बता दें कि महिला वेटलिफ्टर पूनम यादव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 50 लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की। साथ ही उन्हें राजपत्रित अधिकारी की नौकरी भी मिलेगी। बनारस की पूनम यादव ने भारोत्तोलन प्रतियोगिता के 69 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक दिलाकर देश का नाम रोशन किया है। वहीं डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने सोमवार को पूनम यादव के घर पहुंचकर परिजनों को बधाई दी थी।

बनारस में आज सबकी जुबां पर बस एक ही नाम है। और वो है पूनम यादव का नाम। बनारस के दांदूपुर गांव निवासी किसान की बेटी पूनम यादव ने राष्ट्रमंडल खेल गोल्ड मेडल जीतकर न ही देश का मान बढ़ाया, बल्कि अपने मां बाप के उस सपने को भी पूरा किया, जो उन्होंने मुफलिसी के दौर में कभी अपनी खुली आंखों से देखे थे। राष्ट्रमंडल खेल में जब पूनम ने वेटलिफ्टिंग में भारत को पांचवा गोल्ड मेडल दिलाया तो उनके परिवार,गांव सहित पूरे बनारस में में खुशी का माहौल छा गया।

इस उपलब्धि से पूनम के परिजन बेहद खुश हैं। वजह आज पूनम जिस मुकाम पर है, शायद उसकी कल्पना भी परिवार में किसी ने नहीं की थी। पिता कैलाश यादव मामूली किसान हैं और पूनम अब रेलवे में टीटीई है। मां का सपना था कि बेटी इस बार गोल्ड लाए और वो पूरा हो गया। पूनम की मां का कहना है कि बिटिया ने जब से खेलना शुरु किया है, तो घर का हर कमरा मेडल, शील्ड और सर्टिफिकेट से भरा हुआ है। बस कमी है तो गोल्ड की, जो उनकी बेटी ने जीतकर पूरा कर दिया।

घर पहुंची गोल्डन गर्ल पूनम यादव, एयरपोर्ट से दांदूपुर तक पूनम ही पूनम

ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल में वेटलिफ्टिंग के लिए गोल्ड मेडल जीतने के बाद शुक्रवार को काशी पहुंची पूनम यादव का भव्य स्वागत किया गया। बाबतपुर एयरपोर्ट से दांदूपुर गांव तक बस गोल्डन गर्ल पूनम-पूनम का नारा ही गूंजता रहा।

दांदूपुर गांव तक का 17 किलोमीटर का सफर तय करने में वाराणसी की बेटी पूनम को तीन घंटे लग गए। जगह-जगह स्वागत, फूलमालाएं और जोशीले नारों और ढोल-नगाड़े से माहौल उत्सव सरीखा हो गया। शुक्रवार सुबह 9:40 बजे पूनम बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंची। एयरपोर्ट पर उनका स्वागत भारत माता की जय और हर हर महादेव के जयघोष के साथ हुआ।

एयरपोर्ट पर ही पूनम को फूलमालाओं से लाद दिया गया। हर जुबान पर यही नारा था कि देश की बेटी कैसी हो पूनम यादव जैसी हो…। यहां से निकलते ही पूनम गले लग कर मां से मिली और पिता से आशीर्वाद लिया। इसके बाद पूनम खुली जिप्सी में सवार होकर घर के लिए निकली।

रास्ते में सातो महुआ के पास और तरना पर भी सैकड़ों ग्रामीणों और प्रशंसकों ने ढोल-नगाड़े से स्वागत किया। शिवपुर बाजार में तो उत्साही लोगों ने पूनम पर फूलों की वर्षा कर दी। गांव वालों ने उसकी आरती उतारी और फूलमालाओं से लाद दिया। ढोल-नगाड़ों पर झूमते और नारे लगाते हुए लोग पूनम के आगे-पीछे चल रहे थे।

वहीं पूनम जब घर पहुंची तो नित ध्यान धरुं तेरा, बिगड़ी को बना डाला…बोल घर पर बज रहे थे और उसकी पूरी कहानी को भी बयां कर रहे थे। अभावों के बीच कामनवेल्थ में गोल्ड मेडल तक का पूनम का सफर मिसाल बन गया है। पूरा गांव स्वागत को तैयार था। गांव की लड़कियां, महिलाएं और बुजुर्ग हर कोई पूनम को देखने, मिलने और बात करने को बेताब था।

शुक्रवार सुबह आठ बजे घर के बाहर पहुंच चुके लोग पूनम के आने की पल-पल की खबर ले रहे थे। उनके इंतजार का सिलसिला दोपहर 12:50 बजे समाप्त हुआ। पूनम की दादी समदेई और नानी जीउता देवी बार-बार लोगों से पूछ रही थीं कि पूनम कहां पहुंचलीं। पूनम की नानी आंखों की रोशनी खो चुकी हैं लेकिन अपनी नातिन को छूकर उस स्वर्णिम आभा को महसूस करना चाह रही थीं।

दादी तो बात करते-करते आंखों की कोरों को भिगो दे रही थीं। दरवाजे पर पहुंचते ही दादी और नानी ने पूनम को अपने सीने से लगा लिया। गांव की बच्चियों ने गोल्डन गर्ल को छुआ तो पूनम ने सभी से उनका हालचाल पूछा। सबसे पहले पूनम ने घर के मंदिर में मत्था टेका।

Musing India
Author: Musing India

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