Flat

Builders are not giving flat in Greater Faridabad

हरियाणा के ग्रेटर फरीदाबाद में आशियाने की चाह में डूबी जीवन भर की जमा पूंजी

हरियाणा के ग्रेटर फरीदाबाद में 15 साल से आशियाने के इंतजार में जिंदगी भर की जमा पूंजी लगाने वाले आज भी बेघर हैं। वर्तमान में 20 हजार लोगों को फ्लैट मिलना तो दूर उनके करीब पांच हजार करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। शासन-प्रशासन की बेरुखी का फायदा बिल्डरों ने उठाया और लोगों से अतिरिक्त वसूली की।

एक फ्लैट की कीमत में 10 से 12 लाख रुपये की बढ़ोतरी भी कर दी गई। लोगों की जिंदगी भर की कमाई लूटने के बाद बिल्डर गायब हो गए। ऐसे में ग्रेटर फरीदाबाद में ऐसे 20 हजार से अधिक निवेशक हैं, जिनको अपना आशियाना मिलने का सपना टूटता दिख रहा है। आशियाने के लिए ऐसे लोग केवल नौकरशाहों के दर पर ठोकरें खा रहे हैं बल्कि न्याय के मंदिर में भी दस्तक दे चुके हैं।

ऐसे विकसित होना शुरू हुआ था ग्रेटर फरीदाबाद

वर्ष 2006 से फरीदाबाद की लगभग 7500 एकड़ जमीन पर 15 सेक्टर काटे गए। यहां देशभर के दो दर्जन से अधिक बिल्डर ग्रुप फ्लैट बना कर बेच रहे हैं। नहरपार लगभग 50 हजार फ्लैट, फ्लोर, विला प्लॉट हैं। सन 2004-05 से एनसीआर के लोगों ने यहां बुकिंग कराना शुरू किया था। इस दौरान फ्लैट की 90 फीसदी राशि निवेशकों से वसूली जा चुकी थी। प्रॉपर्टी बाजार में बूम को देखते हुए बिल्डरों ने एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरे प्रोजेक्ट में फंसा दिया। कई नामी बिल्डरों ने निवेशकों का पैसा विदेशों में भी इन्वेस्ट कर दिया। 2013-14 के आसपास प्रॉपर्टी बाजार में आई मंदी के चलते नए प्रोजेक्ट में निवेश करने से खरीदारों ने हाथ खींच लिए। इसका असर ये हुआ कि पुराने प्रोजेक्ट भी अधर में लटके रहे।

उधर नहरपार प्रोजेक्ट में देरी होने से बुकिंग कराने वाले लोगों में हलचल पैदा हो गई और उन्होंने रकम वापस लेने की मांग की, लेकिन बिल्डर के पास वापस करने के लिए रकम नहीं बची और फ्लैट भी नहीं बन पाए। इससे लोगों ने बिल्डरों के खिलाफ मामले दर्ज कराने शुरू कर दिए। अधिकारियों, सरकार व बिल्डरों के खिलाफ कई प्रदर्शन तक हुए, मगर कोई हल नहीं निकला।

अब नहीं मिल रहे बिल्डर

निवेशकों का आरोप है कि काफी समय से बिल्डर भूमिगत हो गए हैं। अब उनके ऑफिस में केवल बाउंसर दिखते हैं। जो हंगामा करते हैं, उन्हें सबक सिखा दिया जाता है। बिल्डर मुंह छिपाते फिर रहे हैं। कई बिल्डर विदेश भाग चुके हैं तो कई धोखाधड़ी के मामलों में जेल जा चुके हैं। खुद को लुटा पिटा देखकर निवेशकों ने शासन प्रशासन से गुहार लगाई और बिल्डरों पर नकेल कसने की मांग की। ऐसे बिल्डरों की संपत्ति कुर्क होनी चाहिए। सरकार उनके प्रोजेक्ट अपने हाथ में ले ले और सभी को फ्लैट दिए जाएं।

