पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

Akhilesh Yadav on demonetisation – Notebandi ka ek baras nahi, barsi hai

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

नोटबंदी का जश्न दुखद, उद्योगों की बर्बादी के बाद ये एक बरस नहीं बरसी: अखिलेश यादव

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नोटबंदी का एक साल पूरा होने पर इसे केंद्र सरकार द्वारा ‘एंटी ब्लैक मनी डे’ के रूप में सेलीब्रेट किए जाने को दुखद करार दिया है।

गौरतलब है कि आठ नवंबर को नोटबंदी का एक साल पूरा हो रहा है।‌ इस दिन भाजपा व केंद्र सरकार ने कई जगह कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

अखिलेश ने ट्वीट कहा कि नोटबंदी से अर्थव्यवस्‍था बदहाल हो गई है। बेरोजगारी बढ़ी है और कारोबार-उद्योग बर्बाद हो गए हैं। ऐसे में नोटबंदी का जश्‍न मनाना दुखद है।

सपा में सुलह के संकेत, निकाय चुनाव में प्रचार के लिए शिवपाल ने कही बड़ी बात

आगरा पहुंचे सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने अपने भतीजे और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से सुलह के संकेत ‌दिए हैं। एक व्यक्तिगत कार्यक्रम में आगरा आए सपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह ने कहा है कि यदि हाईकमान कहेगा तो वह निकाय चुनाव में सपा प्रत्याशियों के लिए प्रचार करेंगे।

भतीजे अखिलेश से बातचीत के संबंध में उनका कहना है कि अखिलेश यदि उन्हें बुलाएंगे तो वह उनसे जरूर बातचीत करेंगे। शिवपाल सिंह मंगलवार को एक विवाह समारोह में शिरकत करने आए थे। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से हुई बातचीत में गोलमोल जवाब दिए।

नगर निगम के चुनाव में उनके समर्थकों के टिकट काटे जाने पर शिवपाल सिंह ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। कहा कि प्रत्याशियों के चयन के संबंध में उनसे कोई सलाह नहीं ली गई। वहीं, सपा प्रत्याशियों के चुनाव के बारे में कहना था कि हाईकमान कहेगा तो वह प्रचार जरूर करेंगे।

अखिलेश सरकार की योजनाओं को रोक देने पर उनका कहना है कि ऐसा होना नहीं चाहिए। हालांकि सरकार की अभी शुरुआत है। वित्तीय स्वीकृतियां नहीं हो पाई हैं, इसकी वजह से व्यवधान तो है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव ने जनपद मथुरा और वाराणसी नगर निगम के चुनाव में महापौर पद के प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं।

वाराणसी से श्रीमती साधना गुप्ता पत्नी श्री संजय गुप्ता निवासी 21/62 कमक्षा वाराणसी, महापौर पद की प्रत्याशी होंगी।

मथुरा से श्री श्याम मुरारी बाल्मीकि पुत्र श्री रग्गोराम निवासी मछलीमण्डी बाल्मीकि नगर भरतपुर गेट, मथुरा से महापौर प्रत्याशी होंगे।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा है कि गतवर्ष 08 नवम्बर को केंद्रीय भाजपा सरकार ने नोटबंदी के जरिए पांच सौ और हजार रूपए के नोटों को चलन से बाहर करने की अचानक घोषणा के साथ उसके पीछे जो उद्देश्य बताए गए थे, वे सब खोखले थे। वस्तुतः सरकार के इस अदूरदर्शिता पूर्ण निर्णय से आर्थिक जगत में अराजकता का माहौल पैदा हुआ है और बेरोजगारी के साथ निर्माण कार्य बंद होने का दंश जनता को झेलना पड़ा।

