State Government committed to encourage cleanliness: Chief Minister Mr. Akhilesh Yadav

Chief Minister Akhilesh Yadav writes letter to Prime Minister Mr Narendra Modi

State Government committed to encourage cleanliness: Chief Minister Mr. Akhilesh Yadav
State Government committed to encourage cleanliness: Chief Minister Mr. Akhilesh Yadav

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से सूखाग्रस्त जनपदों के लिए खाद्यान्न सामग्री उपलब्ध कराने का अनुरोध किया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर प्रदेश के सूखाग्रस्त जनपदों के निवासियों के लिए अरहर दाल और खाद्य तेल सहित खाद्यान्न कम से कम 6 माह तक उपलब्ध कराने हेतु सम्बन्धित को निर्देशित करने का अनुरोध किया है। श्री यादव ने यह भी अनुरोध किया है कि खाद्य तेल उपलब्ध कराना सम्भव न होने की स्थिति में विकल्प के तौर पर 02 किग्रा0 सरसों /तिल प्रति परिवार प्रतिमाह आवंटित करने के लिए लगभग 38 हजार मीट्रिक टन सरसों/तिल सब्सिडाइज्ड दर पर शीघ्रातिशीघ्र आवन्टित करने पर विचार किया जाये। इससे प्रदेश के 50 सूखाग्रस्त जनपदों की जनसंख्या को विषम परिस्थितियों से बाहर आने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया है कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति के दृष्टिगत इस सामग्री पर आने वाला व्यय भार राज्य सरकार के लिए वहन करना सम्भव नहीं है। इस सामग्री के वितरण, परिवहन एवं मार्जिन मनी पर आने वाला व्ययभार राज्य सरकार वहन करने के लिए तैयार है। इस सम्बन्ध में जनपदवार आकलन संलग्न करते हुए प्रदेश शासन के पत्र दिनांक 3 फरवरी, 2016 द्वारा सचिव, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, भारत सरकार से पहले ही अनुरोध किया गया है।

श्री यादव ने लिखा है कि प्रदेश में वर्तमान वर्ष में सूखे के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल में कम वर्षा के बाद लगातार दूसरा वर्ष ऐसा है, जिसमें कृषकों के समक्ष सूखे की विषम स्थिति है। इससे अति गरीब लोगों के सम्मुख खाने-पीने की समस्या के साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य पर भी कुप्रभाव पड़ने की आशंका है।

इस स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश शासन सजग एवं संवेदनशील है। राज्य के 75 जनपदों में से 50 जनपद जिसमें बुन्देलखण्ड के सभी जनपद सम्मिलित हैं, सूखाग्रस्त हैं। इनमें लगभग 28 लाख परिवार अन्त्योदय श्रेणी के हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार इन परिवारों को 35 किलोग्राम प्रति परिवार प्रतिमाह की दर से खाद्यान्न उपलब्ध कराने पर लगभग 32 हजार मीट्रिक टन गेहूं तथा लगभग 68 हजार मीट्रिक टन चावल वितरित किया जाएगा। सूखाग्रस्त जनपदों की कुल जनसंख्या में से अन्त्योदय श्रेणी की यूनिटों की संख्या घटाने के बाद लगभग 11 करोड़ जनसंख्या शेष रह जाती है।

सूखे की विषम स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार का यह सुविचारित मत है कि सूखाग्रस्त जनपदों की समस्त जनसंख्या को ए0पी0एल0 एवं बी0पी0एल0 का भेद किए बगैर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 का लाभ पहुंचाया जाए और 3 किलोग्राम गेहूं तथा 2 किलोग्राम चावल प्रति व्यक्ति प्रतिमाह का वितरण 6 माह तक कराया जाए, जिससे सूखाग्रस्त जनपदों के निवासी इस विषम परिस्थिति से उबर सकें।

मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया है कि सूखाग्रस्त जनपदों के निवासियों को प्रोटीन भी मिल सके, इसके लिए राज्य सरकार ने यह तय किया है कि सूखाग्रस्त जनपदों के समस्त अन्त्योदय परिवारों एवं पात्र गृहस्थियों के लिए 2 किलोग्राम अरहर दाल तथा 1 किलोग्राम खाद्य तेल प्रति परिवार प्रतिमाह वितरित कराया जाए। इस प्रकार प्रदेश के सूखाग्रस्त जनपदों के लिए प्रतिमाह लगभग 37 हजार मीट्रिक टन गेहूं, लगभग 29 हजार मीट्रिक टन चावल, लगभग 38 हजार मीट्रिक टन अरहर दाल तथा लगभग 1.89 करोड़ लीटर खाद्य तेल की प्रतिमाह आवश्यकता होगी।

इस सम्बन्ध में जनहित याचिका संख्या-डब्ल्यू0पी0 (सी) 857/2015-स्वराज अभियान बनाम यूनियन आॅफ इण्डिया एवं अन्य में दिनांक 18 जनवरी, 2016 तथा 1 फरवरी, 2016 को मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्देश भी दिये गये हैं।

State Government request GoI to provide for a minimum period of six months Arhar Daal, edible oil and food grains for drought-hit districts

The entire population of these districts should be benefitted under the National Food Security Act 2013, without any bias of APL and BPL

In case of non-availability of edible oil, mustard/sesame oil allotment should be considered

Drought hit districts would require 37,000 metric tonnes wheat, 29,000 metric tonne rice, 38,000 metric tonne Arhar Daal and 1.89 crore litre oil per month

State Government ready to bear the cost of distribution, transportation and expenses on margin money

Uttar Pradesh Chief Minister Mr. Akhilesh Yadav has written to Prime Minister Mr Narendra Modi seeking directions to concerned authorities to provide, for at least six months, edible oil and food grains for residents of the drought-hit districts of the state.

Mr. Yadav has also requested that in case providing edible oil was not possible, as an alternative, two litres of mustard/sesame oil be provided per family every month. This would come out to be 38,000 metric tonne mustard/sesame oil. This will be a great help to the population residing in 50 drought-hit districts of the state, the CM pointed out.

The Chief Minister has apprised the Prime Minister that keeping in mind the financial condition of the state, it was not possible for it to bear this cost though it was ready to bear the cost of distribution, transportation, and expenses on the margin money. With regards to this, a letter written to secretary, consumer affairs, food and public distribution, Government of India, on January 3, 2016 has also been attached.

Mr. Yadav has also written that people in drought-hit districts and farmers were facing the most difficult times due to the drought and it was for the second consecutive year of poor and scanty rainfall, that this year farmers are faced with extreme difficulties.

The state government, he underlines, was alive to the situation and making efforts to mitigate problems faced by farmers. Of the 75 districts in the state, 50 including Bundelkhand, were facing drought and in these 28 lakh families came under the Antyodaya category and under the provisions of the National Food Security Act 2013, these families are to be given 35 kg food grain per month for which 32,000 metric tonnes of wheat and 68,000 metric rice.

After subtracting the Antyodaya units from the total population, 11 crore population is left out. Owing to the acute drought conditions, the state government is of the view that without a bias of APL and BPL, under the NFSA 2013, 3 kg wheat and 2 kg rice, per person per month for the next six months so that the drought-hit districts can battle the problem out.

The Chief Minister also pointed out that the people of these districts should be given protein as well and hence the state government has decided that all Antyodaya families and eligible households be given 2 kg arhar daal, 1 litre edible oil per family.

In this manner, drought hit districts would require 37,000 metric tonnes wheat, 29,000 metric tonne rice, 38,000 metric tonne Arhar Daal and 1.89 crore litre oil per month. With regards to this, the honourable Supreme Court of India has also issued directions on January 18, 2016 and February 1, 2016 in a public interest litigation (PIL) # WP (C) 857/2015-Swaraj Abhiyan Vs Union of India.

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Author: Musing India

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