ये है नियम

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के नियमानुसार यदि कोई भी बिल्डर नियमों की अनदेखी करता है तो बिल्डर का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके अलावा निवेशक के साथ धोखाधड़ी करने में बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है। धोखाधड़ी में सजा व जुर्माना दोनों का प्रावधान है। एसआरएस ग्रुप के दो प्रोजेक्ट के लाइसेंस विभाग रद्द भी कर चुका है।

बिल्डरों के खिलाफ ये हैं शिकायतें

  • नहर पार ग्रेटर फरीदाबाद में आधा दर्जन से अधिक बिल्डरों पर 150 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं।
  • बिल्डरों के खिलाफ सैकड़ों शिकायतें पांच साल से जिला स्तर से लेकर चंडीगढ़ तक शासन प्रशासन तक की जा चुकी हैं।
  • निवेशकों ने सेक्टर-12 जिला मुख्यालय से लेकर शहर के अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन किए हैं।
  • बिल्डरों के खिलाफ लगातार बढ़ती जा रही शिकायतों के वर्ष 2011 में तत्कालीन जिला उपायुक्त डा. प्रवीण कुमार ने एक कमेटी का गठन किया था। इसमें खुद उपायुक्त अध्यक्ष और एसडीएम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अधिकारी सहित अन्य अधिकारी शामिल किए गए। मगर अभी तक कमेटी ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की है।

लोगों ने अपने सपनों के घर की तलाश में ग्रेटर फरीदाबाद में जिंदगी भर की पूंजी लगा दी। इसके लिए लोगों ने बैंक से कर्ज, दोस्तों से रुपये उधार और अपने पीएफ अकाउंट तक से रुपये निकलवा लिए थे। मगर बिल्डर उनके जीवन भर की कमाई लूट कर फरार हो गए। बिल्डरों ने लोगों के साथ धोखा किया। अब निवेश किए रुपये ही नहीं उनके आशियाने की आस भी धूमिल होती जा रही है। – प्रमोद मिनोचा, अध्यक्ष, ग्रेटर फरीदाबाद वेलफेयर एसोसिएशन

मैने 2010 में री-सेल में ग्रेटर फरीदाबाद स्थित एडल डिवाइन सोसायटी में फ्लैट खरीदा था, जोकि 2012 में बिल्डर ने हमें सौंपना था। मगर आज 2019 हो गया है और फ्लैट का कुछ अता पता नहीं हैज। बैंक की किश्तें और मकान का किराए से परेशान होकर मैने 2016 में आधी अधूरी हालत में बिल्डर से फ्लैट लेकर उसमें रहना शुरू कर दिया। मगर अब बिल्डर बैंकों के करोड़ों रुपये लेकर फरार है और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल का डंडा वहां रह रहे लोगों पर आ पड़ा है। अब न जाने क्या होगा। – अभिषेक द्विवेदी, एडल डिवाइन सोसायटी

करीब चार साल पहले एसआरएस के प्रोजेक्ट के निवेश किया था। बिल्डर ने दो साल में फ्लैट देने का वादा किया था। मगर चार साल बीत गए। एसआरएस ग्रुप के चेयरमैन और निदेशक जेल में हैं। जो बाहर हैं वे फरार हैं। पता नहीं अब कैसे फ्लैट मिलेगा और रुपये वापस कैसे मिलेंगे। निवेशकों को कोई भी कुछ बताने वाला नहीं है। लोग परेशान हैं।- संजीव शर्मा, एसआरएस में निवेशक

सिर पर एक अदद छत के लिए एसआरएस सोसायटी में जीवन भर की जमा पूंजी लगा कर आशियाना बुक करवाया था। काफी मशक्कतों के बाद कुछ साल पहले फ्लैट का कब्जा तो मिल गया, मगर आज तक रजिस्ट्री नहीं हुई है। रजिस्ट्री कैसे होगी सोसायटी प्रबंधन कुछ बताने को तैयार नहीं है।- सवनीत कौर, एसआरएस रॉयल हिल्स निवासी

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Author: Musing India

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