कैश ट्रांजेक्शन के नए नियम

Banks are doing fraud with loan customer

कैश ट्रांजेक्शन के नए नियम
कैश ट्रांजेक्शन के नए नियम

लोन के नाम पर आपको धोखा दे रहे बैंक, रिसर्च से हुआ खुलासा

छोटे कर्ज दे रहे बैंक और गैर वित्तीय बैंकिंग कंपनियां (एनबीएफसी) ग्राहकों को धोखा दे रही हैं। वे पर्सनल और कंज्यूमर लोन देते समय कई तरह के हिडन चार्ज (छिपे शुल्क) नहीं बताती, न ही अपनी वेबसाइट पर प्रतिमाह किस्तों की सही जानकारी दे रही हैं।

भारतीय प्रबंध संस्थान लखनऊ और भारत के फाइनेंशियल प्लानिंग स्टैंडर्ड बोर्ड (एफपीएसबी) ने प्रमुख बैंकों और एनबीएफसी पर सात महीने के अध्ययन के बाद जो रिपोर्ट तैयार की है उसमें यह बात सामने आई है।

आईआईएम लखनऊ के प्रो. देवाशीष दासगुप्ता ने ‘नैविगेटर ऑफ रिस्पॉन्सिबल लैंडिंग’ नाम से जारी इस रिपोर्ट के बारे में बुधवार को यहां बताया कि देश में इस समय ऐसी कोई नीति नहीं है जिससे कर्ज दे रही ये संस्थाएं सभी जानकारियां सार्वजनिक करने को बाध्य हों। ऐसे में इस रिपोर्ट के बाद उम्मीद है कि नीति निर्माता इस बारे में विचार करेंगे ताकि कर्ज लेने वालों का शोषण बंद हो।

वेबसाइटों ने खोली पोल

इस रिसर्च का दूसरा हिस्सा बैंकों द्वारा अपनी वेबसाइटों पर दी जा रही जानकारी का विश्लेषण था। इसमें पता चला कि बैंक और एनबीएफसी जानकारियां छिपा रहे हैं। पेश है कुछ उदाहरण-

पंजाब नेशनल बैंक यह तक नहीं बताता कि लोन के लिए ग्राहक को कितने दस्तावेज चाहिए होंगे। वह ईएमआई कैलक्यूलेटर भी नहीं देता।
कोई भी लोन दे रही संस्था यह नहीं बता रही कि पर्सनल लोन का फीस स्ट्रक्चर क्या होगा?

एचडीबीएफएस और टाटा कैपिटल के अलावा कोई नहीं बताता कि कम से कम कितना कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन लिया जा सकता है?
इस श्रेणी के लोन का फीस स्ट्रक्चर भी कोई बैंक या एनबीएफसी नहीं बता रही, न ही उनके पास सटीक ईएमआई कैलक्यूलेटर है।

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