संघमित्रा मौर्या

All Medical arrangements failed in Badaun

बदायूं में फेल हुए सारे इंतजाम, चली गई 82 लोगों की जान, भाजपा सांसद संघमित्रा मौर्या से लेकर मंत्री और विधायक देखते रहे तमाशा

कोरोना की दूसरी लहर में लोगों की जान जाती रही। बदायूं की भाजपा सांसद संघमित्रा मौर्या ,अफसरों से लेकर मंत्री और विधायक तमाशा देखते रहे। देखते ही देखते सारे इंतजाम फेल हो गए। आक्सीजन की कमी से जाने कितने लोग काल के गाल में समा गए। 82 लोगों की मौत का यह आंकड़ा तो सरकारी रिकार्ड में दर्ज है। जाने कितने लोग बिना जांच कराए काल का ग्रास बन गए। उपचार के लिए राजकीय मेडिकल कालेज में संसाधन तो उपलब्ध रहे। लेकिन, उपकरण संचालन को मेडिकल स्टाफ का टोटा रहा। हर कोई सिस्टम को दोष देता रहा, लेकिन सिस्टम सुधारने की जिद्दोजहद नहीं की।

अप्रैल के मध्य में कोरोना संक्रमण तेजी से पांव पसार रहा था। तब अधिकारी और नेता चुनाव कराने में व्यस्त थे। मेडिकल कालेज से लेकर जिला अस्पताल तक आक्सीजन की कमी से लोगों की मौत होती रही। लेकिन, मंत्री, सांसद और विधायक पंचायत चुनाव में सियासी पारा चढ़ाने में व्यस्त रहे। कोरोना मरीजों के लिए राजकीय मेडिकल कालेज को कोविड अस्पताल तो बना दिया, लेकिन वहां इलाज की क्या व्यवस्था है कोई देखने वाला नहीं था। रात में आक्सीजन खत्म हो जा रहा था। शाम को सामान्य हालत में दिख रहे मरीज सुबह दुनिया छोड़ दे रहे थे। स्वजन खुद तलाश कर आक्सीजन सिलिडर लेकर पहुंचा रहे थे। जिम्मेदार अधिकारी आदेश जारी कर अपनी पीठ थपथापते रहे। सरकार को सब कुछ ठीकठाक दिखाने की कोशिशें होती रहीं। मरीज बढ़ते रहे, लेकिन अतिरिक्त बेड के इंतजाम तब किए गए जब पानी सिर से ऊपर चला गया।

पहले 90 बेड था, बाद में बढ़ाकर 140 कराया। विशेष ट्रेन से बरेली आक्सीजन पहुंचने के बाद किल्लत दूर हुई, लेकिन मंत्री और विधायक खुद इसका श्रेय लेने की होड़ में रहे। मेडिकल कालेज में दो आक्सीजन प्लांट लगवाने की मंजूरी मिली। एक प्लांट के लिए तो सरकार ने बजट दे दिया, जबकि दूसरा प्लांट विधायक निधि से लगना है। इसमें भी सत्ता के मंत्री और विधायक पीछे रह गए। विपक्षी दल के विधायक और एमएलसी अपनी निधि से 93 लाख का बजट आवंटित करा दिया। नगर विकास राज्यमंत्री महेश चंद्र गुप्ता, शेखूपुर विधायक धर्मेंद्र शाक्य दावा करते रहे कि शासन से व्यवस्था सुधारने की बात की है। मुख्यमंत्री से भी बात करने की बात भी कहते रहे, लेकिन, धरातल पर कोई खास सुधार नहीं आ सका। अब भी खतरा टला नहीं है, संक्रमण की रफ्तार भले ही कम हुई है, लेकिन कब बढ़ जाए कुछ पता नहीं है।

संक्रमण बढ़ने के बाद दिल्ली, मुंबई में लाकउाउन लगने पर बड़ी संख्या में प्रवासियों की घर वापसी शुरू हो गई। उनके लिए क्वारंटाइन सेंटर बनाने के कागजी घोड़े ही दौड़ते रहे। बाद में द्रोपदी देवी इंटर कालेज को क्वारंटाइन सेंटर तो बना दिया गया, लेकिन गांवों में क्वारंटाइन सेंटर आज तक नहीं बनाए जा सके।

कोविड मरीजों की मौत की मुख्य वजह समय पर जांच और उपचार न मिलना है। बुखार होने पर भी लोग कोरोना की जांच कराने से बचते रहते हैं। जब लंग्स में संक्रमण बढ़ जाता है तब अस्पताल पहुंच रहे हैं। आक्सीजन लेबल 90 से 94 तक आने पर भी लोग घर में ही रह जा रहे है। इस समय उन्हें आक्सीजन की जरूरत पड़ जाती है। अस्पताल पहुंचने पर स्थिति काफी बिगड़ जा रही है और डाक्टर के पास बचाव के उपाय की गुंजाइश कम हो जाती है। समय से जांच कराकर इलाज से स्वस्थ होने की संभावना अधिक रहती है। – डा.कौशल गुप्ता, जिला संक्रामक रोग विशेषज्ञ

कोरोना की दूसरी लहर की शुरूआत में अव्यवस्था रही थी। आक्सीजन की कमी होने लगी तो मुख्यमंत्री से बात करके पूरी कराई। अब मेडिकल कालेज में आक्सीजन प्लांट लगवाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कालेज के प्राचार्य व्यवस्था नहीं संभाल रहे थे इसलिए उन्हें हटवा दिया गया है। सीएचसी घटपुरी में भी आक्सीजन प्लांट लगवाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकार तीसरी लहर से भी बचाव की तैयारी कर रही है। – महेश गुप्ता, राज्यमंत्री

Musing India
Author: Musing India

musingindia.com is a leading company in Hindi / English online space. musingindia.com is a leading company in Hindi/English online space. Launched in 2013, musingindia.com is the fastest growing Hindi/English news website in India, and focuses on delivering around the clock national and international news and analysis, business, sports, technology entertainment, lifestyle and astrology. As per Google Analytics, musingindia.com gets 10,000 Unique Visitors every month.

Facebooktwitterredditpinterestlinkedinmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *