मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव 14 सितम्बर, 2015 को उ0प्र0 हिन्दी संस्थान, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में हिन्दी के विद्वानों को सम्मानित करते हुए।

Chief Minister Akhilesh Yadav honoured writers in Lucknow on ‘Hindi Diwas’

मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव 14 सितम्बर, 2015 को उ0प्र0 हिन्दी संस्थान, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में हिन्दी के विद्वानों को सम्मानित करते हुए।
मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव 14 सितम्बर, 2015 को उ0प्र0 हिन्दी संस्थान, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में हिन्दी के विद्वानों को सम्मानित करते हुए।

वरिष्ठ कथाकार काशीनाथ सिंह को भारत-भारती सम्मान

काशी नाथ सिंह को भारत-भारती सम्मान, मृदुला गर्ग को लोहिया साहित्य सम्मान, विनोद कुमार शुक्ल को हिंदी गौरव सम्मान तथा डॉ. कृष्ण बिहारी मिश्र को महात्मा गांधी साहित्य सम्मान के साथ लगभग 68 साहित्यकारों को हिंदी दिवस पर हिंदी संस्थान में सम्मानित किया गया। समारोह में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि हिंदी साइंस व टेक्नोलॉजी से आज भी दूर है लेकिन आने वाले समय में यह जरूर इन क्षेत्रों में भी पढ़ी-लिखी जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव 14 सितम्बर, 2015 को उ0प्र0 हिन्दी संस्थान, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए।
मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव 14 सितम्बर, 2015 को उ0प्र0 हिन्दी संस्थान, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत से देश अपनी भाषा में काम करके तरक्की के रास्ते पर हैं। हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं का भी वही स्थान होना चाहिए। मैं कई बार हिंदी संस्थान आ चुका हूं। मुख्यमंत्री बनने के बाद जब पहली बार यहां आया था तो यहां के सूरतेहाल बेहद खराब थे। आज स्थिति काफी बदल गई है। उन्होंने हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह को धन्यवाद दिया कि उनकी वजह से इतने सारे साहित्यकारों से मिलने का सौभाग्य मिला।

मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव 14 सितम्बर, 2015 को उ0प्र0 हिन्दी संस्थान, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में हिन्दी के विद्वानों को सम्मानित करते हुए।
मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव 14 सितम्बर, 2015 को उ0प्र0 हिन्दी संस्थान, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में हिन्दी के विद्वानों को सम्मानित करते हुए।

इन्हें मिला पुरस्कार
पांच लाख:
– काशी नाथ सिंह, भारत-भारती सम्मान
चार लाख:
– मृदुला गर्ग, लोहिया साहित्य सम्मान
– विनोद कुमार शुक्ल, ङ्क्षहदी गौरव सम्मान
– डॉ. कृष्ण बिहारी मिश्र, महात्मा गांधी साहित्य सम्मान
– प्रो. अभिराज राजेंद्र मिश्र, पं. दीनदयाल उपाध्याय साहित्य सम्मान
– डॉ. राम कृष्ण राजपूत, अवंतीबाई साहित्य सम्मान
– कर्नाटक ङ्क्षहदी प्रचार समिति, बेंगलुरु, राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडन सम्मान
दो लाख:
– राधागोविंद पाठक, लोक भूषण सम्मान
– वेदा राकेश, कला भूषण सम्मान
– डॉ. ओम प्रकाश मिश्र, विद्या भूषण सम्मान
– प्रो. यतीश अग्रवाल, विज्ञान भूषण सम्मान
– विष्णु नागर, पत्रकारिता भूषण सम्मान
– डॉ. पुष्पा सक्सेना, प्रवासी भारतीय ङ्क्षहदी भूषण सम्मान
– डॉ. चक्रधर नलिन, बाल साहित्य भारतीय सम्मान
– डॉ. भालचंद्र तिवारी, मधुलिमये साहित्य सम्मान
– यज्ञ शर्मा, पं. श्रीनारायण चतुर्वेदी साहित्य सम्मान
– डॉ. हनुमान प्रसाद गुप्ता, विधि भूषण सम्मान
एक लाख:
– डॉ. हेमराज सुंदर, ङ्क्षहदी विदेश प्रसार सम्मान
– सुरेश चंद्र शुक्ल ‘शरद आलोकÓ, ङ्क्षहदी विदेश प्रसार सम्मान
पचास हजार:
– डॉ. विनोद जैन, विश्वविद्यालयस्तरीय सम्मान
– डॉ. सुधीर कुमार शुक्ला, विश्वविद्यालयस्तरीय सम्मान
– इसके अलावा 2014 वर्ष में प्रकाशित पुस्तकों पर नामित 28 लेखकों को पचास हजार रुपये पुरस्कार राशि दी गई।
पच्चीस हजार :
– डॉ. सोनरूपा विशाल को उनकी पुस्तक ‘लिखना जरूरी है’ के लिए हरिवंश राय बच्चन युवा गीतकार सम्मान देकर पच्चीस हजार रुपये पुरुस्कार राशि दी गई।
बीस हजार:
– प्रकाशित पुस्तकों पर सर्जना पुरस्कार पाने वाले 30 लेखकों को बीस हजार रुपये भेंट किए गए।

मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव 14 सितम्बर, 2015 को उ0प्र0 हिन्दी संस्थान, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में हिन्दी के सम्मानित विद्वानों के साथ।
मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव 14 सितम्बर, 2015 को उ0प्र0 हिन्दी संस्थान, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में हिन्दी के सम्मानित विद्वानों के साथ।

लोक का ध्यान रखा : काशीनाथ
UttamUP.com से बातचीत में काशीनाथ सिंह ने कहा किहिंदी भले ही राष्ट्रभाषा न बन पाई हो पर लोक ने तो उसे विशाल हृदय के साथ स्वीकार कर ही लिया है। अब विश्वास हो चला है कि हिंदी राष्ट्रभाषा बनेगी। वर्ष 1990 के आसपास जब ग्लोबलाइजेशन शुरू हुआ, ऐसा लगा कि हिंदी तो गई। अंग्रेजी अखबार, अंग्रेजी स्कूल यहां तक कि चैनल भी अंग्रेजी हो चले थे। लेकिन यह हिंदी ही थी, जिसके समक्ष उदारीकरण व बाजार को घुटने टेकने पड़े।1857 की पूरी लड़ाई हिंदी के माध्यम से लड़ी गई। महात्मा गांधी ने हिंदी के महत्व को समझा। अब मौजूदा प्रधानमंत्री ने गुजरात छोड़ हिंदी प्रदेश को चुना है। संयोग ही रहा कि जब-जब हिंदी को दबाने की कोशिश हुई, जड़ें और गहरी होती गईं और वह हरी होती रही। एक वक्त अंग्रेजी की बहुत बातें होने लगीं थीं।

मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव 14 सितम्बर, 2015 को उ0प्र0 हिन्दी संस्थान, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में हिन्दी के विद्वानों को सम्मानित करते हुए।
मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव 14 सितम्बर, 2015 को उ0प्र0 हिन्दी संस्थान, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में हिन्दी के विद्वानों को सम्मानित करते हुए।

लेखकों ने बुंदेली, मैथिली, छत्तीसगढ़ी आदि भारतीय भाषाओं की ओर ध्यान दिलाया कि यदि हिंदी में शब्द कम पड़ रहे हों तो इनसे ले लो। आज जरूरत है कि यदि तकनीकी शब्द हिंदी में कम पड़ रहे हों तो इन भाषाओं में खोजें। ज्यादातर राष्ट्रीय अखबार हिंदी में प्रकाशित हो रहे हैं। मैं पचपन साल से लिख रहा हूं। शुरुआत कृषि विश्वविद्यालय में नौकरी से की। एक सवाल ने झकझोरा कि क्या जीविका ही जीवन है? बस उसी खोज में नजर प्रेमचंद की तरफ गई। आलोचकों के बजाय पाठकों की ओर नजर गई। पूरा लेखन पाठक की खोज करने में निकाल दिया। पच्चीस साल कहानियां व संस्मरणों में गुजारने के बाद लगा कि हिंदी की दुनिया बहुत बड़ी है। रुचि हिंदी में हो या नहीं प्रेमचंद को सब पढ़ते हैं। लोकप्रियता को नहीं हमेशा लोक का ध्यान रखा। खुशी है कि हिंदी राज्यों व देश की सीमाएं लांघ विदेश तक फैल चुकी है।

 

 

 

Musing India
Author: Musing India

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