श्री यादव ने कहा कि वे शुरू से ही कहते आ रहे हैं कि रूपया काला सफेद नहीं होता है, लेन-देन काला सफेद होता है। प्रधानमंत्री जी ने कालेधन का हौवा खड़ा किया पर स्वयं रिजर्व बैंक की रिपोर्ट कहती है कि जो नोट उसने जारी किए थे उसमें से 99 प्रतिशत वापस आ गए हैं। आतंकी गतिविधियां रोकने के दावों की हकीकत यह है कि कश्मीर घाटी में पहले से ज्यादा आतंकी घटनाएं घटी है। नक्सली गतिविधियां भी थमी नहीं है। पृथकतावादी जगह-जगह सिर उठा रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अपनी छवि चमकाने के लिए प्रधानमंत्री जी ने रिजर्व बैंक या मंत्रिमण्डलीय सहयोगियों को विश्वास में लिए बिना राजनीतिक फैसला लिया जिससे 64 बार उन्हें नियम बदलने पड़े। कृषि इस देश की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ है। रिजर्व बैंक मानता है कि नोटबंदी के नए नियमों के कारण नकदी का प्रवाह बाधित हुआ। फल स्वरूप किसान को औने-पौने अपनी फसल बेचनी पड़ी है। कर्ज में डूबे किसान को आत्महत्या करनी पड़ी रही है। आलू , धान और गन्ना किसानों पर बुरी तरह मार पड़ी।

श्री यादव ने कहा कि नोटबंदी की मार सबसे ज्यादा असंगठित क्षेत्र पर पड़ी क्योंकि यह क्षेत्र नकदी से संचालित होता है। उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र की देश की अर्थव्यवस्था में 45 फीसदी हिस्सेदारी हैं जिसमें 93 फीसदी में नकारात्मक प्रभाव पड़ने से हमारी विकास दर में भी गिरावट आ गयी। देश की जनता को अंधेरे में रखकर उसकी भावनाओं से खिलवाड़ करना लोकतंत्र में अपराध से कम नहीं।

श्री अखिलेश यादव ने कहा कि नोटबंदी के कारण निर्माण उद्योग में पूरी तरह गतिरोध की स्थिति पैदा हो गई है। बिल्डिंग उद्योग में लगे करोड़ों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। बड़ी कम्पनियों ने अपने यहां छंटनी कर दी हैं। जो भवन बने है, उनके खरीददार नहीं मिल रहे हैं। देश की विकास दर में भारी गिरावट आई है। आंकड़े बताते हैं यह दर 1 फीसदी से भी कम है।

भाजपा सरकार ने कहा था कि करीब तीन लाख करोड़ का कालाधन रद्द हो जाएगा पर वह सारा धन वापस आ गया। कालाधन सफेद हो गया। नोटबंदी का सबसे बुरा शिकार गरीब आदमी रहा जो इस आपदा से उबर नहीं पा रहा है। खुद सरकार पर भी नए नोट छापने का खर्च बढ़ा है। नोटबंदी के बाद नए नोटों की छपाई लागत 7965 करोड़ हुई जबकि वर्ष 2015-16 में यह लागत 3421 करोड़ रूपए थीं।

श्री यादव ने कहा कि जिस नोटबंदी के दौर में दर्जनों लोगों की जाने चली गई, लोगों के शादी ब्याह और अंतिम संस्कार तक में अड़चनें पैदा हो गई और मध्यवर्गीय तथा अल्प आय वर्ग वाले परिवारों का बजट भी बिगड़ गया उसको लेकर भाजपा सरकार ‘जश्न‘ मनाए यह भारत की जनता का उपहास है।

श्री अखिलेश यादव ने कहा कि इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता है कि नोटबंदंी के फैसले से इस आपदा के चलते भारत के विकास में गतिरोध की स्थिति पैदा हो गई है। अर्थनीति के फैसलों में मनमानापन अलोकतांत्रिक एवं जनविरोधी कदम था जिसको सही ठहराने के लिए भारत सरकार तरह-तरह के बहाने बना रही है। देश के समक्ष जो बुनियादी समस्याएं हैं, उनके समाधान के बजाय भाजपा सरकार भ्रमित करने के लिए स्वप्न लोक का परिचय कराती रहती है। सरकारों का काम जनता को धोखा देना नहीं हो सकता।

Musing India
Author: Musing India

musingindia.com is a leading company in Hindi / English online space. musingindia.com is a leading company in Hindi/English online space. Launched in 2013, musingindia.com is the fastest growing Hindi/English news website in India, and focuses on delivering around the clock national and international news and analysis, business, sports, technology entertainment, lifestyle and astrology. As per Google Analytics, musingindia.com gets 10,000 Unique Visitors every month.

Facebooktwitterredditpinterestlinkedinmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *