सीएम योगी आदित्यनाथ

100 crore scam in Uttar Pradesh roadways corporation in Yogi Government

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उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में 100 करोड़ रुपए का घोटाला, रिकवरी नोटिस

अनुबंधित बसों में सीटों की संख्या ज्यादा दिखाकर परिवहन निगम को 100 करोड़ का चूना लगा दिया गया। प्रदेश भर में साधारण सेवा की इन बसों को कागजों पर ज्यादा सीटों वाली दिखाकर अनुबंधित बस मालिकों ने सात वर्ष तक अधिक भुगतान लिया।

जांच में मामला सही पाए जाने पर निगम ने बस मालिकों से वसूली करने के आदेश दिए हैं। हालांकि प्रबंधन ने अपने अफसरों को क्लीनचिट दे दी है।

यह खेल लखनऊ, कानपुर, हरदोई, चित्रकूट, गोरखपुर, वाराणसी परिक्षेत्र के जिलों में वर्ष 2011 से 2017 तक चलता रहा। अफसरों से साठगांठ कर बस को ज्यादा सीट क्षमता वाली दिखाया जिसकी वजह से प्रति किमी. औसतन 3.25 रुपये ज्यादा भुगतान लिया।

एक महीने में एक बस औसतन दस हजार किमी. चलती है। ऐसे में हर महीने एक बस को औसतन 32 हजार 500 रुपये ज्यादा भुगतान हुआ। सात साल में एक बस को 27 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया।

ऐसे हुआ खेल

निगम में सीट क्षमता के हिसाब से बसों को चार श्रेणियों में बांटा गया है। इसी के हिसाब से प्रति किमी. की तय दर से अनुबंधित बसों के लिए भुगतान किया जाता है। किसी मालिक ने 36-39 सीट क्षमता की बस का अनुबंध किया तो उसेे डीजल औसत का निर्धारण 28-35 सीट वाली बस की श्रेणी में करके पेमेंट होना चाहिए था। लेकिन साठगांठ कर 40-45 सीट वाली बसों के लिए भुगतान कर दिया गया।

बस का भुगतान रेट

सीट रेट प्रति किमी.
22-27 8.57 रुपये
28-35 10.07 रुपये
40-45 11.80 रुपये
54-बड़ी 15.16 रुपये

ऐसे सामने आया मामला

घोटाले की भनक मुख्यालय पहुंची तो जांच के बाद रिपोर्ट प्रबंध निदेशक पी. गुरु प्रसाद के सामने रखी गई। प्रबंध निदेशक ने सीधे मुख्य प्रधान प्रबंधक (संचालन) एचएस गाबा को बस मालिकों से ज्यादा ली गई रकम की वसूली का निर्देश दिया। मुख्य प्रधान प्रबंधक (संचालन) ने प्रदेश के सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को बस मालिक से रिकवरी आदेश दिया है।

बस मालिक बोले-हर मामले की जांच के बाद हो कार्रवाई

उत्तर प्रदेश अनुबंधित बस ओनर्स एसोसिएशन के महासचिव अजीत कुमार सिंह ने अपर प्रबंध निदेशक को पत्र देकर बस मालिकों के उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा- पहले सभी मामलों की जांच की जाए। जिस बस मालिक पर अवैध भुगतान की बात पता चले उससे उतनी ही वसूली की जाए।

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Author: Musing India

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